शिवा शर्मा मौत मामले में श्रद्धा दुबे और अन्य आरोपियों की हिरासत 14 दिन बढ़ी। पुलिस ने रिमांड क्यों नहीं मांगी? गायब मोबाइल और अधूरे बयानों से जांच पर उठे सवाल।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब एक नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है। इस मामले में मुख्य आरोपी मॉडल एवं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। तीनों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लखनऊ पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग ही नहीं की। जिस मामले में एक कारोबारी की मौत हुई, जिसमें हत्या के गंभीर आरोप लगे हैं और जिसमें मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं, वहां पुलिस का रिमांड नहीं मांगना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है। आखिर पुलिस को आरोपियों से पूछताछ की जरूरत क्यों महसूस नहीं हुई? क्या जांच में जुटी पुलिस के पास सभी सवालों के जवाब हैं या फिर अभी कई महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ना बाकी है?
शनिवार 31 अक्टूबर को श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश को अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने तीनों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी। इस दौरान पुलिस की ओर से किसी भी आरोपी को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में लेने की मांग नहीं की गई। खास बात यह है कि पुलिस के पास श्रद्धा दुबे से पूछताछ करने, उसके गायब मोबाइल फोन के बारे में जानकारी हासिल करने और घटना से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने के लिए कई सवाल मौजूद हैं। इसके बावजूद पुलिस ने PCR की अर्जी दाखिल नहीं की। इस घटनाक्रम ने जांच की दिशा और पुलिस की प्राथमिकताओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। UP News
इस पूरे मामले में श्रद्धा दुबे का पुराना मोबाइल फोन जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। गिरफ्तारी के समय पुलिस को श्रद्धा के पास से एक नया मोबाइल फोन मिला था, लेकिन उसमें डाटा उपलब्ध नहीं था। रिपोर्टों में फोन के फॉर्मेट होने की बात भी सामने आई है। पुराने मोबाइल फोन के संबंध में श्रद्धा ने पुलिस को बताया था कि वह नेपाल में कहीं गिर गया था। वहीं पुलिस के सामने यह भी आशंका रही कि पुराने मोबाइल को नष्ट करके कहीं फेंका गया हो सकता है।
मोबाइल फोन से निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती थीं:
ऐसे में पुराने मोबाइल की बरामदगी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
पुलिस की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। श्रद्धा दुबे और उसके सह-आरोपियों के जेल में रहने के दौरान विवेचक उनके बयान दर्ज करने के लिए जेल तक नहीं पहुंचे थे। गायब मोबाइल और दूसरे महत्वपूर्ण साक्ष्यों की बरामदगी के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी नहीं लगाई गई। इस घटनाक्रम ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब पुलिस के सामने पूछताछ के लिए इतने महत्वपूर्ण बिंदु मौजूद थे तो जांच अधिकारी इस दिशा में सक्रिय क्यों नहीं दिखाई दिए? UP News
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का एक और पहलू महत्वपूर्ण है। आरोपियों को नागपुर से गिरफ्तार करके लखनऊ लाने के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की थी। शुरुआती पूछताछ के दौरान श्रद्धा ने खुद को निर्दोष बताते हुए शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या बताया था। इसके बाद जांच के लिए पुलिस कस्टडी में पूछताछ की आवश्यकता को लेकर चर्चा सामने आई थी। लेकिन अब न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ने के बावजूद पुलिस ने PCR की मांग नहीं की। सवाल यह है कि पुलिस ने आरोपियों के बयान और गायब मोबाइल की बरामदगी के लिए रिमांड का रास्ता क्यों नहीं अपनाया ? UP News
शिवा शर्मा मौत मामले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में तरह-तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ लोगों की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या आरोपियों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है? यहां तक कि सिस्टम में बैठे किसी रसूखदार अधिकारी के हस्तक्षेप की आशंका भी चर्चा में है। हालांकि, किसी प्रभावशाली अधिकारी द्वारा दोनों बहनों को बचाने के प्रयास का अभी तक कोई पुष्ट सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में इन चर्चाओं को आरोप और आशंका के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। लेकिन पुलिस की निष्क्रियता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है। UP News
शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में हुई थी। वह इमारत की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। उनकी मां रंजना शर्मा ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के बाद आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हो गए थे। बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की टीम ने नागपुर से श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश को गिरफ्तार किया था। तीनों को 20 अक्टूबर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस गिरफ्तारी के बाद उम्मीद थी कि पुलिस आरोपियों से विस्तार से पूछताछ करके घटना की पूरी कड़ियों को जोड़ेगी। लेकिन अब रिमांड नहीं मांगे जाने और पुराने मोबाइल की बरामदगी नहीं होने से जांच की गति पर सवाल उठने लगे हैं। UP News
इस मामले में पुलिस की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से कुछ सवाल बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलने से ही पुलिस की जांच को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को दूर किया जा सकता है। UP News
इस मामले में पुलिस की ओर से घटना का रिक्रिएशन कराने के लिए अदालत में आवेदन दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। लखनऊ के DCP मध्य अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी नहीं लगाई गई है, जबकि घटना के रिक्रिएशन के लिए अदालत में आवेदन किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस आगे की जांच में कौन से कदम उठाती है। शिवा शर्मा की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना, मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा सभी संबंधित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करना बेहद जरूरी है। UP News
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