आगरा में सस्ता घर खरीदने का बड़ा मौका, ई-नीलामी का ऐलान

आगरा में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और यूपी आवास विकास परिषद (यूपीएवीपी) ने शहर के प्रमुख इलाकों में बने फ्लैट्स की ई-नीलामी का ऐलान किया है।

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आगरा में घर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Mar 2026 02:37 PM
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UP News : चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर आगरा में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और यूपी आवास विकास परिषद (यूपीएवीपी) ने शहर के प्रमुख इलाकों में बने फ्लैट्स की ई-नीलामी का ऐलान किया है। पहले भी इन फ्लैट्स को नीलामी में शामिल किया गया था, लेकिन अब दोबारा बोली का मौका देते हुए कीमत और टोकन अमाउंट में आंशिक कटौती की गई है, जिससे खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है।

कब होगी ई-नीलामी और कैसे करें आवेदन?

इन फ्लैट्स की ई-नीलामी 25 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी। इच्छुक खरीदार 24 मार्च तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी प्रॉपर्टी पर केवल एक ही बोली आती है, तो उसे दोबारा नीलामी में डाला जाएगा। इसके लिए 27 मार्च से 15 अप्रैल तक रजिस्ट्रेशन खुले रहेंगे और 16 अप्रैल 2026 को पुन: नीलामी आयोजित की जाएगी।

सिकंदरा योजना के एलआईजी फ्लैट सस्ती दरों पर बड़ा मौका

एचआईजी फ्लैट कमला नगर क्षेत्र में स्थित है, जिसका कुल एरिया करीब 94.55 वर्ग मीटर है। इस फ्लैट के लिए रिजर्व प्राइस लगभग 42.38 लाख रुपये तय किया गया है, जबकि बोली लगाने के लिए करीब 2.11 लाख रुपये टोकन अमाउंट जमा करना होगा।

वहीं एलआईजी फ्लैट सिकंदरा की योजना (सेक्टर-4) में स्थित हैं। इनका एरिया लगभग 93.78 वर्ग मीटर है और इनकी कीमत करीब 42.49 लाख रुपये रखी गई है। इसके लिए टोकन मनी लगभग 2.12 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

यमुना एक्सप्रेसवे से एनसीआर तक सीधी और आसान कनेक्टिविटी

इन फ्लैट्स की सबसे बड़ी खासियत इनकी लोकेशन और कनेक्टिविटी है। कमला नगर से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहुंचा जा सकता है। नोएडा के परी चौक तक पहुंचने में करीब ढाई से तीन घंटे का समय लगता है, जबकि साउथ दिल्ली की दूरी लगभग साढ़े तीन घंटे में तय की जा सकती है।

भुगतान की सुविधा और जरूरी शर्तें

ई-नीलामी में सफल बोलीदाता को भुगतान किश्तों में करने की सुविधा भी दी जाएगी। हालांकि इस पर एमसीएलआर 1% की दर से ब्याज देना होगा। यदि समय पर किश्त जमा नहीं की जाती है, तो 2% अतिरिक्त चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाएगा। सभी फ्लैट्स जहां है, जैसा है के आधार पर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि प्राधिकरण द्वारा किसी प्रकार की मरम्मत या रंग-रोगन नहीं कराया जाएगा।

खरीदारों के लिए क्यों खास है यह मौका?

आगरा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इस तरह की ई-नीलामी खरीदारों और निवेशकों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। कीमतों में कटौती, बेहतर लोकेशन और मजबूत कनेक्टिविटी इस मौके को और खास बना रही है। जो लोग अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह सही समय माना जा रहा है। UP News


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उत्तर प्रदेश में है गौरैया वाली हवेली : 300 साल से चिड़ियों का बसेरा, अनोखी परंपरा कायम

बिजनौर जिले के स्योहारा कस्बे में स्थित एक पुरानी हवेली इन दिनों खास चर्चा में है। गौरैया वाली हवेली के नाम से मशहूर यह जगह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच रिश्ते की मिसाल है। यहां सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों गौरैया पिछले कई सौ वर्षों से रह रही हैं।

