
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि रूडी को कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों का समर्थन मिला, जबकि बालियान को सरकार समर्थित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था। मतदान से पहले कई दिनों तक ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का दौर चला, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प बन गया। बीजेपी सांसदों के बीच भी इस चुनाव को लेकर भ्रम की स्थिति थी। अभिनेत्री और बीजेपी समर्थक कंगना रनौत ने इसे पार्टी के भीतर एक नए और जटिल संघर्ष के रूप में देखा।
कांस्टीट्यूशन क्लब के कुल 1295 वोटर सदस्य हैं, जिनमें मौजूदा और पूर्व सांसद शामिल हैं। इस चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा, कांग्रेस की सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू समेत कई वरिष्ठ नेता मतदान करने पहुंचे। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिये चुनाव प्रचार काफी सक्रिय रहा। बालियान के समर्थक सांसद निशिकांत दूबे ने रूडी पर क्लब को ‘अफसरों और दलालों का अड्डा’ बनाने का आरोप लगाते हुए इसे सुधारने की बात कही।
बता दें कि कांस्टीट्यूशन क्लब के इतिहास में अब तक कुल तीन चुनाव हुए हैं—2009, 2014 और 2019 में। इस बार सचिव (प्रशासन) के अलावा कोषाध्यक्ष, खेल सचिव और संस्कृति सचिव पदों के लिए चुनाव नहीं हुए। इन पदों पर कांग्रेस के एपी जितेंद्र रेड्डी, राजीव शुक्ला और डीएमके के तिरुची सिवा को निर्विरोध चुना गया। Uttar Pradesh Samachar