
UP News : उत्तर प्रदेश एक बार फिर देश की आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से चर्चा के केंद्र में है। राज्य के बलरामपुर जिले से एक ऐसा धर्मांतरण सिंडिकेट उजागर हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क को चलाने वाले मुख्य चेहरे केवल सातवीं कक्षा तक शिक्षित हैं, लेकिन करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग के सहारे इन्होंने एक संगठित तंत्र खड़ा कर लिया। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित इंडो-नेपाल सीमा के पास उतरौला कस्बे को इस पूरे ऑपरेशन का आधार बनाया गया, जहां से जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन और नीतू रोहरा उर्फ नसरीन वर्षों से धर्मांतरण की गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।
STF और ATS की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क को करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई, जिसके माध्यम से पुणे से लेकर बलरामपुर तक कीमती संपत्तियां खरीदी गईं। जांच में जो तथ्य सबसे अधिक हैरान करते हैं, वह है इस पूरे नेटवर्क के संचालकों की शिक्षा – तीनों ही आरोपी केवल सातवीं तक शिक्षित हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नीतू रोहरा उर्फ नसरीन का जन्म 11 अगस्त 1982 को हुआ था और उन्होंने केवल सातवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की। उनके पति नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन, जिनका जन्म 8 जून 1979 को दर्ज है, की शैक्षणिक योग्यता भी इतनी ही सीमित है। इतना ही नहीं, इनकी नाबालिग पुत्री—जिसे धर्म परिवर्तन के बाद 'सबीहा' नाम दिया गया—वह भी केवल सातवीं कक्षा तक शिक्षित है। तीनों के पासपोर्ट क्रमशः वर्ष 2024, 2026 और 2028 तक वैध बताए गए हैं।
इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माने जा रहे जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की भी शैक्षणिक पृष्ठभूमि महज सातवीं कक्षा तक की है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह वर्ष 2018 में एक बार दुबई की यात्रा कर चुका है, लेकिन अब तक उसका पासपोर्ट न तो बरामद हुआ है और न ही उसका नंबर एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हो सका है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि एक सीमित शिक्षित व्यक्ति ने अंतरराष्ट्रीय संपर्क कैसे स्थापित किए और वह किसकी सहायता से विदेशी वित्तीय तंत्र तक पहुंच सका ? यह पूरा मामला जांच एजेंसियों के लिए एक जटिल पहेली बनता जा रहा है। UP News