उत्तर प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण को जमीन पर आगे बढ़ाने वाले हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब शासन के सामने औपचारिक वार्ता की मेज तक पहुंच गई है। इस बार केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित रूप से वार्ता के लिए पत्र जारी किया गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण को जमीन पर आगे बढ़ाने वाले हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब शासन के सामने औपचारिक वार्ता की मेज तक पहुंच गई है। कंसलटेंट एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) की विभिन्न मांगों पर आगामी 25 सितंबर 2026 को पंचायती राज निदेशालय, लखनऊ में वार्ता होगी। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल केसरी के मुताबिक संगठन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित रूप से वार्ता के लिए पत्र जारी किया गया है। यह पत्र स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की स्टेट नोडल अधिकारी/उप निदेशक प्रवीणा चौधरी की ओर से जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। पंचायती राज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रवीणा चौधरी को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण से संबंधित उप निदेशक के रूप में दर्ज किया गया है। UP News
25 सितंबर की बैठक को कर्मचारियों की लंबी लड़ाई में महत्वपूर्ण पड़ाव इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ‘सेवा’ पिछले काफी समय से मानदेय बढ़ाने समेत अपनी विभिन्न मांगों को शासन के सामने रख रही है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मिशन निदेशक के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक 25 सितंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है। एसोसिएशन ने कर्मचारियों के मानदेय तथा अन्य मांगों पर चर्चा के लिए शासन से समय मांगा था। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद उसे बार-बार मौखिक आश्वासन ही मिलते रहे। अब पहली बार लिखित तौर पर वार्ता के लिए बुलाया गया है, इसलिए कर्मचारियों को उम्मीद है कि बैठक केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय की दिशा में आगे बढ़ेगी। UP News
‘सेवा’ का सबसे प्रमुख मुद्दा मानदेय में वृद्धि है। एसोसिएशन के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत उत्तर प्रदेश में चार हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं और करीब 11 वर्षों से उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। संगठन का तर्क है कि इस अवधि में महंगाई और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं, लेकिन मानदेय में उसी अनुपात में संशोधन नहीं किया गया। इसी वजह से कर्मचारियों में लंबे समय से असंतोष है। यह मुद्दा केवल वेतन या मानदेय की राशि तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की ओर से सेवा सुरक्षा, समय पर भुगतान, वार्षिक वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगें भी उठाई गई हैं। UP News
अगस्त 2026 में ‘सेवा’ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी मांगपत्र भेजकर मानदेय बढ़ाने सहित कई मांगों पर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। एसोसिएशन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की तरह मानदेय व्यवस्था, मानदेय में वृद्धि, समय से भुगतान, मानदेय का पुनरीक्षण, वार्षिक वेतन वृद्धि, आकस्मिक मृत्यु एवं दुर्घटना सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व लाभ, मानव संसाधन नीति लागू करने और नियमित संवाद व्यवस्था की मांग रखी थी। संगठन का कहना रहा है कि शासनादेश और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की ऑपरेशनल गाइडलाइन में एनआरएलएम की तर्ज पर मानदेय निर्धारण का प्रावधान होने के बावजूद एसबीएम-ग्रामीण के कर्मचारियों के मानदेय में अपेक्षित संशोधन नहीं हुआ है। यह संगठन का पक्ष है और 25 सितंबर की वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा होना महत्वपूर्ण होगा। UP News
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ चुका है। सितंबर के शुरुआती दिनों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने ‘सेवा’ के मानदेय वृद्धि संबंधी प्रतिवेदन को उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को भेजकर मामले में की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग की ओर से राज्य सरकार से इस मामले में कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद कर्मचारियों की ओर से यह संदेश दिया गया कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि परिणाम की अपेक्षा है। यानी यह मामला अब केवल कर्मचारियों और विभाग के बीच की मांग नहीं रह गया था, बल्कि इसका प्रतिवेदन केंद्र स्तर तक भी पहुंच चुका था। UP News
मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी भी दी थी। 30 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन की ओर से 3 सितंबर से काम ठप करने और 10 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी गई थी। संगठन ने मानदेय निर्धारण, वृद्धि, समय से भुगतान, पुनरीक्षण, दुर्घटना एवं आकस्मिक मृत्यु सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व लाभ, मानव संसाधन नीति तथा नियमित संवाद जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई थीं। इसके बाद शासन स्तर पर मामले में गतिविधियां बढ़ीं और अब 25 सितंबर की औपचारिक वार्ता तय हुई है। UP News
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण को गांवों तक पहुंचाने में जिन कर्मचारियों की भूमिका है, उनमें ब्लॉक स्तर के कर्मचारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, खंड प्रेरक तथा जिला स्तर के कंसल्टेंट आदि शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ब्लॉक स्तर के डाटा एंट्री ऑपरेटरों से मिशन की प्रगति से संबंधित ऑनलाइन डाटा, ग्राम पंचायतों की प्रगति, शौचालय निर्माण संबंधी प्रविष्टियां और विभागीय पत्राचार जैसे काम लिए जाते हैं। कुछ रिपोर्टों में कर्मचारियों ने यह भी बताया है कि उनसे स्वच्छ भारत मिशन के अलावा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान, डिजिटल लाइब्रेरी, अंत्येष्टि स्थल और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़े काम भी लिए जाते हैं। यह कर्मचारियों द्वारा बताई गई स्थिति है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की आधिकारिक फेज-2 गाइडलाइन में भी प्रशासनिक व्यय के तहत आउटसोर्स/कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ, कंसल्टेंट और एजेंसियों के वेतन भुगतान सहित विभिन्न प्रशासनिक खर्चों की अनुमति का उल्लेख है। UP News
‘सेवा’ की ओर से सामने रखी गई मांगों में मुख्य रूप से ये मुद्दे शामिल हैं—
कर्मचारियों की शिकायत का सबसे बड़ा आधार यही है कि मिशन के साथ उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन मानदेय उसी गति से नहीं बढ़ा। देवरिया से प्रकाशित एक रिपोर्ट में स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े कर्मचारियों ने बताया था कि कई कर्मचारी वर्षों से मिशन के साथ काम कर रहे हैं और आउटसोर्स व्यवस्था में आने के बाद उन्हें नौकरी की सुरक्षा तथा भविष्य को लेकर भी चिंता रहती है। उसी रिपोर्ट में एचआर पॉलिसी लागू करने, समय पर भुगतान और सम्मानजनक मानदेय की मांगें सामने आई थीं। यह भी उल्लेखनीय है कि उसी रिपोर्ट में एक कर्मचारी ने बताया था कि वर्ष 2023 में एक श्रेणी के कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान मानदेय अभी भी महंगाई और जिम्मेदारियों के अनुपात में पर्याप्त नहीं है। इसलिए अलग-अलग पदों और जिलों में लागू मानदेय को एक समान मान लेना उचित नहीं होगा। UP News
पिछले कई महीनों के घटनाक्रम को देखा जाए तो मामला अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। पहले कर्मचारियों की ओर से मांगपत्र दिए गए। फिर मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचा। इसके बाद केंद्र स्तर से राज्य सरकार से कार्रवाई की जानकारी मांगे जाने की खबर सामने आई। आंदोलन और काम बंद करने की चेतावनियां भी दी गईं। अब शासन ने एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को लिखित रूप से वार्ता के लिए बुलाया है। 25 सितंबर को होने वाली बैठक में कर्मचारियों की सबसे बड़ी नजर इस बात पर होगी कि क्या 11 साल से लंबित मानदेय पुनरीक्षण पर कोई ठोस प्रक्रिया शुरू होती है, क्या एनआरएलएम की तर्ज पर मानदेय निर्धारण के प्रस्ताव पर विचार होता है और क्या एचआर पॉलिसी तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने आता है। फिलहाल वार्ता तय होना एक प्रशासनिक कदम है; मानदेय बढ़ोतरी का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। इसलिए 25 सितंबर की बैठक के बाद शासन और एसोसिएशन की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक निर्णय अथवा आश्वासन ही इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट करेंगे। UP News
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण का उद्देश्य गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। इस लक्ष्य को जमीन पर लागू करने वाले हजारों कर्मचारी वर्षों से विभिन्न स्तरों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मानदेय, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और मानव संसाधन नीति से जुड़ी उनकी मांगें केवल कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े मानव संसाधन के भविष्य का भी विषय बन गई हैं। अब 25 सितंबर को लखनऊ में होने वाली वार्ता इस लंबे इंतजार का अगला अध्याय तय करेगी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार बातचीत आश्वासन से आगे बढ़कर मानदेय और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में ठोस कदम तक पहुंचेगी। UP News
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