उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर बढ़ी हलचल, इस दिन आएगी अंतिम लिस्ट
चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश में में बड़ी संख्या में लोग वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने और हटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां जमीनी स्तर पर तेज हो चुकी हैं। चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं। अब उत्तर प्रदेश में इस पूरी कवायद का अगला अहम चरण सुनवाई का होगा, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे आवेदन
मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा समाप्त होने से पहले उत्तर प्रदेश में अंतिम 24 घंटे के दौरान भी आवेदन का सिलसिला तेज बना रहा। इस अवधि में 1.66 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग की। वहीं 7,329 लोगों ने फॉर्म-7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया। शुक्रवार को दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि पूरी होने के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों और नोटिस वाले मामलों की सुनवाई की जाएगी।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में बढ़े नाम जुड़वाने के आवेदन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद से 6 मार्च तक उत्तर प्रदेश में 70,69,810 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। इसी अवधि में 2,642 आवेदन फॉर्म-6(ए) के तहत प्राप्त हुए। वहीं, इसी दौरान उत्तर प्रदेश में 2,68,682 लोगों ने फॉर्म-7 भरकर मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर लोगों की भागीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिल रही है।
ड्राफ्ट लिस्ट से पहले भी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में आए थे आवेदन
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले भी उत्तर प्रदेश में मतदाता पंजीकरण को लेकर पर्याप्त सक्रियता रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस चरण में 16,18,574 लोगों ने अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आवेदन किया था। इसके अलावा 49,399 लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए। इन दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो उत्तर प्रदेश में नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों की संख्या बहुत बड़ी है, जो बताती है कि प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को गंभीरता से लिया गया है। दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का फोकस सुनवाई पर रहेगा। निर्वाचन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नोटिस पाने वाले करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई 27 मार्च तक पूरी की जाएगी। इसके बाद सभी दावों, आपत्तियों और जांच प्रक्रियाओं का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश की संशोधित और अंतिम वोटर लिस्ट 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह सूची आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम साबित होगी।
उत्तर प्रदेश में 1.04 करोड़ नामों का 2003 की सूची से नहीं हुआ मिलान
निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उत्तर प्रदेश के उन मतदाताओं का सत्यापन भी है, जिनके रिकॉर्ड पुराने डाटाबेस से मेल नहीं खा रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं के नामों और विवरणों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इन मामलों की पड़ताल जारी है, ताकि अंतिम सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाई जा सके।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की भागीदारी रही बेहद सीमित
मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे अहम अभियान में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों की सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दी। अब तक भरे गए 84 लाख से अधिक फॉर्म-6 में से केवल 40,643 आवेदन ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के माध्यम से भरवाए गए। इनमें सबसे ज्यादा 26,253 फॉर्म भाजपा के बीएलए के जरिए भरे गए। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी इस व्यापक प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित रही, जबकि आम मतदाताओं ने खुद आगे बढ़कर आवेदन किए।
6 जनवरी को जारी हुई थी उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 6 जनवरी को उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। इस ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। आयोग के अनुसार, यह कवायद उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से की गई थी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से निर्णायक राज्य में यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता डेटा की शुद्धता से जुड़ा बड़ा अभियान मानी जा रही है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश में में बड़ी संख्या में लोग वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने और हटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां जमीनी स्तर पर तेज हो चुकी हैं। चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं। अब उत्तर प्रदेश में इस पूरी कवायद का अगला अहम चरण सुनवाई का होगा, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे आवेदन
मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा समाप्त होने से पहले उत्तर प्रदेश में अंतिम 24 घंटे के दौरान भी आवेदन का सिलसिला तेज बना रहा। इस अवधि में 1.66 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग की। वहीं 7,329 लोगों ने फॉर्म-7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया। शुक्रवार को दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि पूरी होने के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों और नोटिस वाले मामलों की सुनवाई की जाएगी।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में बढ़े नाम जुड़वाने के आवेदन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद से 6 मार्च तक उत्तर प्रदेश में 70,69,810 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। इसी अवधि में 2,642 आवेदन फॉर्म-6(ए) के तहत प्राप्त हुए। वहीं, इसी दौरान उत्तर प्रदेश में 2,68,682 लोगों ने फॉर्म-7 भरकर मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर लोगों की भागीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिल रही है।
ड्राफ्ट लिस्ट से पहले भी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में आए थे आवेदन
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले भी उत्तर प्रदेश में मतदाता पंजीकरण को लेकर पर्याप्त सक्रियता रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस चरण में 16,18,574 लोगों ने अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आवेदन किया था। इसके अलावा 49,399 लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए। इन दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो उत्तर प्रदेश में नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों की संख्या बहुत बड़ी है, जो बताती है कि प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को गंभीरता से लिया गया है। दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का फोकस सुनवाई पर रहेगा। निर्वाचन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नोटिस पाने वाले करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई 27 मार्च तक पूरी की जाएगी। इसके बाद सभी दावों, आपत्तियों और जांच प्रक्रियाओं का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश की संशोधित और अंतिम वोटर लिस्ट 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह सूची आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम साबित होगी।
उत्तर प्रदेश में 1.04 करोड़ नामों का 2003 की सूची से नहीं हुआ मिलान
निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उत्तर प्रदेश के उन मतदाताओं का सत्यापन भी है, जिनके रिकॉर्ड पुराने डाटाबेस से मेल नहीं खा रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं के नामों और विवरणों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इन मामलों की पड़ताल जारी है, ताकि अंतिम सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाई जा सके।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की भागीदारी रही बेहद सीमित
मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे अहम अभियान में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों की सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दी। अब तक भरे गए 84 लाख से अधिक फॉर्म-6 में से केवल 40,643 आवेदन ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के माध्यम से भरवाए गए। इनमें सबसे ज्यादा 26,253 फॉर्म भाजपा के बीएलए के जरिए भरे गए। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी इस व्यापक प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित रही, जबकि आम मतदाताओं ने खुद आगे बढ़कर आवेदन किए।
6 जनवरी को जारी हुई थी उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 6 जनवरी को उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। इस ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। आयोग के अनुसार, यह कवायद उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से की गई थी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से निर्णायक राज्य में यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता डेटा की शुद्धता से जुड़ा बड़ा अभियान मानी जा रही है। UP News












