प्रयागराज के संगम पर पिंडदान करने की इच्छा रखने वालो के लिए इस बार एक ऐसी व्यवस्था सामने आई है, जिसके बारे में जानकर आप भी चौंक सकते हैं। पितृ पक्ष के दौरान अगर किसी कारण से आप प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो क्या बिना संगम पहुंचे भी पिंडदान की प्रक्रिया में शामिल हुआ जा सकता है?

UP News : पितृ पक्ष शुरू होने से पहले संगम नगरी प्रयागराज में श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसी व्यवस्था सामने आई है, जिसने पारंपरिक पिंडदान के तरीके को नया रूप दे दिया है। अब जो लोग किसी वजह से प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे अपने घर से ही ऑनलाइन माध्यम से संगम पर पिंडदान की प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। तीर्थ पुरोहितों की ओर से इसकी व्यवस्था की गई है। पितृ पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रयागराज के संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। संगम को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है, इसलिए यहां तर्पण और पिंडदान के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। UP News
पितृ पक्ष के दौरान हर परिवार के लिए प्रयागराज पहुंचना संभव नहीं होता। नौकरी, दूरी, स्वास्थ्य, समय की कमी या अन्य कारणों से कई लोग चाहकर भी संगम पर पिंडदान नहीं कर पाते। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था शुरू की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वीडियो कॉल के जरिए श्रद्धालु अपने घर से कर्मकांड में शामिल हो सकते हैं और पुरोहित उनके नाम तथा गोत्र के अनुसार अनुष्ठान करा सकते हैं। UP News
ऑनलाइन व्यवस्था में श्रद्धालु को वीडियो कॉल के माध्यम से पुरोहित से जोड़ा जाएगा। पुरोहित द्वारा बताए गए तरीके से श्रद्धालु अपने घर पर रहकर प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों को सुविधा देना है जो पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज नहीं आ सकते। बाद में प्रयागराज आने पर दोबारा पिंडदान कराने की बात भी सामने आई है। UP News
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत *26 सितंबर 2026* से होगी। इसका समापन *10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या* के साथ होगा। इस दौरान अलग-अलग तिथियों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। परंपरा के अनुसार जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। यदि मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है। UP News
प्रयागराज का संगम धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन कर्मों के जरिए पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। UP News
प्रयागराज में ऑनलाइन पिंडदान की चर्चा नई नहीं है। कोरोना काल में भी ऑनलाइन पिंडदान और तर्पण की व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय धार्मिक जानकारों के बीच इसे लेकर अलग-अलग मत सामने आए थे। कुछ ने इसे परिस्थितियों के अनुरूप विकल्प माना था, जबकि कुछ तीर्थ पुरोहितों ने पारंपरिक विधि के पक्ष में आपत्ति जताई थी। इसलिए ऑनलाइन पिंडदान की मौजूदा व्यवस्था को श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध एक सुविधा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि धार्मिक विधि-विधान को लेकर अलग-अलग परंपराओं और मतों का पालन करने वाले लोग अपने पुरोहित से सलाह ले सकते हैं। UP News
प्रयागराज में इस बार सिर्फ ऑनलाइन पिंडदान ही चर्चा में नहीं है। पितृ पक्ष को देखते हुए एक समिति की ओर से *'पितृ पैकेज'* भी शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था में प्रयागराज के साथ काशी और गया में पिंडदान के लिए तीर्थ पुरोहितों की व्यवस्था, आने-जाने, रहने और भोजन जैसी सुविधाएं शामिल होने की बात कही गई है। जो लोग प्रयागराज नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान का विकल्प भी बताया गया है। UP News
इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर* तक रहेगा। प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:
- 26 सितंबर — पूर्णिमा श्राद्ध
- 27 सितंबर — प्रतिपदा
- 28 सितंबर — द्वितीया
- 29 सितंबर — तृतीया
- 30 सितंबर — चतुर्थी
- 1 अक्टूबर — पंचमी/षष्ठी से संबंधित श्राद्ध परंपरा
- 2 अक्टूबर — सप्तमी
- 3 अक्टूबर — अष्टमी
- 4 अक्टूबर — नवमी
- 5 अक्टूबर — दशमी
- 6 अक्टूबर — एकादशी
- 7 अक्टूबर — द्वादशी
- 8 अक्टूबर — त्रयोदशी
- 9 अक्टूबर — चतुर्दशी
- 10 अक्टूबर — सर्वपितृ अमावस्या UP News
पितृ पक्ष के दौरान संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। दूर-दराज के शहरों और दूसरे राज्यों से भी लोग पिंडदान और तर्पण के लिए प्रयागराज आते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था ऐसे लोगों के लिए एक विकल्प बन सकती है जो इस अवधि में यात्रा नहीं कर सकते। वहीं जो श्रद्धालु संगम पहुंचकर पारंपरिक तरीके से पिंडदान करना चाहते हैं, उनके लिए प्रयागराज में पितृ पक्ष की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। UP News
पितृ पक्ष के धार्मिक अनुष्ठानों में तकनीक की यह भूमिका लोगों के लिए नया अनुभव हो सकती है। खासतौर पर विदेश या दूसरे राज्यों में रहने वाले ऐसे परिवार, जो हर साल प्रयागराज नहीं आ पाते, उनके लिए ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने की सुविधा एक विकल्प के रूप में सामने आई है। हालांकि पिंडदान और श्राद्ध धार्मिक कर्मकांड हैं, इसलिए अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार विधि अपनाते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित तीर्थ पुरोहित से प्रक्रिया और धार्मिक मान्यता के बारे में जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। UP News
इस व्यवस्था के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पितृ पक्ष में पिंडदान के लिए संगम पहुंचना अनिवार्य नहीं रहेगा? मौजूदा व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे श्रद्धालुओं को विकल्प देना है जो किसी कारण प्रयागराज नहीं आ सकते। लेकिन धार्मिक कर्मकांड की विधि और मान्यता को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं। इसलिए इसे पारंपरिक पिंडदान का सार्वभौमिक विकल्प* मानने के बजाय उपलब्ध सुविधा के रूप में देखना अधिक उचित होगा। UP News
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