UP बीजेपी अध्यक्ष की दौड़ में छह चेहरे, कौन संभालेगा बागडोर?
Uttar pradesh Samachar
उत्तर प्रदेश
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:31 AM
Uttar pradesh Samachar: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी की राज्य इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व के पास छह नामों की सूची भेजी है जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की पूरी कोशिश की गई है। इन नामों में दो ब्राह्मण, दो ओबीसी और दो दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नेता शामिल हैं।
कौन-कौन हैं रेस में?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्राह्मण चेहरों के रूप में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का नाम सूची में शामिल है। वहीं ओबीसी वर्ग से केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और राज्य सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह को जगह दी गई है। दलित समुदाय से वर्तमान एमएलसी विद्यासागर सोनकर और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया का नाम भी संभावितों में है।
भूपेंद्र चौधरी के बाद कौन?
गौरतलब है कि फिलहाल प्रदेश भाजपा की कमान पश्चिमी यूपी से आने वाले जाट नेता भूपेंद्र चौधरी के पास है। पार्टी ने देशभर में 37 में से 25 से अधिक राज्य इकाइयों में अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। ऐसे में अब सबकी निगाहें यूपी और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के नाम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को उनकी शालीन छवि और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण पार्टी और संघ नेतृत्व का विशेष भरोसा प्राप्त है। वहीं हरीश द्विवेदी भी पार्टी के पुराने और कार्यसमर्पित नेताओं में गिने जाते हैं। वह बस्ती से सांसद रह चुके हैं और राष्ट्रीय सचिव जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं।
लोधी जाति से आने वाले बीएल वर्मा और धर्मपाल सिंह का पार्टी संगठन में विशेष प्रभाव है। बीएल वर्मा को संघ के करीबी और सादा जीवन जीने वाले अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। वहीं धर्मपाल सिंह का लंबा प्रशासनिक और विधायी अनुभव उन्हें एक सशक्त दावेदार बनाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया को उनके स्पष्ट हिंदुत्ववादी रुख और दलित समाज में प्रभाव के लिए जाना जाता है। वह अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन भी रह चुके हैं। दूसरी ओर, एमएलसी विद्यासागर सोनकर एक जमीनी नेता हैं, जिनकी पकड़ पूर्वांचल के दलित बहुल क्षेत्रों में मानी जाती है।
क्या संकेत देती है सूची?
सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व इस बार अध्यक्ष पद के लिए सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रभाव और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहता है। यही वजह है कि सूची में हर सामाजिक वर्ग से एक से अधिक प्रतिनिधियों को जगह दी गई है। अब देखना होगा कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व इनमें से किस चेहरे पर विश्वास जताता है और क्या अगला प्रदेश अध्यक्ष 2027 के महासंग्राम में भाजपा को नई ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम होगा।