निषाद पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर अपनी सहयोगी बीजेपी के सामने खुलकर अपनी मांग रखी।

UP News : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही सियासी दलों और उनके सहयोगियों के बीच दबाव की राजनीति भी दिखाई देने लगी है। निषाद पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर अपनी सहयोगी बीजेपी के सामने खुलकर अपनी मांग रखी। उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए मंत्री पद या सत्ता महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि निषाद समाज को उसका अधिकार मिलना प्राथमिकता है। लखनऊ में आयोजित निषाद पार्टी के 11वें स्थापना दिवस समारोह में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। मंच से संजय निषाद ने कहा कि यदि समाज के हित में मांग पूरी होती है तो उन्हें पद की भी परवाह नहीं है। उन्होंने सरकार से निषाद समाज की आरक्षण संबंधी मांग पर जल्द फैसला लेने की अपील की और संकेत दिया कि इस मुद्दे का असर आगामी विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है। UP News
डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में संजय निषाद ने कहा कि उनका राजनीतिक उद्देश्य केवल सत्ता में बने रहना नहीं है। उनके लिए समाज के अधिकार और सम्मान का मुद्दा ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण से जुड़ी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो निषाद समाज के बीच इसका राजनीतिक संदेश जाएगा। उनके इस बयान को बीजेपी के लिए सहयोगी दल की ओर से बढ़ते दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सांसद रहते हुए निषाद समाज के मुद्दे उठाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय संसद में निषाद समाज की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जाती थी और अब सरकार में रहते हुए इस दिशा में ठोस पहल की उम्मीद है। उन्होंने 31 दिसंबर 2016 के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए केवट, मल्लाह, बिंद और मझवार समुदायों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग दोहराई। संजय निषाद ने 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नदियों के आसपास स्थित करीब 43 विधानसभा सीटों पर निषाद समुदाय का प्रभाव है। उन्होंने संकेत दिया कि इस वर्ग की राजनीतिक नाराजगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। UP News
कार्यक्रम में आरक्षण के साथ सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संजय निषाद ने आरक्षित पदों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि पिछड़े वर्गों के भीतर सभी समुदायों को समान अवसर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निषाद समाज के साथ-साथ केवट, मल्लाह, बिंद और मझवार समुदायों को भी उनके अधिकार मिलने चाहिए। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने भी आरक्षण की मांग को लेकर जोरदार नारे लगाए। UP News
संजय निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के अधिकारों के सामने पद और सत्ता का कोई महत्व नहीं है। उनका संकेत साफ था कि यदि सरकार और संगठन के स्तर पर उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तो वह मंत्री पद को भी प्राथमिकता नहीं देंगे। उनके इस बयान को बीजेपी के साथ गठबंधन में रहते हुए अपनी राजनीतिक ताकत और सामाजिक आधार का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। UP News
निषाद पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी शामिल नहीं हो सके। उनकी जगह प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह कार्यक्रम में पहुंचे और मंच साझा किया। कार्यक्रम में जुटी भीड़ और संजय निषाद के तेवरों ने यूपी की सहयोगी राजनीति में निषाद पार्टी की भूमिका को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और बीजेपी की ओर से क्या रुख सामने आता है और इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर कितना पड़ता है। UP News
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