उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक गूंज रहा है श्रवण कुमार का नाम
UP News
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 01:11 PM
UP News : उत्तर प्रदेश में आधुनिक युग का श्रवण कुमार नजर आया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में नजर आया श्रवण कुमार कई मामलों में खास है। इस आधुनिक श्रवण कुमार की उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक खूब चर्चा हो रही है। समाज के हर नागरिक को इस आधुनिक श्रवण कुमार के विषय में जरूर जानना चाहिए। नए जमाने में जब पारिवारिक मान्यताएं रिश्ते समाप्त हो रहे हैं तब श्रवण कुमार जैसे युवक हमें बहुत बड़ी प्रेरणा देते हैं। आधुनिक श्रवण कुमार का किस्सा उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक खूब वायरल हो रहा है।
अपनी 90 वर्ष की माँ को 100 किलोमीटर तक कंधे पर उठाया
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में एक व्यक्ति एक वृद्ध महिला को कंधे पर बैठाए हुए था। जिज्ञासा के कारण लोगों ने उस व्यक्ति से वृद्धा को कंधे पर उठाने का कारण पूछा तो जवाब सुनकर उत्तर प्रदेश वाले हैरान रह गए। उस व्यक्ति ने बताया कि जिस महिला को वें वृद्धा बता रहे हैं वह महिला उस व्यक्ति की माता जी हैं। वह जीवित अपनी माँ को कंधे पर बैठाकर बिहरा के कैमूर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा स्नान कराने के लिए लाया है।
बिहार के कैमूर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक की 100 किलोमीटर की यात्रा उस व्यक्ति ने अपनी माँ को कंधे पर बैठाकर पैदल पूरी की है। पूरे 100 किलोमीटर की यात्रा पैदल पूरी करने के बाद उस व्यक्ति ने अपनी माँ को गंगा स्नान कराने के बाद ही विश्राम किया। उसकी यह बात सुनकर उत्तर प्रदेश वाले हैरान रह गए। सभी ने कहा कि यह तो इस युग का श्रवण कुमार है।
राणा प्रताप सिंह बना श्रवण कुमार
बिहार से उत्तर प्रदेश तक अपनी माँ को कंधे पर लाने वाले व्यक्ति का नाम राणा प्रताप सिंह है। राणा प्रताप सिंह बिहार के कैमूर का रहने वाला है। उसने बताया कि राणा प्रताप के पिता का 11 अप्रैल 2025 को निधन हो गया था। राणा प्रताप की 90 वर्षीय माँ का नाम पिदंबरा देवी है। वें 90 वर्ष की हैं। राणा प्रताप ने बताया कि उसका माँ की इच्छा थी कि वें उत्तर प्रदेश की पवित्र नगरी वाराणसी में गंगा स्नान करें। माँ की इच्छा पूरी करने के लिए राणा प्रताप अपनी 90 वर्षीय माँ को कंधे पर बैठाकर गंगा स्नान कराने के लिए बिहार से वाराणसी तक लेकर आया। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक राणा प्रताप सिंह प्रसिद्ध हो गया है। राणा प्रताप को आधुनिक श्रवण कुमार कहकर पुकारा जाने लगा है। उसकी माँ के प्रति भक्ति की भावना की चर्चा उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक हो रही है।
माता-पिता की सेवा के आदर्श रहे हैं श्रवण कुमार
श्रवण कुमार का नाम आपने जरूर सुना होगा। श्रवण कुमार माता-पिता की सेवा का आदर्श उदाहरण रहे हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथ रामायण में श्रवण कुमार का उल्लेख है। सबसे खास बात यह है कि ये वही श्रवण कुमार हैं जिनके माता-पिता के श्राप के कारण राजा पुत्र वियोग में राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी। श्रवण अपने माता-पिता से अतुलनीय प्रेम करते थे। इनके माता-पिता नेत्रहीन थे इसलिए वो उनकी अत्यंत श्रद्धापूर्वक सेवा करते थे।
