उत्तर प्रदेश सचिवालय में पोस्टिंग का खेल! 30+ एसओ नोटिस के घेरे में
अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित यूपी सचिवालय में तैनाती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुभाग अधिकारी (एसओ) पद पर मनचाही/मलाईदार पोस्टिंग पाने के लिए कुछ अधिकारियों ने घूस का सहारा लिया। मामले को गंभीर मानते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग ने 30 से अधिक अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस जारी होने के बाद से सचिवालय के गलियारों में खलबली मची हुई है और कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि जांच आगे किस दिशा में जाएगी।
पिछले कुछ महीनों से जुगाड़-घूस की चर्चाएं
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश सचिवालय (लखनऊ) में यह चर्चा तेज थी कि तबादला नीति को किनारे रखकर कुछ अधिकारियों को लगातार महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभागों में बनाए रखा जा रहा है। सचिवालय की तय व्यवस्था के तहत विभागों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर तैनाती का प्रावधान रखा गया था, ताकि हर कर्मचारी को समान अवसर मिले और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में इस नियम को दरकिनार कर चुनिंदा अधिकारियों को बार-बार A श्रेणी वाले विभागों में ही पोस्टिंग दिलाई गई। अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।
एसओ से मांगा गया लिखित जवाब
जानकारी के मुताबिक अनुभाग अधिकारियों की पोस्टिंग में घूसखोरी को लेकर शिकायत शासन के उच्च स्तर तक पहुंची थी। उसी शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल और आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र सचिवालय प्रशासन विभाग को भेजा गया। इसके बाद विभाग ने संबंधित अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है, ताकि आरोपों पर उनका लिखित जवाब लिया जा सके। सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान के हवाले से बताया गया कि, कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
विजिलेंस जांच की मांग तेज
नोटिसों का सिलसिला शुरू होते ही यूपी सचिवालय में माहौल गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठनों और कुछ कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मामला सिर्फ नोटिस और लिखित जवाब तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की विजिलेंस या किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिले। सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के मुताबिक ऐसे आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि पोस्टिंग में लेन-देन की बात सही साबित होती है, तो इसका सीधा असर शासन के कामकाज की पारदर्शिता, निष्पक्षता और शुचिता पर पड़ेगा। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत जिन-जिन तैनातियों पर सवाल उठे हैं, उनकी भी व्यापक जांच होनी चाहिए। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित यूपी सचिवालय में तैनाती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुभाग अधिकारी (एसओ) पद पर मनचाही/मलाईदार पोस्टिंग पाने के लिए कुछ अधिकारियों ने घूस का सहारा लिया। मामले को गंभीर मानते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग ने 30 से अधिक अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस जारी होने के बाद से सचिवालय के गलियारों में खलबली मची हुई है और कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि जांच आगे किस दिशा में जाएगी।
पिछले कुछ महीनों से जुगाड़-घूस की चर्चाएं
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश सचिवालय (लखनऊ) में यह चर्चा तेज थी कि तबादला नीति को किनारे रखकर कुछ अधिकारियों को लगातार महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभागों में बनाए रखा जा रहा है। सचिवालय की तय व्यवस्था के तहत विभागों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर तैनाती का प्रावधान रखा गया था, ताकि हर कर्मचारी को समान अवसर मिले और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में इस नियम को दरकिनार कर चुनिंदा अधिकारियों को बार-बार A श्रेणी वाले विभागों में ही पोस्टिंग दिलाई गई। अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।
एसओ से मांगा गया लिखित जवाब
जानकारी के मुताबिक अनुभाग अधिकारियों की पोस्टिंग में घूसखोरी को लेकर शिकायत शासन के उच्च स्तर तक पहुंची थी। उसी शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल और आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र सचिवालय प्रशासन विभाग को भेजा गया। इसके बाद विभाग ने संबंधित अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है, ताकि आरोपों पर उनका लिखित जवाब लिया जा सके। सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान के हवाले से बताया गया कि, कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
विजिलेंस जांच की मांग तेज
नोटिसों का सिलसिला शुरू होते ही यूपी सचिवालय में माहौल गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठनों और कुछ कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मामला सिर्फ नोटिस और लिखित जवाब तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की विजिलेंस या किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिले। सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के मुताबिक ऐसे आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि पोस्टिंग में लेन-देन की बात सही साबित होती है, तो इसका सीधा असर शासन के कामकाज की पारदर्शिता, निष्पक्षता और शुचिता पर पड़ेगा। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत जिन-जिन तैनातियों पर सवाल उठे हैं, उनकी भी व्यापक जांच होनी चाहिए। UP News












