उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर बढ़ी हलचल, इस दिन आएगी अंतिम लिस्ट

चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं।

नवदीप रिणवा
नवदीप रिणवा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 01:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश में में बड़ी संख्या में लोग वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने और हटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां जमीनी स्तर पर तेज हो चुकी हैं। चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं। अब उत्तर प्रदेश में इस पूरी कवायद का अगला अहम चरण सुनवाई का होगा, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे आवेदन

मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा समाप्त होने से पहले उत्तर प्रदेश में अंतिम 24 घंटे के दौरान भी आवेदन का सिलसिला तेज बना रहा। इस अवधि में 1.66 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग की। वहीं 7,329 लोगों ने फॉर्म-7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया। शुक्रवार को दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि पूरी होने के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों और नोटिस वाले मामलों की सुनवाई की जाएगी।

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में बढ़े नाम जुड़वाने के आवेदन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद से 6 मार्च तक उत्तर प्रदेश में 70,69,810 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। इसी अवधि में 2,642 आवेदन फॉर्म-6(ए) के तहत प्राप्त हुए। वहीं, इसी दौरान उत्तर प्रदेश में 2,68,682 लोगों ने फॉर्म-7 भरकर मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर लोगों की भागीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिल रही है।

ड्राफ्ट लिस्ट से पहले भी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में आए थे आवेदन

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले भी उत्तर प्रदेश में मतदाता पंजीकरण को लेकर पर्याप्त सक्रियता रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस चरण में 16,18,574 लोगों ने अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आवेदन किया था। इसके अलावा 49,399 लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए। इन दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो उत्तर प्रदेश में नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों की संख्या बहुत बड़ी है, जो बताती है कि प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को गंभीरता से लिया गया है। दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का फोकस सुनवाई पर रहेगा। निर्वाचन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नोटिस पाने वाले करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई 27 मार्च तक पूरी की जाएगी। इसके बाद सभी दावों, आपत्तियों और जांच प्रक्रियाओं का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश की संशोधित और अंतिम वोटर लिस्ट 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह सूची आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम साबित होगी।

उत्तर प्रदेश में 1.04 करोड़ नामों का 2003 की सूची से नहीं हुआ मिलान

निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उत्तर प्रदेश के उन मतदाताओं का सत्यापन भी है, जिनके रिकॉर्ड पुराने डाटाबेस से मेल नहीं खा रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं के नामों और विवरणों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इन मामलों की पड़ताल जारी है, ताकि अंतिम सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाई जा सके।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की भागीदारी रही बेहद सीमित

मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे अहम अभियान में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों की सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दी। अब तक भरे गए 84 लाख से अधिक फॉर्म-6 में से केवल 40,643 आवेदन ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के माध्यम से भरवाए गए। इनमें सबसे ज्यादा 26,253 फॉर्म भाजपा के बीएलए के जरिए भरे गए। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी इस व्यापक प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित रही, जबकि आम मतदाताओं ने खुद आगे बढ़कर आवेदन किए।

6 जनवरी को जारी हुई थी उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 6 जनवरी को उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। इस ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। आयोग के अनुसार, यह कवायद उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से की गई थी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से निर्णायक राज्य में यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता डेटा की शुद्धता से जुड़ा बड़ा अभियान मानी जा रही है। UP News

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बिग ब्रेकिंग न्यूज : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को जान का खतरा, बाल बाल बचे

उनके हेलिकॉप्टर में अचानक तकनीकी खराबी आ गई और केबिन में धुआं भरने लगा। हालात बिगड़ते देख पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए हेलिकॉप्टर की लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई।

केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 12:02 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बाल-बाल बच गए। उनके हेलिकॉप्टर में अचानक तकनीकी खराबी आ गई और केबिन में धुआं भरने लगा। हालात बिगड़ते देख पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए हेलिकॉप्टर की लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई।

उड़ान के दौरान अचानक बिगड़ी स्थिति

मिली जानकारी के अनुसार डिप्टी सीएम हेलिकॉप्टर से कौशांबी के दौरे पर जा रहे थे। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी खराबी आ गई और हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। इससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सभी की सांसें थम गईं।

पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

स्थिति गंभीर होते देख पायलट ने तुरंत फैसला लेते हुए हेलिकॉप्टर को वापस मोड़ा और लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई। पायलट की सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया।

सभी लोग सुरक्षित

हेलिकॉप्टर में मौजूद डिप्टी सीएम, सुरक्षाकर्मी और अन्य स्टाफ पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। लैंडिंग के बाद तकनीकी टीम ने हेलिकॉप्टर की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद डिप्टी सीएम सड़क मार्ग से अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।

जांच में जुटी तकनीकी टीम

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल होने के कारण धुआं भरने की स्थिति बनी। फिलहाल एयरपोर्ट अथॉरिटी और तकनीकी विशेषज्ञ पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।  UP News