श्रवण की मां ने उन्हें बहुत कष्ट उठाकर पाला था। श्रवण अपने माता-पिता के कामों में बहुत मदद करते थे। घर का सारा काम जैसे नदी से पानी भरकर लाना, जंगल से लकडिय़ां लाना, चूल्हा जलाकर खाना बनाना आदि, श्रवण कुमार ही करते थे। माता-पिता का काम करने में वो जरा भी थकते नहीं थे बल्कि उन्हें आनंद मिलता था। माता-पिता उन्हें हमेशा आशीर्वाद देते रहते। एक बार उनके अंधे माता-पिता ने इच्छा जताई की उनके बेटे ने उनकी सभी इच्छाएं पूरी की है बस एक इच्छा बाकी रह गई है।
उन्होंने तीर्थयात्रा करने की इच्छा जताई। श्रवण कुमार ने माता-पिता की आज्ञा मानते हुए उन्हें प्राण रहते उनकी इच्छा पूरी करने का वचन दे दिया। कंधे पर कांवर लेकर और उसमें दोनों को बैठाकर वह तीर्थयात्रा करने निकल पड़े। श्रवण अपने माता-पिता को कई तीर्थ स्थानों जैसे गया, काशी, प्रयाग आदि लेकर गए और उन्हें तीर्थ के बारे में सारी बातें सुनाते रहे।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था श्रवण कुमार का वध
एक दिन श्रवण माता-पिता के साथ अयोध्या के समीप जंगल में पहुंचे जहां रात्रि के समय वो विश्राम कर रहे थे। उनकी माता को प्यास लगने पर वो पास ही बहती नदी से पानी लेने चले गए। श्रवण कुमार पानी लेने के लिए अपना लोटा लेकर सरयू तट पर गए। उस समय अयोध्या के राजा दशरथ थे। राजा दशरथ को शिकार खेलने का बहुत शौक था। वे रात में भी जंगल में शिकार खेलने चले जाते थे क्यूंकि उन्हें शब्दभेदी बाण चलाने में महारथ हासिल थी। पावस ऋतु में सायंकाल वे धनुष-बाण लेकर सरयू के किनारे गये। उसी समय वह पर श्रवण अपने, माता-पिता के लिए जल भरने आए हुए थे।
राजा रात के समय जल पीने के लिए आए किसी वन्य पशु का शिकार करना चाहते थे। अचानक पानी की कुछ आवाज सुनकर उन्हें लगा कि कोई वन्य पशु पानी पीने आया है जबकि श्रवण ने जल भरने के लिए कमंडल को पानी में डुबोया था। बर्तन में पानी भरने की अवाज सुनकर राजा दशरथ ने जानवर समझकर और सुनकर अचूक निशाना लगा दिया। आवाज के आधार पर उन्होंने तीर मारा जो श्रवण के सीने में जा लगा। श्रवण के मुंह से ‘आह’ निकल गई। राजा तीर चलाने के बाद सरयू तट पर शिकार को लेने गए तो उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। उनसे अनजाने में अपराध हो गया। उन्होंने श्रवण से क्षमा मांगते हुए कहा -'मुझे क्षमा करना भाई। ये अपराध मैंने अनजाने में कर दिया है। बताइए मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?
श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप के कारण तड़तते हुए मरे थे दशरथ
जब राजा दशरथ को ने श्रवण से क्षमा मांगी तो श्रवण ने राजा को दुखी देख कहा- राजन मैं अपनी मृत्यु के लिए दुखी नहीं हूं किंतु अपने माता-पिता के लिए बहुत दुखी हूं। मैं अपने अंधे माता-पिता को तीर्थ यात्रा पूरी नहीं करवा पाऊंगा। आप उन्हें जल पिलाकर उनकी प्यास शांत करके उन्हें मेरी मृत्यु का समाचार सुना दें। जब राजा दशरथ श्रवण के माता- पिता के पास पहुंचे और उन्हें ये दुखद समाचार सुनाया तो वो दोनों विलाप करने लगे।
बूढ़े माता-पिता ने राजा दशरथ को उनसे उनके बेटे को छीनने के अपराध में श्राप दे डाला। उन्होंने शाप दिया कि "जा राजा तू भी हमारी ही तरह पुत्र वियोग में तड़प कर प्राण त्याग करेगा।" इसी कारणवश राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग सहना पड़ा था। रामचंद्र जी के चौदह साल के वनवास के वियोग को वो सह नहीं सकें और उन्होंने पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। UP News