मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट से भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा सोमवार को नामांकन करेंगे। चेतना मंच की रिपोर्टों में उनकी शैक्षणिक योग्यता और ‘साहित्य रत्न’ उपाधि पर उठे सवालों के बीच भाजपा की जांच प्रक्रिया पर सवाल।

पूरे देश के पाठकों के प्यार के बलबूते पर संचालित होने वाले उत्तर प्रदेश के प्रमुख न्यूज पोर्टल www.chetnamanch.com बीजेपी से 7वीं बार यह सवाल पूछ रहा है। सवाल यह है कि भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी BJP ने उत्तर प्रदेश में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी तय करते समय फर्जी डिग्री के आधार पर अध्यापक बनें फिर उसी फर्जी डिग्री के आधार पर MLC बनें पंडित श्रीचंद शर्मा की पूरी योग्यता को चेक किए बिना शिक्षक जैसी महत्वपूर्ण सीट पर दूसरी बार MLC का टिकट कैसे दे दिया???????
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपने वर्तमान विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को श्रीचंद शर्मा BJP की तरफ से नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है और उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन शिक्षक एवं स्नातक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। श्रीचंद शर्मा के नामांकन से ठीक पहले एक सवाल फिर बेहद महत्वपूर्ण हो गया है—जब चेतना मंच पिछले कई दिनों से उनकी शैक्षणिक योग्यता और चुनावी शपथपत्र में दर्ज डिग्री को लेकर सवाल उठा रहा है, तो भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट देने से पहले उनके शैक्षिक दस्तावेजों की विस्तृत जांच क्यों नहीं कराई? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला किसी सामान्य पद के उम्मीदवार का नहीं, बल्कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी का है।
चेतना मंच ने अपने पूर्व प्रकाशित समाचारों में श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 के चुनावी शपथपत्र में उनकी शैक्षणिक योग्यता में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से वर्ष 1987 की ‘साहित्य रत्न’ उपाधि का उल्लेख किया गया था। चेतना मंच ने इस आधार पर यह सवाल उठाया कि इस उपाधि की उस समय की वैधानिक एवं शैक्षणिक स्थिति क्या थी और क्या इसे सामान्य स्नातक डिग्री के समकक्ष माना जा सकता है।
इस पूरे विवाद में शिक्षक नेता एवं शिक्षाविद् डॉ. कुलदीप मलिक द्वारा श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि से संबंधित दस्तावेजों पर सवाल उठाए जाने की बात भी चेतना मंच ने प्रकाशित की है। चेतना मंच के अनुसार डॉ. मलिक ने मामले की जांच की मांग की है। इसलिए अब सवाल केवल सोशल मीडिया की चर्चा का नहीं रह जाता। सवाल यह है कि क्या श्रीचंद शर्मा स्वयं अपने मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र सार्वजनिक करके सभी सवालों का समाधान करेंगे?
श्रीचंद शर्मा को भाजपा ने पहले 2020 के चुनाव में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था और अब 2026 के चुनाव में उन्हें फिर प्रत्याशी बनाया गया है। इस बार भाजपा ने पांच मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को दोबारा मैदान में उतारा है, जिनमें श्रीचंद शर्मा का नाम भी शामिल हैं।
श्रीचंद शर्मा की अपनी वेबसाइट उन्हें मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद सदस्य और शिक्षक हितों से जुड़े प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करती है। ऐसे में सोमवार का नामांकन केवल एक चुनावी औपचारिकता नहीं रहेगा। नामांकन के साथ प्रस्तुत होने वाले दस्तावेजों के आधार पर उनकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े सवालों को भी सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनने की संभावना है। यदि सभी प्रमाणपत्र वैध और निर्विवाद हैं तो उनके मूल दस्तावेज सामने रखकर सवालों का अंत किया जा सकता है। और यदि किसी दस्तावेज को लेकर कोई कानूनी या तकनीकी स्थिति है तो उसका अधिकृत स्पष्टीकरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
चेतना मंच ने इस मामले में लगातार यह सवाल उठाया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता, चुनावी शपथपत्र और पात्रता के संबंध में मतदाताओं को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि फैसला आरोपों से नहीं, दस्तावेजों से होना चाहिए। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। ऐसे में BJP के प्रत्याशी की योग्यता को लेकर उठे सवालों का जवाब केवल श्रीचंद शर्मा से ही नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया से भी मांगा जाना स्वाभाविक है जिसके तहत पार्टी किसी व्यक्ति को चुनाव का टिकट देती है।
सोमवार के नामांकन के साथ अब तीन दस्तावेज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे—
शैक्षिक प्रमाणपत्र, चुनावी शपथपत्र और उनकी वैधानिक पात्रता से संबंधित अधिकृत रिकॉर्ड।
चेतना मंच इन दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब के आधार पर इस मामले की अगली कड़ी भी सामने रखेगा।
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