अग्निहोत्री ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन से सवाल किया कि उन्हें पागल पंडित कहने वाला व्यक्ति कौन है और वह किस हैसियत से ऐसी टिप्पणी कर रहा था। उन्होंने साफ कहा कि जब तक इस टिप्पणी के पीछे का नाम सामने नहीं आता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

UP News : बरेली में उस वक्त राजनीतिक-प्रशासनिक माहौल गरमा गया, जब निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि उनके साथ न केवल अपमानजनक व्यवहार हुआ, बल्कि प्रशासन के भीतर से उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर बताने की कोशिश भी की गई। अग्निहोत्री ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन से सवाल किया कि उन्हें पागल पंडित कहने वाला व्यक्ति कौन है और वह किस हैसियत से ऐसी टिप्पणी कर रहा था। उन्होंने साफ कहा कि जब तक इस टिप्पणी के पीछे का नाम सामने नहीं आता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
निलंबित अधिकारी का दावा है कि सुबह उनके सरकारी आवास को पुलिस बल के जरिए घेर लिया गया और उन्हें बाहर निकलने से रोका गया। उन्होंने इसे अवैध नजरबंदी बताया। इसी के विरोध में वे अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
अग्निहोत्री का कहना है कि उनका निलंबन किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि उनके खिलाफ रची गई सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच कराने की मांग की है और विभागीय कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया है।
वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि न तो किसी तरह की नजरबंदी की गई और न ही किसी अधिकारी द्वारा अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ। प्रशासन के अनुसार, अग्निहोत्री से बातचीत सामान्य और शांतिपूर्ण माहौल में हुई थी।
यह विवाद सिर्फ एक निलंबन तक सीमित नहीं है। इसमें प्रशासनिक मर्यादा, व्यक्तिगत सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे जुड़ गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का खुलेआम धरने पर बैठना इस मामले को और गंभीर बना देता है। फिलहाल पूरा घटनाक्रम राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है और सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।