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केक काटकर लोगों को जागरूक किया जाता है
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 06:43 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा कस्बे में स्थित एक पुरानी हवेली इन दिनों खास चर्चा में है। गौरैया वाली हवेली के नाम से मशहूर यह जगह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच रिश्ते की मिसाल है। यहां सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों गौरैया पिछले कई सौ वर्षों से रह रही हैं।

पीढ़ियों से निभाई जा रही जिम्मेदारी

यह हवेली शेख परिवार की है, जिसने इस परंपरा को करीब 300 साल से जीवित रखा है। 

* परिवार में जब भी संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपी जाती है, तो एक खास शर्त रखी जाती है

* हवेली के ढांचे में बदलाव नहीं किया जाएगा

* यहां रहने वाली गौरैयों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा

इसी वजह से यह परंपरा बिना टूटे लगातार आगे बढ़ती रही है।

हजारों गौरैयों का सुरक्षित आशियाना

इस हवेली में लगभग 2 से 2.5 हजार गौरैया रहती हैं। 

* बड़े आंगन में पेड़, पौधे और बेलें घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त माहौल देते हैं

* दीवारों और कोनों में प्राकृतिक तरीके से घोंसले बने हुए हैं

* सुबह और शाम चिड़ियों की आवाज से पूरा इलाका जीवंत हो उठता है

खाने-पीने और सुरक्षा का पूरा इंतजाम

परिवार के सदस्य इन पक्षियों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

* रोजाना अलग-अलग तरह का दाना दिया जाता है, गेहूं, बाजरा, चावल, दलिया आदि

* मिट्टी के बर्तनों में साफ पानी रखा जाता है

* वातावरण शांत रखने का विशेष ध्यान रखा जाता है

* पंखे बंद रखे जाते हैं ताकि चिड़ियों को नुकसान न हो

* छत पर आवाजाही सीमित रहती है

* रोशनी भी कम रखी जाती है

विश्व गौरैया दिवस पर खास आयोजन

हर साल 20 मार्च को यहां गौरैया दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

* प्रतीकात्मक रूप से गौरैयों का जन्मदिन मनाया जाता है

* केक काटकर लोगों को जागरूक किया जाता है

* युवाओं को घरों में घोंसले लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है

आज के आधुनिक शहरों में गौरैयों की संख्या तेजी से कम हो रही है।

* कंक्रीट के मकानों में घोंसले की जगह नहीं बची

* पर्यावरणीय बदलाव भी एक बड़ा कारण है

ऐसे में यह हवेली दिखाती है कि थोड़ी सी संवेदनशीलता से इन पक्षियों को बचाया जा सकता है। बिजनौर की गौरैया वाली हवेली एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जहां इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन को पीढ़ियों से संभालकर रखा गया है। यह कहानी बताती है कि अगर हम चाहें, तो अपने आसपास की जैव विविधता को बचाना बिल्कुल संभव है।


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उत्तर प्रदेश के 25 जिलों में मौसम का कहर, 11 की मौत

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आंधी, तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

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बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 06:23 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि ने 25 से ज्यादा जिलों में भारी तबाही मचाई, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। बेमौसम बारिश से गेहूं, सरसों और आलू की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है।

बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आंधी, तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। जहां आम लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों की सालभर की मेहनत दांव पर लग गई है। खेतों में खड़ी फसलों पर बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया। किसान इसी कारण काफी दुखी हैं।

गेहूं और सरसों की फसल पर सबसे ज्यादा असर

तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल कई जगहों पर जमीन पर गिर गई है। पकने के करीब पहुंच चुकी फसल को बड़ा झटका लगा है। कटाई से पहले ही उत्पादन घटने की आशंका किसानों को खाए जा रही है। सरसों की फसल भी तेज हवा और बारिश से काफी प्रभावित हुई है।सब्जी उत्पादकों की बढ़ी परेशानबारिश का पानी खेतों में भर जाने से सब्जियों की फसल पर भी बुरा असर पड़ा है।

खेतों में जलभराव से पौधे खराब हो रहे

खेतों में जलभराव से पौधे खराब हो रहे हैं। हरी सब्जियों की गुणवत्ता घटने का खतरा काफी बढ़ गया है। बाजार में सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है। स्थानीय किसानों का कहना है कि कई महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई। जिन फसलों की कटाई होने वाली थी, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, अगर मौसम ऐसा ही रहा तो नुकसान और बढगा।

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