प्रदेश में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए अब राहत के दरवाजे लगभग बंद होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उप्र दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दे दी गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए अब राहत के दरवाजे लगभग बंद होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उप्र दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस नए कानून के लागू होते ही अब ट्रैफिक चालान समय के साथ अपने आप खत्म नहीं होंगे, यानी नियम तोड़ने पर जुर्माना भरना अनिवार्य होगा।
अब तक मोटर वाहन अधिनियम के तहत कई मामलों में ऐसा होता था कि यदि कोई व्यक्ति चालान नहीं भरता, तो एक निश्चित अवधि के बाद लोक अदालत के जरिए मामला स्वत: समाप्त हो जाता था। नई व्यवस्था में इस पूरी प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है, ताकि नियमों की अनदेखी करने वालों को कोई छूट न मिल सके।
यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। अदालत ने साफ कहा था कि ट्रैफिक उल्लंघन से जुड़े मामलों को अपने आप खत्म होने से रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए। इसी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने यह अध्यादेश लाने का फैसला किया।
फिलहाल इस अध्यादेश को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही यह कानून पूरे उत्तर प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत-
* ट्रैफिक चालान लंबित रहने पर स्वत: खत्म नहीं होंगे
* बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी
* गैर-शमनीय अपराधों में राहत नहीं मिलेगी।
*चालान नहीं भरा तो अटकेंगे कई काम
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अगर किसी वाहन का चालान लंबित है, तो वाहन की फिटनेस, एनओसी, अन्य सरकारी प्रक्रियाएं
भी प्रभावित हो सकती हैं। यानी अब नियम तोड़ने की कीमत हर हाल में चुकानी होगी।
सरकार का मानना है कि इस सख्ती से लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर अनुशासन बढ़ेगा और सड़क हादसों में कमी आएगी।
उत्तर प्रदेश में यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
साफ है अब उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक नियमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि चालान से बचने का पुराना रास्ता पूरी तरह बंद होने जा रहा है।