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UP News : I-PAC पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी रणनीतियों से जुड़ी थी, लेकिन वहां चुनावी नतीजे उन पार्टियों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे, जिन्हें यह सलाह दे रही थी।

UP News : चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 5 मई को घोषित चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। पहला नजरा उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (SP) का 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के साथ प्रस्तावित गठबंधन टूट गया है। यह फैसला कानूनी परेशानियों, हालिया चुनावी नतीजों और पार्टी के अंदरूनी चर्चाओं चलते लिया गया है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक I-PAC के सूत्रों ने बताया कि इस साल की शुरुआत में जो समझौता पक्का हुआ था, वह अब 'खत्म' हो चुका है।
पहले से ही विवादों में थी I-PAC
I-PAC पहले से ही विवादों में ईडील ने पिछले महीने I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल को बंगाल में कथित कोयला तस्करी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था; इस गिरफ्तारी से कंपनी के कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। UP News
एक सूत्र ने कहा, "हमारे दफ्तरों पर ED की छापेमारी और हमारे डायरेक्टर (विनेश चंदेल) की गिरफ्तारी से यह डील खटाई में पड़ गई थी।"
इसकी वजह से राजनीतिक क्लाइंट्स के बीच अनिश्चितता पैदा हो गई और फर्म की बड़े पैमाने पर चुनावी कैंपेन चलाने की क्षमता पर सवाल उठने लगे।
हाल के चुनाव नतीजों का असर
हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भी एसपी के को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर किया।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि टीएमसी और डीएमके की हार से एसपी घबराई हुई लग रही थी। फर्म की साख खत्म हो गई थी, खासकर तब जब (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री) ममता बनर्जी अपनी ही सीट से भारी अंतर से हार गईं।
यह कंसल्टेंसी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी रणनीतियों से जुड़ी थी, लेकिन वहां चुनावी नतीजे उन पार्टियों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे, जिन्हें यह सलाह दे रही थी। UP News
I-PAC में बंगाल-यूपी में बंद किया काम
छापों के बाद के हफ़्तों में और चुनावों से कुछ हफ़्ते पहले ही, I-PAC ने बंगाल में अपने कामकाज को काफ़ी हद तक कम कर दिया है। राज्य में कई दफ़्तरों को या तो कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है या फिर वहां स्टाफ़ की संख्या बहुत कम कर दी गई है, जो चुनावी काम बहुत ज़रूरी नहीं थे, उन्हें रोक दिया गया है। इससे टीएमसी और I-PAC के रिश्ते बेहद खराब हो गए।
I-PAC ने यूपी में अपना ऑफिस बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि करीब 30-40 लोग इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, उन्हें भी रोक दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक I-PAC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी ने ही एसपी के साथ यह डील कराने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन चंदेल की गिरफ्तारी ने पूरे प्लान को जोखिम में डाल दिया। साथ ही बीजेपी की ओर से भी दबाव था कि एसपी इस डील से पीछे हटे।
एसपी अब किस रणनीति पर चलेगी?
एसपी पूरी तरह से प्रोफेशनल कैंपेन सपोर्ट छोड़ने वाली नहीं है। सूत्रों ने बताया कि I-PAC के पूर्व कर्मचारियों द्वारा चलाई जा रही एक अन्य फर्म 2027 के चुनाव में पार्टी की मदद करेगी।
एसपी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव अपनी पार्टी के बूथ वर्कर्स और ग्राउंड फीडबैक पर ज्यादा भरोसा करते हैं। बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता के बजाय कैडर-आधारित राजनीतिक खुफिया जानकारी को प्राथमिकता दी जाती है।UP News
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