सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सिंगल सीटर हॉस्टल कमरों में दो इंटर्न्स के आवंटन के विरोध में डॉक्टर धरने पर बैठ गए। छात्रों ने पर्याप्त रहने की व्यवस्था और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

UP News: उत्तर प्रदेश के जिला सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar ) स्थित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल की व्यवस्था और कमरों के आवंटन को लेकर इंटर्न्स का विरोध तेज हो गया है। कॉलेज प्रशासन की ओर से सिंगल सीटर कमरों में दो छात्रों को रखने के फैसले के विरोध में इंटर्न्स धरने पर बैठ गए हैं। छात्रों का आरोप है कि छोटे कमरों में जबरन अतिरिक्त बेड डाले जा रहे हैं और विरोध करने पर हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी दी जा रही है।
इंटर्न्स का कहना है कि उन्हें कॉलेज कैंपस में जिस हॉस्टल और कमरे में रहने की व्यवस्था मिली हुई है, उसे अचानक बदलने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रों के मुताबिक, सिंगल सीटर कमरे इतने छोटे हैं कि उनमें दो बेड रखना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कमरों में अतिरिक्त बेड डालकर दो छात्रों को रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि जब वे ड्यूटी पर थे, उस दौरान उनकी अनुपस्थिति में भी कमरों में बेड रखने की कोशिश की गई। इंटर्न्स का कहना है कि वे अस्पताल में 24 घंटे की कठिन ड्यूटी और नाइट शिफ्ट करते हैं। ऐसे में आराम और नींद के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है।UP News:
धरने पर बैठे इंटर्न्स का कहना है कि डॉक्टरों के लिए पर्याप्त आराम की व्यवस्था बेहद जरूरी है। उनका सवाल है कि अगर उन्हें सोने और आराम करने के लिए उचित जगह ही नहीं मिलेगी, तो वे मरीजों का इलाज और अपनी ड्यूटी पूरी क्षमता के साथ कैसे कर पाएंगे। इंटर्न्स ने यह भी सवाल उठाया कि कॉलेज के अन्य लोगों के लिए अलग व्यवस्थाएं और फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज के पहले बैच के इंटर्न्स को हॉस्टल में जगह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया से बातचीत में इंटर्न डॉ. रागिनी साहू ने कहा कि उन्हें कॉलेज कैंपस के अंदर उसी जगह रहने दिया जाए, जहां वे पहले से रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे-छोटे सिंगल सीटर कमरों में दो छात्रों को रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि वहां दो बेड रखना भी मुश्किल है। डॉ. रागिनी साहू के मुताबिक, जब छात्र ड्यूटी पर थे, उस समय उनकी अनुपस्थिति में कमरों में जबरन बेड रखने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि 24 घंटे की ड्यूटी के बाद ऐसे माहौल में रहना उनके लिए बेहद मुश्किल है। इंटर्न्स की मांग है कि फिलहाल जो व्यवस्था चल रही है, उसे यथावत रखा जाए।UP News:
इंटर्न डॉ. तुषी सिंह ने कहा कि वे इस कॉलेज के पहले बैच के छात्र हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों से हॉस्टल में कमरों की लगातार कमी बनी हुई है, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए नए कमरे या पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पहले छात्रों को डबल, फिर ट्रिपल रहने की व्यवस्था में रखा गया और अब इंटर्न्स के सिंगल सीटर कमरों में भी जबरन दो छात्रों को रखने की कोशिश की जा रही है। UP News:
इंटर्न्स ने कहा कि अस्पताल में 24 घंटे की कठिन ड्यूटी, नाइट शिफ्ट और आगामी पीजी परीक्षा की तैयारी के बीच हॉस्टल में रहने की समस्या उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर रही है। डॉ. तुषी सिंह के मुताबिक, जब तक उनकी मांगों पर उचित समाधान नहीं होता और रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेंगे। इंटर्न्स का कहना है कि प्रशासन को उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।
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