प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित सनातन धर्म संवाद कार्यक्रम अब विवादों में आ गया है। कार्यक्रम के पांच दिन बाद प्रशासन ने आयोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित सनातन धर्म संवाद कार्यक्रम अब विवादों में आ गया है। कार्यक्रम के पांच दिन बाद प्रशासन ने आयोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है। इस कदम ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। 29 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बस्ती में सनातन धर्म संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया था। यह कार्यक्रम राजकीय इंटर कॉलेज बस्ती के परिसर में आयोजित हुआ था, जिसे प्रशासन ने सशर्त अनुमति दी थी।
कार्यक्रम के आयोजक प्रशांत पांडे के खिलाफ कोतवाली थाना प्रभारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशांत पांडे राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। प्रशासन ने आयोजक पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है, जिनमें ध्वनि प्रदूषण नियम 2020 की धारा 5 और 6 तथा बीएनएस की धारा 223, 271 और 353(2)। यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप में की गई है।
जांच में सामने आया कि सशर्त अनुमति के बावजूद दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं हुआ। कार्यक्रम के दौरान धारा 163 के नियमों की अनदेखी की गई। कोविड-19 प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन हुआ। प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम में लाउडस्पीकर अत्यधिक तेज आवाज में बजाए गए। आसपास के लोगों को भारी असुविधा हुई। ध्वनि मानकों का उल्लंघन साफ तौर पर सामने आया है।
एफआईआर में यह भी आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ वक्ताओं ने ऐसे बयान दिए जिनसे समुदायों के बीच वैमनस्यता और तनाव बढ़ सकता है। इस पहलू को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। बताया जा रहा है कि गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इस मामले में कार्रवाई तेज हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस घटना से साफ संकेत मिलता है कि अब धार्मिक कार्यक्रमों में नियमों का पालन अनिवार्य होगा। प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही या विवाद को नजरअंदाज नहीं करेगा। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।