होर्मुज संकट का बड़ा असर : भारत में अब 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में मिलेगा 10 किलो गैस

पश्चिराम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज पर हालात बिगड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ईन और अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

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एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar23 Mar 2026 02:02 PM
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LPG Gas Crisis : पश्चिराम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज पर हालात बिगड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ईन और अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने एलपीजी वितरण और उपयोग से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव किया है।

कमर्शियल एलपीजी का कोटा बढ़ाकर 50%

गैस संकट के बीच सरकार ने 23 मार्च से कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले जहां राज्यों को लगभग 30% आपूर्ति मिल रही थी, अब इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, औद्योगिक इकाइयों और सामुदायिक किचन को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हाल के दिनों में गैस की कमी से प्रभावित हो रहे थे। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रिफिलिंग सुविधा शुरू की गई है, जिससे सीमित संसाधनों के बीच ज्यादा लोगों तक गैस पहुंचाई जा सके।

घरेलू सिलेंडर में गैस मात्रा घटाने की योजना

संकट से निपटने के लिए तेल कंपनियां एक और बड़े बदलाव पर विचार कर रही हैं। योजना के तहत 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में केवल 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि उपलब्ध सीमित स्टॉक को ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके। अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी हिसाब से कम की जाएगी और प्रति किलो के आधार पर नए रेट तय होंगे। सिलेंडर पर विशेष स्टिकर लगाकर गैस की वास्तविक मात्रा की जानकारी दी जाएगी।

नियमों में सख्ती, डिलीवरी सिस्टम में बदलाव

एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ सख्त कदम भी उठाए हैं। एसेंसियल कमोडिटीज एक्ट के तहत नियंत्रण बढ़ा दिया गया है, जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। अब सिलेंडर की डिलीवरी बिना ओटीपी के नहीं होगी, ताकि फर्जी बुकिंग और गलत वितरण को रोका जा सके। वहीं रिफिलिंग की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतराल तय किया गया है।

आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। कुल खपत का लगभग 60% विदेशों से आता है, जिसमें से ज्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों पर निर्भर रहती है। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। हालांकि, हाल के दिनों में कुछ जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंचे हैं और वैकल्पिक सप्लाई लाइन पर काम किया जा रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो गैस संकट लंबा खिंच सकता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यही है कि घरेलू किचन तक गैस की सप्लाई बनी रहे और जरूरी सेक्टर को न्यूनतम स्तर पर संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन मिलता रहे। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में एलपीजी को लेकर किए गए ये बदलाव अस्थायी राहत देने के साथ-साथ लंबी रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं।


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उत्तर प्रदेश में बनेगा पहला AI विश्वविद्यालय, 25 हजार करोड़ का होगा निवेश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 01:04 PM
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उत्तर प्रदेश में बनेंगे आधुनिक AI पार्क

इस करार के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे AI पार्क स्थापित करने की योजना है, जो आधुनिक डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होंगे। इन पार्कों के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सेवाओं, रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को मजबूत आधार मिलेगा। इससे उत्तर प्रदेश में डिजिटल निवेश का माहौल और बेहतर होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश सरकार इस पहल को केवल निवेश परियोजना तक सीमित नहीं रखना चाहती। योजना के अनुसार, प्रदेश में AI कॉमन्स की भी स्थापना की जाएगी। इसका मकसद सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है। नागरिक सेवाओं में AI के इस्तेमाल से उत्तर प्रदेश के लोगों को बेहतर और स्मार्ट सुविधाएं मिल सकेंगी।

युवाओं के लिए खुलेगा नया रास्ता

उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए AI विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी तैयारी है। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से छात्रों और युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और नई डिजिटल तकनीकों की पढ़ाई तथा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्टार्टअप के नए अवसर मिल सकते हैं। UP News

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आईएएस का झांसा देकर 26वीं शादी करने वाले जालसाज प्रीतम निषाद का खुला राज

गोरखपुर और इटावा से जुड़ा एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाला एक युवक 25 शादियां कर चुका था और 26वीं शादी के बाद उसकी पोल खुल गई। आरोपी की पहचान प्रीतम निषाद के रूप में हुई है।

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प्रीतम निषाद 26वीं शादी के बाद पोल खुल गई
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar23 Mar 2026 01:17 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और इटावा से जुड़ा एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाला एक युवक 25 शादियां कर चुका था और 26वीं शादी के बाद उसकी पोल खुल गई। आरोपी की पहचान प्रीतम निषाद के रूप में हुई है।

फर्जी आईएएस बनकर रचा शादी का जाल

प्रीतम निषाद ने खुद को मानिकपुर का एसडीएम बताकर गोरखपुर के कैंट इलाके की एक युवती से शादी की। उसने अपने रसूख का दिखावा करने के लिए नीली बत्ती लगी कार, फर्जी असिस्टेंट और सरकारी ठाठ-बाट का इस्तेमाल किया। परिवार को भरोसा दिलाने के लिए उसने पुराने इंटरव्यू वीडियो और नेताओं के साथ तस्वीरें भी भेजीं।

25 शादियां, लाखों की ठगी

जांच में सामने आया कि आरोपी अब तक 25 लड़कियों से शादी कर चुका है और हर बार शादी के नाम पर मोटी रकम ऐंठता था। गोरखपुर के इस ताजा मामले में पीड़ित परिवार से करीब 30 लाख रुपये खर्च करवा दिए गए, जिसमें से 15 लाख रुपये सीधे आरोपी ने लिएऐसे खुली सच्चाई

शादी के बाद जब लड़की के परिवार को शक हुआ तो वे इटावा के उसके बताए पते पर पहुंचे। वहां जाकर पता चला कि आरोपी न तो आईएएस है और न ही उसका कोई सरकारी पद है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह पहले भी कई लड़कियों को इसी तरह ठग चुका है।

इस मामले में आरोपी की बहन, जीजा और परिवार के अन्य सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम गोरखपुर से इटावा रवाना हो चुकी है और आरोपी की तलाश में दबिश दे रही हैपीड़ित परिवार सदमे मेंपीड़ित लड़की के पिता, जो पैरालाइज्ड हैं, ने बताया कि आरोपी शादी से पहले सरकारी अधिकारी जैसा पूरा माहौल बनाकर आया था। बारात में भी सीमित लोग थे, लेकिन सभी ने मिलकर विश्वास जीतने की कोशिश की। यह मामला न सिर्फ एक बड़े मैरिज फ्रॉड का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।


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