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उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले से धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा एक मामला सामने आया है। यहां एक आश्रम मंदिर के पास इफ्तार के दौरान कथित तौर पर मांसाहारी भोजन तैयार किए जाने और उसके अवशेष पास बह रहे जलस्रोत में फेंके जाने का आरोप लगा है।

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UP News : उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले से धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा एक मामला सामने आया है। यहां एक आश्रम मंदिर के पास इफ्तार के दौरान कथित तौर पर मांसाहारी भोजन तैयार किए जाने और उसके अवशेष पास बह रहे जलस्रोत में फेंके जाने का आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, मामला उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद में थाना सिरसिया क्षेत्र के सोनपथरी आश्रम मंदिर से जुड़ा है। आश्रम की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया कि 17 मार्च की शाम मंदिर के बगल से गुजरने वाले नाले के पास कुछ लोग रोजा इफ्तार के लिए एकत्र हुए थे। आरोप है कि इस दौरान वहां मांसाहारी भोजन बनाया गया और उसके अवशेष उसी जलधारा में डाल दिए गए, जिसका उपयोग आश्रम में भोजन बनाने, पीने और मूर्तियों की सफाई के लिए किया जाता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के क्षेत्राधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि सोनपथरी सिरसिया आश्रम के हरी शरणानंद महाराज की ओर से लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इफ्तार पार्टी के दौरान जलस्रोत को दूषित किया गया। इतना ही नहीं, जब आश्रम से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्हें कथित तौर पर धमकाया भी गया। शिकायत मिलने के बाद थाना सिरसिया में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(2) के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को चार आरोपियों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के हरदत्तनगर गिरंट थाना क्षेत्र के महरू मुर्तिहा गांव निवासी जमाल अहमद, इरफान अहमद, इमरान अहमद और जहीर खान के रूप में हुई है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक जलस्रोत के किनारे खाना बनाते और इफ्तार करते दिखाई दे रहे हैं। इसी वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले की जांच को तेज किया और आरोपियों तक पहुंच बनाई। उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े जलस्रोतों की संवेदनशीलता को देखते हुए इस घटना ने स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा कर दी है। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस पानी का इस्तेमाल रोजमर्रा की धार्मिक और घरेलू जरूरतों में होता है, उसी में अवशेष फेंके जाने से उनकी आस्था आहत हुई है।
उत्तर प्रदेश में इससे पहले वाराणसी से भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है। वहां कुछ युवकों पर गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने और खाने के अवशेष पानी में फेंकने का आरोप लगा था। वह वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। UP News
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