सीतापुर के परशुराम ने बुजुर्ग माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई। चहलारी घाट से जल लेकर पत्थर शिवाला मंदिर में जलाभिषेक किया।

सीतापुर। कलयुग के दौर में माता-पिता की सेवा और उनके प्रति समर्पण की मिसाल पेश करने वाली एक तस्वीर सीतापुर के बिसवां क्षेत्र के पुरैनी गांव से सामने आई है। यहां परशुराम ने अपने अतिवृद्ध माता-पिता दुलारी देवी और विश्राम लाल की तीर्थ यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें कांवड़ में बंधे खटोले पर बैठाकर यात्रा शुरू की। नंगे पांव माता-पिता को कंधों पर लेकर निकले परशुराम की श्रद्धा देखकर रास्ते में मौजूद लोग भावुक हो उठे।
परशुराम ने माता-पिता को कांवड़ में बंधे खटोले में ससम्मान बैठाया और तीर्थ यात्रा के लिए निकल पड़े। रास्ते में उन्हें कई शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन माता-पिता की इच्छा पूरी करने का संकल्प उनके कदमों को आगे बढ़ाता रहा।
यात्रा के दौरान परशुराम चहलारी घाट पहुंचे और वहां से पवित्र जल भरा। इसके बाद वे बिसवां स्थित ऐतिहासिक पत्थर शिवाला मंदिर पहुंचे। मंदिर में उन्होंने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और अपने माता-पिता के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
इस सेवा और धार्मिक संकल्प में परशुराम की पत्नी ने भी उनका पूरा साथ दिया। वह पूरे रास्ते पति का हौसला बढ़ाती रहीं और यात्रा में सहभागी बनी रहीं। पति-पत्नी की श्रद्धा देखकर रास्ते में मिलने वाले लोगों ने भी उनकी सराहना की।
परशुराम का कहना है कि उनके माता-पिता ने जीवनभर उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया है। ऐसे में उनकी सेवा करना उनका सबसे बड़ा धर्म है। जब माता-पिता ने तीर्थ यात्रा की इच्छा जताई तो उन्होंने किसी परेशानी की परवाह किए बिना उनकी इच्छा पूरी करने का संकल्प लिया।
परशुराम के इस कार्य की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीण और स्थानीय लोग उन्हें आधुनिक युग का श्रवण कुमार बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि माता-पिता की सेवा करना और उनकी इच्छाओं का सम्मान करना भारतीय संस्कारों की महत्वपूर्ण पहचान है। पुरैनी गांव से शुरू हुई परशुराम की यह यात्रा अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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