संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव के बेटे और सांसद आदित्य यादव ने जांच रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे दोबारा जांच कराने की मांग की है।

UP News : संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव के बेटे और सांसद आदित्य यादव ने जांच रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे दोबारा जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो संभल हिंसा की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आदित्य यादव ने रविवार को बदायूं के बबराला स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र के एक दिवसीय दौरे पर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संभल हिंसा की जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया। उनके मुताबिक, घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। UP News
सांसद आदित्य यादव ने कहा कि संभल हिंसा से संबंधित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश किए जाने के बावजूद घटना के सभी पहलुओं पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में सपा की सरकार बनती है तो मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी। आदित्य यादव के मुताबिक, जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। UP News
आदित्य यादव ने कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी की कथित टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ी है। ऐसे में कांवड़ियों को लेकर आपत्तिजनक या भड़काऊ टिप्पणी करना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने लोगों से समाज को बांटने वाले बयानों और ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए समाज में विभाजन पैदा करने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देना चाहिए। आदित्य यादव ने प्रदेश सरकार पर भी आरोप लगाया कि कई मामलों में पूरी सच्चाई सामने नहीं आने दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की जांच का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना नहीं, बल्कि वास्तविक तथ्यों को सामने लाना होना चाहिए। UP News
संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। घटना की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया गया था। आयोग में पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और पूर्व डीजीपी एके जैन को सदस्य बनाया गया था। आयोग की रिपोर्ट हाल में विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश की गई। रिपोर्ट में हिंसा के पीछे राजनीतिक महत्वाकांक्षा, स्थानीय वर्चस्व और भीड़ जुटाने से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है। आयोग ने सर्वेक्षण को लेकर कथित तौर पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने, लोगों को जुटाने और हिंसा भड़काने से जुड़े तथ्यों की भी चर्चा की है। UP News
न्यायिक आयोग के मुताबिक जांच के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों समेत कुल 199 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आयोग ने चश्मदीदों की गवाही, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण किया। रिपोर्ट में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, जामा मस्जिद प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल समेत कई लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। आयोग ने घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और कथित साजिश के पहलुओं पर भी चर्चा की है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर हिंसा के पीछे लोगों को जुटाने और उन्हें उकसाने से जुड़े तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। UP News
विज्ञापन