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मिशन-2027 के लिए भाजपा-संघ का बड़ा मंथन, योगी ने भी बढ़ाई सक्रियता

राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली शुरुआती कवायद माना जा रहा है। भाजपा और संघ दोनों यह समझ चुके हैं कि 2024 के चुनावी अनुभवों के बाद उत्तर प्रदेश में अब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर मुद्दे को अलग नजरिये से समझने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा-संघ का मंथन तेज
उत्तर प्रदेश में भाजपा-संघ का मंथन तेज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 10:12 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मिशन-2027 को लेकर अभी से हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उत्तर प्रदेश में चुनावी जमीन को समय रहते मजबूत करने के लिए क्षेत्रवार रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस बार सबसे खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही समन्वय बैठकों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और इन बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली शुरुआती कवायद माना जा रहा है। भाजपा और संघ दोनों यह समझ चुके हैं कि 2024 के चुनावी अनुभवों के बाद उत्तर प्रदेश में अब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर मुद्दे को अलग नजरिये से समझने की जरूरत है। यही वजह है कि इस बार रणनीति केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से अलग-अलग फोकस तय किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बदला चुनावी तैयारी का अंदाज

संघ और भाजपा के बीच समन्वय बैठकें पहले भी होती रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में चुनाव से काफी पहले इस तरह क्षेत्रवार बैठकों का सिलसिला एक बदले हुए राजनीतिक दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। पहले जहां शीर्ष स्तर की बैठकों तक ही प्रमुख नेताओं की भूमिका ज्यादा दिखाई देती थी, वहीं अब जमीनी सियासत को समझने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी सीधी भागीदारी बढ़ाई गई है। इसी बदले हुए ढांचे के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है। उनके साथ उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी भी इन बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा 2027 के चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

क्षेत्रवार मुद्दों पर बन रहा अलग राजनीतिक खाका

मिशन-2027 के लिए उत्तर प्रदेश में जो नई रणनीति तैयार की जा रही है, उसका केंद्र बिंदु क्षेत्रवार मुद्दों की पहचान है। पार्टी और संघ यह समझने की कोशिश में हैं कि पूर्वांचल, अवध, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य क्षेत्र में कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा असर डाल सकते हैं। इसी आधार पर आगे चुनावी प्रचार की भाषा, स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश में शिक्षा, सामाजिक प्रतिनिधित्व, युवाओं की अपेक्षाएं, धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श और विपक्ष के नारों के प्रभाव जैसे पहलुओं का भी बारीकी से आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इन्हीं बिंदुओं के आधार पर चुनावी संदेश को और धार दी जाएगी। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने उत्तर प्रदेश में भाजपा और संघ दोनों को यह संदेश दिया कि केवल पारंपरिक समीकरणों के भरोसे आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। इसी कारण अब संगठन ने उत्तर प्रदेश के हर इलाके की नब्ज टटोलने का फैसला किया है। जमीनी हकीकत को समझने, स्थानीय असंतोष को पहचानने और सामाजिक संतुलन को साधने की दिशा में गंभीर मंथन चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समय से पहले शुरू हुई यह सक्रियता बताती है कि भाजपा और संघ 2027 की तैयारी को सामान्य चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

संघ की बढ़ी सक्रियता भी दे रही साफ संकेत

पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश में संघ की गतिविधियों में तेजी भी साफ महसूस की गई है। अलग-अलग क्षेत्रों में सामाजिक संवाद, वैचारिक कार्यक्रम और जनसंपर्क के जरिए माहौल को अपने पक्ष में बनाने की कोशिश जारी है। दूसरी ओर भाजपा भी सरकार और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत करने में जुटी हुई है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में हो रही समन्वय बैठकों को केवल औपचारिक बैठकें नहीं माना जा रहा, बल्कि इन्हें 2027 के चुनावी ब्लूप्रिंट की बुनियाद के तौर पर देखा जा रहा है। इन बैठकों से मिलने वाले फीडबैक का असर आगे संगठन विस्तार, मुद्दों के चयन और चेहरों की भूमिका पर पड़ सकता है।

योगी की मौजूदगी ने बढ़ाया बैठकों का राजनीतिक महत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इन बैठकों में शामिल होना अपने आप में बड़ा संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन, दोनों मिशन-2027 को लेकर एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ना चाहते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भाजपा इस बार उत्तर प्रदेश में हर राजनीतिक चुनौती का जवाब पहले से तैयार रखना चाहती है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारी अब शुरुआती चर्चाओं से आगे बढ़कर ठोस रणनीतिक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्षेत्रवार बैठकों से निकले निष्कर्ष किस तरह चुनावी अभियान, नेतृत्व चयन और राजनीतिक संदेश का हिस्सा बनते हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। UP News

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