शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लखनऊ के लिए रवाना होते हुए उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक और विडंबनापूर्ण स्थिति है कि अपने ही देश में गौ रक्षा जैसे आस्था और परंपरा से जुड़े विषय पर जनजागरण और संघर्ष की राह पकड़नी पड़ रही है।

UP News : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश से अपने बहुचर्चित अभियान का औपचारिक शंखनाद कर दिया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लखनऊ के लिए रवाना होते हुए उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक और विडंबनापूर्ण स्थिति है कि अपने ही देश में गौ रक्षा जैसे आस्था और परंपरा से जुड़े विषय पर जनजागरण और संघर्ष की राह पकड़नी पड़ रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह अब केवल धार्मिक भावना का मामला नहीं रह गया, बल्कि उत्तर प्रदेश की धरती से उठी व्यापक सामाजिक चेतना का अभियान बन चुका है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यह यात्रा उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों से होकर राजधानी लखनऊ पहुंचेगी। इस अभियान का समापन 11 मार्च को लखनऊ में प्रस्तावित विशाल जनसभा के रूप में होगा, जहां बड़ी संख्या में संत-समाज की मौजूदगी रहने की बात कही जा रही है। इस सभा में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को औपचारिक रूप से और तेज आवाज में उठाया जाएगा।
शंकराचार्य का कहना है कि उत्तर प्रदेश से उठने वाली यह आवाज पूरे देश में संदेश देगी। उन्होंने दावा किया कि समाज का हर वर्ग चाहे वह किसी भी वर्ण, वर्ग या पृष्ठभूमि से जुड़ा हो गौ संरक्षण के मुद्दे पर एकजुट दिख रहा है।
वाराणसी से प्रस्थान से पहले शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए अब निर्णायक संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के जिन-जिन जिलों से यह यात्रा गुजरेगी, वहां जनप्रतिनिधियों से भी स्पष्ट रुख की अपेक्षा की जाएगी। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि सांसद और विधायक खुलकर बताएं कि वे गौ संरक्षण के पक्ष में खड़े हैं या नहीं। उन्होंने इस अभियान को “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा” से जोड़ा और कहा कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जनमत तैयार करने का प्रयास है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने पहले ही सरकार को समयसीमा दी थी। उनका कहना है कि तय अवधि बीतने के बाद अब आंदोलनात्मक चरण शुरू किया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में यह यात्रा निकाली जा रही है, ताकि गांव-गांव और शहर-शहर लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सके।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लखनऊ की सभा के बाद आंदोलन की अगली दिशा तय की जाएगी। यानी उत्तर प्रदेश की राजधानी में होने वाली बैठक इस पूरे अभियान के लिए अहम मोड़ साबित हो सकती है।
यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने गौशाला पहुंचकर गौपूजन किया। इसके बाद काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना और पाठ के उपरांत वे लखनऊ के लिए रवाना हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला। जयघोष, शंखनाद और धार्मिक नारों के बीच यात्रा का प्रस्थान हुआ। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर जैसे जिलों से गुजरते हुए लखनऊ पहुंचेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक भी साथ चल रहे हैं। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगी, बल्कि रास्तेभर जनसंपर्क, संवाद और संदेश-वितरण पर विशेष फोकस रहेगा। इसके लिए पोस्टर, पर्चे और स्थानीय संपर्क कार्यक्रमों की भी व्यवस्था की गई है। इस तरह उत्तर प्रदेश में यह यात्रा धार्मिक, सामाजिक और जनआंदोलन तीनों रूपों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की ओर से स्वागत संबंधी प्रतिक्रिया पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह वही समय है जब लोगों को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक, जो लोग गौमाता के समर्थन में हैं, वे खुलकर सामने आएंगे, जबकि विरोध करने वाले चुप्पी साधे रहेंगे। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ में होने वाली संत सभा में यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि इस अभियान के साथ कौन-कौन खड़ा है और आगे आंदोलन किस दिशा में बढ़ेगा। इस लिहाज से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता नजर आ रहा है। UP News