महराजगंज के रहने वाले 22 वर्षीय इनोवेटर राहुल सिंह का शव लखनऊ के विभूतिखंड स्थित एक फाइव स्टार होटल के कमरे से मिला।

UP News : महराजगंज के रहने वाले 22 वर्षीय इनोवेटर राहुल सिंह का शव लखनऊ के विभूतिखंड स्थित एक फाइव स्टार होटल के कमरे से मिला। राहुल ने कम उम्र में ही किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा इको-फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाया था, जिसकी बैटरी चलते-चलते चार्ज होती रहती थी। पुलिस मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देश के उभरते हुए युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। महराजगंज जिले के रहने वाले राहुल का शव विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित होटल नोवोटेल के कमरे में मिला। वह सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे होटल पहुंचे थे। मंगलवार को जब वह कमरे से बाहर नहीं आए तो होटल कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
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पुलिस के अनुसार, कमरे का दरवाजा खोलने के बाद राहुल सिंह बेड पर अचेत अवस्था में मिले। कमरे में उनका सामान सुरक्षित था। मौके से कुछ खाद्य सामग्री और अन्य साक्ष्य भी मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग या हार्ट अटैक जैसी संभावनाएं जताई जा रही हैं, हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। विभूतिखंड एसीपी सौम्या पांडे ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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राहुल सिंह सिर्फ एक छात्र नहीं बल्कि कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले इनोवेटर थे। महराजगंज के सिसवा बाजार क्षेत्र के रहने वाले राहुल के पिता किसान हैं। खेती के दौरान किसानों की परेशानियों को देखकर राहुल ने ऐसा ट्रैक्टर बनाने का सपना देखा, जो कम खर्च में खेती को आसान बना सके। 12वीं की पढ़ाई के दौरान राहुल ने बैटरी से चलने वाला इको-फ्रेंडली ट्रैक्टर तैयार किया था। इस ट्रैक्टर की खासियत थी कि इसकी बैटरी को अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। खेत में चलते समय ही इसकी बैटरी चार्ज होती रहती थी।
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राहुल के बनाए ट्रैक्टर को किसानों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया था। यह प्रदूषण मुक्त था और इसमें आवाज भी काफी कम थी। बताया जाता है कि यह करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता था और लगभग तीन घंटे में एक एकड़ खेत की जुताई करने में सक्षम था। इसमें गियर सिस्टम की जगह स्विच आधारित नियंत्रण लगाया गया था। राहुल ने ट्रैक्टर की मोटर और बैटरी सिस्टम पर खुद काम किया था। इसमें पावर स्टीयरिंग, बैटरी को ठंडा रखने की व्यवस्था और रात में काम करने के लिए लाइट की सुविधा भी दी गई थी।
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राहुल सिंह की प्रतिभा बचपन से ही सामने आने लगी थी। उन्होंने कम उम्र में कई तकनीकी मॉडल तैयार किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने आटोमैटिक रोटी मेकर, इको-फ्रेंडली साइकिल और अन्य तकनीकी प्रोजेक्ट पर भी काम किया था। वह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के डिजाइन इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े थे और रिसर्च के साथ अपने नए प्रयोगों पर काम कर रहे थे। विश्वविद्यालय से जुड़े रिकॉर्ड में भी राहुल सिंह के नवाचारों और पुरस्कारों का उल्लेख मिलता है। किसानों के लिए सस्ती और आधुनिक तकनीक विकसित करने का सपना देखने वाले राहुल सिंह के निधन से परिवार, दोस्तों और विज्ञान जगत में शोक की लहर है। एक प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक का इस तरह असमय चले जाना कई सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हुई है।
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