मथुरा जनपद के बरसाना में फाल्गुन मास की उमंग चरम पर है। विश्व प्रसिद्ध लड्डू होली के अवसर पर मंगलवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही श्रीजी मंदिर परिसर में रंग और गुलाल के बीच लड्डुओं की वर्षा शुरू हुई, पूरा वातावरण राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठा।

UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के बरसाना में फाल्गुन मास की उमंग चरम पर है। विश्व प्रसिद्ध लड्डू होली के अवसर पर मंगलवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही श्रीजी मंदिर परिसर में रंग और गुलाल के बीच लड्डुओं की वर्षा शुरू हुई, पूरा वातावरण राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठा।
राधारानी की नगरी बरसाना में मनाई जाने वाली लड्डू मार होली ब्रज की सबसे खास परंपराओं में गिनी जाती है। मंदिर के पुजारी और गोस्वामी समाज द्वारा श्रद्धालुओं पर लड्डू बरसाकर उत्सव की शुरुआत की जाती है। भक्त इन लड्डुओं को प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं और स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं।
भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित ढंग से उत्सव का आनंद ले सकें। पूरे बरसाना में रंग, गुलाल और भक्ति संगीत का अद्भुत समागम देखने को मिला। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। राधा-कृष्ण के जयकारों से गलियां और मंदिर परिसर गूंजते रहे।
लड्डू होली की परंपरा को द्वापर युग से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि बरसाना से सखियां होली का निमंत्रण लेकर नंदगांव गई थीं। जब संदेश नंदबाबा तक पहुंचा तो उन्होंने इसे स्वीकार किया। इसके बाद संदेशवाहक के स्वागत में राधारानी के पिता वृषभान ने लड्डू भेंट किए। कहानी के अनुसार, बरसाना की गोपियों ने संदेशवाहक पर गुलाल लगाया। उसके पास रंग न होने के कारण उसने लड्डू ही उछाल दिए। तभी से लड्डू बरसाने की यह परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है। बरसाना की लड्डू होली न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।