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प्रदेश में रूफटॉप सोलर को लेकर बड़ी तेजी देखी जा रही है। सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राज्य की ऊर्जा नीति के चलते लोग अब पारंपरिक बिजली की जगह अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को लेकर बड़ी तेजी देखी जा रही है। सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राज्य की ऊर्जा नीति के चलते लोग अब पारंपरिक बिजली की जगह अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जून 2026 में राज्य ने इस दिशा में एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में उत्तर प्रदेश में 71,888 घरेलू रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जो देश में किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है। इस योजना के तहत राज्य अब तक तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में टॉप पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक करीब 10.89 लाख आवेदन मिल चुके हैं, इनमें से 6.36 लाख घरों में सोलर सिस्टम लग चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि यूपी में सोलर अपनाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। रूफटॉप सोलर सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है नेट मीटरिंग सिस्टम, जिसमें दिन में बनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाती है। रात या जरूरत पर वही बिजली वापस मिलती है। महीने के अंत में बैलेंस बनता है, अगर उत्पादन और खपत बराबर हो जाए, तो बिजली बिल लगभग शून्य हो सकता है।
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सरकार की तरफ से केंद्र और राज्य दोनों मिलकर सब्सिडी दे रहे हैं। पहले सिस्टम पर करीब 45,000 तक सहायता दी जा रही है। दूसरे पर लगभग 90,000 और तीसरे पर 1 लाख से अधिक तक लाभ मिलता है। इसी वजह से आम परिवारों के लिए सोलर सिस्टम लगाना अब पहले से काफी सस्ता हो गया है। लोगों के बीच रूफटॉप सोलर की लोकप्रियता बढ़ने के प्रमुख कारण हैं, लगातार बढ़ते बिजली बिल, सरकार की भारी सब्सिडी, 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ और लंबे समय तक बचत (10-25 साल तक) और सबसे बड़ी बात पर्यावरण के प्रति जागरूकता
जो सबसे जरूरी है।
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राज्य में:
* 2,148 से ज्यादा रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित
* 7,000 से ज्यादा कंपनियां/वेंडर सक्रिय
* 80,000 से अधिक रोजगार के अवसर बने
* रोजाना लगभग 96 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन
* हजारों करोड़ का ऊर्जा कारोबार
* स्थानीय स्तर पर रोजगार में वृद्धि।
उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर सिर्फ एक ऊर्जा विकल्प नहीं, बल्कि बिजली बिल से राहत और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था का नया मॉडल बनता जा रहा है। सरकारी सब्सिडी, आसान प्रक्रिया और नेट मीटरिंग ने इसे आम लोगों के लिए बेहद आकर्षक बना दिया है।
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