पीलीभीत में सपा ने धर्मेश गंगवार को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। कुर्मी समाज से आने वाले नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद जिले के सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा तेज है।

UP News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में समाजवादी पार्टी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए धर्मेश गंगवार को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। कुर्मी समाज से आने वाले धर्मेश गंगवार की नियुक्ति के बाद जिले की सियासत में संगठन और सामाजिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। नए जिलाध्यक्ष के बैनर-पोस्टरों में अलग-अलग सामाजिक समूहों की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है। धर्मेश गंगवार की ताजपोशी को जहां सपा के संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे जिले के अलग-अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बढ़ाने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इसका असर पार्टी के संगठन और जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।
पीलीभीत जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं और प्रत्येक क्षेत्र का सामाजिक चरित्र अलग-अलग बताया जाता रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रकाशित विभिन्न चुनावी आकलनों में अलग-अलग क्षेत्रों में कई सामाजिक समूहों की उल्लेखनीय मौजूदगी का उल्लेख किया गया था। इन आकलनों के मुताबिक, पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं की महत्वपूर्ण मौजूदगी बताई गई थी। वहीं बीसलपुर में मुस्लिम, कुर्मी, कश्यप, लोध, ब्राह्मण और ठाकुर समुदायों का उल्लेख चुनावी आकलनों में किया गया था। बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के संबंध में प्रकाशित आकलनों में लोधी, दलित, मुस्लिम, बंगाली और कुर्मी मतदाताओं की मौजूदगी बताई गई थी। जबकि पूरनपुर में मुस्लिम, लोध, पासी, जाटव, ब्राह्मण, बंगाली और सिख मतदाताओं का उल्लेख मिलता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आंकड़े आधिकारिक जातिवार मतदाता आंकड़े नहीं हैं, बल्कि 2022 के चुनाव के दौरान प्रकाशित चुनावी आकलनों पर आधारित हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष जग्गा के लंबे कार्यकाल के दौरान संगठन को लेकर गुटबाजी और अंदरूनी असंतोष की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही थीं। इसके बावजूद उनका कार्यकाल लंबा रहा। अब पार्टी ने धर्मेश गंगवार को जिले की कमान सौंपी है। ऐसे में नए जिलाध्यक्ष के सामने संगठन में समन्वय बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी की जमीनी संरचना को मजबूत करने की चुनौती होगी। सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि नई टीम का सामाजिक विस्तार केवल बैनर और पोस्टरों तक सीमित रहता है या इसका असर पार्टी के बूथ, गांव और विधानसभा स्तर के संगठन पर भी दिखाई देता है।UP News:
पीलीभीत सदर, बीसलपुर, बरखेड़ा और पूरनपुर—चारों विधानसभा क्षेत्रों की स्थानीय सामाजिक संरचना अलग-अलग है। ऐसे में नए जिलाध्यक्ष की संगठनात्मक रणनीति भी क्षेत्रवार अलग रूप ले सकती है। धर्मेश गंगवार की नियुक्ति के बाद पार्टी किन सामाजिक समूहों और स्थानीय नेताओं के साथ किस तरह समन्वय बनाती है, यह जिले की आगामी राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। चौराहों पर नए पोस्टर जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा संगठन की जमीनी सक्रियता की होगी। अब देखना यह है कि नेतृत्व में बदलाव से सपा के संगठन को पीलीभीत के गांवों और बूथों तक कितना नया आधार मिलता है। UP News:
विज्ञापन