
Special story : Dhruvdas Maharaj[/caption]
घर द्वार सब कुछ त्याग दिया
ध्रुवदास महाराज की मां बचपन में गुजर गई थीं, जिससे उन्हें मां का प्रेम नहीं मिल पाया। लिहाजा, वे भगवान से ही प्रेम करने लगे। फिर इसी उम्र में एक संत को गुरु बनाकर अयोध्या निकल गए, तब से लेकर आज तक महाराज ने घर द्वार सब कुछ त्याग दिया है। पिछले 30 साल में ध्रुवदास महाराज ने देश के सारे मंदिर घूम कर तीर्थ कर लिए हैं। जहां मंदिर मिल जाता है वहीं रात में रुक जाते हैं। महाराज जी ने बताया कि वह कभी कुछ मांगते नहीं। मंदिर में भक्त जो प्रसाद चढ़ाते हैं, उसी को खाकर अपना पेट भरते हैं।
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Special story : Dhruvdas Maharaj[/caption]
भगवान के सामने डायरी रख करते हैं कामना
ध्रुवदास महाराज पदयात्रा करते वक्त जहां-जहां रुकते हैं, वहां रुकने से लेकर खाने पीने तक का हिसाब-किताब सब डायरी में नोट कर लेते हैं। यही नही खाने पीने के अलावा अगर किसी ने उन्हें गाली भी दी तो वह भी उसी डायरी में नोट कर लेते हैं। महाराज डायरी मंदिर पर जाकर भगवान के आगे रख देते हैं और जिसके बारे में अच्छा लिखा है। उसके परिवार की भलाई की कामना करते हैं और जिसके बारे में बुरा लिखा है, उसे सद्बुद्धि देने की कामना करते हैं। महाराज कभी किसी गाड़ी से यात्रा नहीं करते। वह अब तक देश के सभी धार्मिक स्थलों पर पैदल जाकर दर्शनक कर चुके हैं।
सैय्यद अबू साद