
गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित श्री तेग बहादुर संदेश यात्रा’के स्वागत समारोह में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मांतरण की हालिया घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने बलरामपुर में ATS द्वारा किए गए खुलासे का जिक्र करते हुए कहा, कुछ लोग अनुसूचित जातियों को लालच और भय दिखाकर उनका धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहे हैं। ये संविधान और सामाजिक समरसता दोनों के खिलाफ है। प्रदेश सरकार ऐसी गतिविधियों पर कठोरतम कार्रवाई कर रही है। UP News
सीएम योगी ने इतिहास से उदाहरण देते हुए कहा, “वो कैसा भयावह कालखंड रहा होगा जब औरंगजेब जैसा क्रूर शासक सत्ता में था। उसका एक ही उद्देश्य था—सनातन धर्म का समूल नाश और जबरन इस्लामीकरण। लेकिन उसी दौर में गुरु तेग बहादुर जी ने उनके सामने सीना तानकर खड़े होकर सनातन धर्म की रक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 350 साल पहले जो संघर्ष था, उसकी प्रतिध्वनि आज भी सुनाई देती है—बदलते हुए चेहरे और नए हथियारों के साथ। उन्होंने दावा किया कि बलरामपुर प्रकरण में धर्मांतरण के लिए विदेशों से पैसे आ रहे थे और करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की लेन-देन की बात सामने आई है। UP News
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “गुरु तेग बहादुर जी का जीवन अपने आप में एक जीवंत संदेश है कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने अपने पथ से कभी विचलित नहीं हुए और बलिदान की अमर गाथा रच दी। संदेश यात्रा लखनऊ से शुरू होकर कानपुर, इटावा, आगरा होते हुए दिल्ली के ऐतिहासिक शीशगंज गुरुद्वारे तक पहुंचेगी। इस दौरान समाज को शहादत और बलिदान की उस विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जो आज भी प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदू और सिख समुदाय के बीच एकता को कमजोर करने के प्रयास लंबे समय से किए जाते रहे हैं।
उन्होंने कहा, “सिख गुरुओं के त्याग और बलिदान की जो परंपरा रही है, उसे तोड़ने के लिए समय-समय पर षड्यंत्र रचे गए हैं। हमें सतर्क रहना होगा, सजग रहना होगा।”सीएम योगी ने कहा कि आज का शहीदी दिवस कार्यक्रम हमें प्रेरित करता है कि हम उन मूल्यों को जीवित रखें जिनके लिए सिख गुरुओं ने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाना एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत की जानकारी मिलेगी। UP News