लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में वांछित श्रद्धा दुबे की तलाश जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये किए जाने और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के बावजूद 19 अक्टूबर तक गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों मॉडल श्रद्धा दुबे का नाम लगातार चर्चा में है। सोशल मीडिया और कई समाचार माध्यमों में श्रद्धा को ‘विषकन्या’ कहकर प्रचारित किया जा रहा है। लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे मुख्य आरोपी के रूप में वांछित है, लेकिन वह अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। दूसरी तरफ, वह वीडियो और मीडिया के माध्यम से सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोपों को नकार रही है। इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस आरोपी की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगी हैं, जिसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है और जिसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया है, वह आखिर पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे है? UP News :
लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर 2026 को हुई थी। वह अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। उनकी मां रंजना शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। मामले में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश का नाम सामने आया। पुलिस इन तीनों की तलाश कर रही है। शिवा शर्मा की मौत को लेकर परिवार और आरोपियों के पक्ष के दावों में अंतर है। परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है, जबकि श्रद्धा दुबे ने मीडिया के सामने आकर दावा किया है कि शिवा शर्मा ने आत्महत्या की थी। उसने घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए इमारत के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की मांग भी की है।
यह भी पढ़ें: लखनऊ के बाद सहारनपुर में भी श्रद्धा दुबे से जुड़ा मामला चर्चा में, कोर्ट ने जारी किया नोटिस
श्रद्धा दुबे को लेकर ‘विषकन्या’ शब्द का इस्तेमाल कई पत्रकारों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से किया जा रहा है। इस संबोधन के पीछे मामले को लेकर फैली सनसनी और श्रद्धा के फरार रहने के दौरान सामने आ रहे घटनाक्रम हैं। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्रद्धा दुबे लगातार अपनी सफाई दे रही है, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर पा रही है? यदि जांच एजेंसियों को उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों के बारे में सुराग मिल रहे हैं, तो उन सुरागों को गिरफ्तारी तक पहुंचाने में कौन-सी बाधाएं सामने आ रही हैं? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरोपी का मीडिया में सामने आना और पुलिस की पकड़ से बाहर रहना आम लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है।
श्रद्धा दुबे और इस मामले में वांछित अन्य आरोपियों की तलाश में लखनऊ पुलिस ने इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी है। इससे पहले यह राशि 25-25 हजार रुपये बताई गई थी। आरोपियों के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी है। मामले में पुलिस की चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के लिए इनाम बढ़ाने और अलग-अलग स्थानों पर तलाश करने के बावजूद 19 अक्टूबर तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इस मामले में पुलिस विभाग के भीतर भी कार्रवाई हुई है। इस मामले में लखनऊ कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर तरूण गाबा ने हजरतगंज के इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया। इसके बाद डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर पर कार्रवाई करते हुए उनका तबादला किया गया और एसीपी हजरतगंज रजनीश कुमार वर्मा को भी पद से हटाया गया है। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होने के बावजूद मूल सवाल का जवाब अभी सामने आना बाकी है—शिवा शर्मा की मौत के मामले में वांछित आरोपियों तक पुलिस कब पहुंचेगी?
यह भी पढ़ें: नोएडा प्राधिकरण के CEO रहे डॉ. लोकेश एम. ने कर दिया बड़ा कमाल
शिवा शर्मा केस में आरोपी श्रद्धा दुबे की तलाश के दौरान भारत-नेपाल सीमा के निकट बहराइच जिले के रुपईडीहा क्षेत्र में उसकी एसयूवी मिली थी। इसके बाद उसके नेपाल जाने की आशंका जताई गई। लखनऊ क्राइम ब्रांच और एसओजी की टीम ने नेपाल सीमा के आसपास भी तलाश की और कुछ स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। श्रद्धा के नेपाल में होने की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई थीं। अब सवाल यह है कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी? इनाम बढ़ाए जाने और वारंट जारी होने के बाद भी तलाश पूरी क्यों नहीं हुई? वीडियो कहां से जारी हो रहे हैं? श्रद्धा के सार्वजनिक बयानों के स्रोत और उनसे जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कितनी आगे बढ़ी है? नेपाल कनेक्शन की वास्तविकता क्या है? क्या श्रद्धा नेपाल में है, किसी अन्य स्थान पर छिपी है या उसकी लोकेशन के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है? सीसीटीवी और दूसरे साक्ष्यों से क्या सामने आया? घटना के समय की गतिविधियों, संबंधित फुटेज और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच से कौन-से तथ्य पुष्ट हुए हैं? पुलिस की जवाबदेही कैसे तय होगी? अधिकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद जांच और गिरफ्तारी में ठोस प्रगति कब दिखाई देगी? इन सवालों के जवाब मिलने से न केवल मामले की दिशा स्पष्ट होगी, बल्कि शिवा शर्मा के परिवार को भी न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखने में मदद मिलेगी। लखनऊ पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ शिवा शर्मा की मौत के रहस्य को सुलझाना और दूसरी तरफ अपनी जांच की प्रभावशीलता पर उठ रहे सवालों का जवाब देना। इनाम बढ़ाने और अधिकारियों पर कार्रवाई करने से आगे बढ़कर अब ठोस जांच परिणाम सामने आना जरूरी है।
UP News :
विज्ञापन