होर्मुज संकट का बड़ा असर : भारत में अब 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में मिलेगा 10 किलो गैस
पश्चिराम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज पर हालात बिगड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ईन और अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

LPG Gas Crisis : पश्चिराम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज पर हालात बिगड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ईन और अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने एलपीजी वितरण और उपयोग से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव किया है।
कमर्शियल एलपीजी का कोटा बढ़ाकर 50%
गैस संकट के बीच सरकार ने 23 मार्च से कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले जहां राज्यों को लगभग 30% आपूर्ति मिल रही थी, अब इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, औद्योगिक इकाइयों और सामुदायिक किचन को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हाल के दिनों में गैस की कमी से प्रभावित हो रहे थे। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रिफिलिंग सुविधा शुरू की गई है, जिससे सीमित संसाधनों के बीच ज्यादा लोगों तक गैस पहुंचाई जा सके।
घरेलू सिलेंडर में गैस मात्रा घटाने की योजना
संकट से निपटने के लिए तेल कंपनियां एक और बड़े बदलाव पर विचार कर रही हैं। योजना के तहत 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में केवल 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि उपलब्ध सीमित स्टॉक को ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके। अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी हिसाब से कम की जाएगी और प्रति किलो के आधार पर नए रेट तय होंगे। सिलेंडर पर विशेष स्टिकर लगाकर गैस की वास्तविक मात्रा की जानकारी दी जाएगी।
नियमों में सख्ती, डिलीवरी सिस्टम में बदलाव
एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ सख्त कदम भी उठाए हैं। एसेंसियल कमोडिटीज एक्ट के तहत नियंत्रण बढ़ा दिया गया है, जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। अब सिलेंडर की डिलीवरी बिना ओटीपी के नहीं होगी, ताकि फर्जी बुकिंग और गलत वितरण को रोका जा सके। वहीं रिफिलिंग की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतराल तय किया गया है।
आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। कुल खपत का लगभग 60% विदेशों से आता है, जिसमें से ज्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों पर निर्भर रहती है। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। हालांकि, हाल के दिनों में कुछ जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंचे हैं और वैकल्पिक सप्लाई लाइन पर काम किया जा रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो गैस संकट लंबा खिंच सकता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यही है कि घरेलू किचन तक गैस की सप्लाई बनी रहे और जरूरी सेक्टर को न्यूनतम स्तर पर संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन मिलता रहे। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में एलपीजी को लेकर किए गए ये बदलाव अस्थायी राहत देने के साथ-साथ लंबी रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं।
LPG Gas Crisis : पश्चिराम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज पर हालात बिगड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ईन और अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने एलपीजी वितरण और उपयोग से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव किया है।
कमर्शियल एलपीजी का कोटा बढ़ाकर 50%
गैस संकट के बीच सरकार ने 23 मार्च से कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले जहां राज्यों को लगभग 30% आपूर्ति मिल रही थी, अब इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, औद्योगिक इकाइयों और सामुदायिक किचन को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हाल के दिनों में गैस की कमी से प्रभावित हो रहे थे। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रिफिलिंग सुविधा शुरू की गई है, जिससे सीमित संसाधनों के बीच ज्यादा लोगों तक गैस पहुंचाई जा सके।
घरेलू सिलेंडर में गैस मात्रा घटाने की योजना
संकट से निपटने के लिए तेल कंपनियां एक और बड़े बदलाव पर विचार कर रही हैं। योजना के तहत 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में केवल 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि उपलब्ध सीमित स्टॉक को ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके। अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी हिसाब से कम की जाएगी और प्रति किलो के आधार पर नए रेट तय होंगे। सिलेंडर पर विशेष स्टिकर लगाकर गैस की वास्तविक मात्रा की जानकारी दी जाएगी।
नियमों में सख्ती, डिलीवरी सिस्टम में बदलाव
एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ सख्त कदम भी उठाए हैं। एसेंसियल कमोडिटीज एक्ट के तहत नियंत्रण बढ़ा दिया गया है, जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। अब सिलेंडर की डिलीवरी बिना ओटीपी के नहीं होगी, ताकि फर्जी बुकिंग और गलत वितरण को रोका जा सके। वहीं रिफिलिंग की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतराल तय किया गया है।
आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। कुल खपत का लगभग 60% विदेशों से आता है, जिसमें से ज्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों पर निर्भर रहती है। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। हालांकि, हाल के दिनों में कुछ जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंचे हैं और वैकल्पिक सप्लाई लाइन पर काम किया जा रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो गैस संकट लंबा खिंच सकता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यही है कि घरेलू किचन तक गैस की सप्लाई बनी रहे और जरूरी सेक्टर को न्यूनतम स्तर पर संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन मिलता रहे। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में एलपीजी को लेकर किए गए ये बदलाव अस्थायी राहत देने के साथ-साथ लंबी रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं।












