
UP News : उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एक बार फिर सवालों के घेरे में की वजह है उनका एक वायरल वीडियो, जिसमें वे बिजली आपूर्ति की गंभीर शिकायतों के बीच जवाब देने के बजाय धार्मिक नारे लगाते हुए मौके से रवाना होते नजर आ रहे हैं। यह घटना केवल एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि यूपी की ऊर्जा व्यवस्था की गहराती खामियों और जवाबदेही की कमी की ओर इशारा करती है।
10 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के सूरापुर कस्बे में व्यापारियों ने मंत्री शर्मा से क्षेत्र में हो रही घंटों की बिजली कटौती की शिकायत की। जवाब में, उन्होंने कोई ठोस आश्वासन देने के बजाय "जय श्रीराम" और "जय बजरंगबली" के नारे लगाए और अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए। सोशल मीडिया पर यह घटना तीखी आलोचना का कारण बनी, कुछ लोगों ने इसकी तुलना कार्ल मार्क्स के उस कथन से की, जिसमें धर्म को जनता की 'अफ़ीम' बताया गया था।
यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा की ऊर्जा मंत्रालय को लेकर कार्यशैली पर सवाल उठे हों। मार्च 2025 में उनके गृह जिले मऊ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल हो गई थी, जिससे उन्हें अंधेरे में भाषण देना पड़ा। उस घटना में उन्हें चप्पल तक मोबाइल की रोशनी में खोजनी पड़ी थी। नतीजा—चार अफसर सस्पेंड हुए, लेकिन जमीनी हालात अब भी जस के तस।
2022 में खुद मंत्री शर्मा ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि राज्य की विद्युत लाइनें बेहद जर्जर हैं, ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हो चुके हैं और खंभे गिरने की नौबत तक आ गई है। सरकार ने 44,000 करोड़ रुपये की योजना—रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS)—की घोषणा की, मगर ज़मीन पर इसके परिणाम नज़र नहीं आ रहे। बिजली चोरी, तकनीकी हानियाँ और बढ़ती मांग की तिकड़ी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
2022 में यूपी में बिजली की अधिकतम मांग 17,000 मेगावाट थी जो अब बढ़कर 30,618 मेगावाट हो चुकी है। गांवों तक एसी पहुँच चुके हैं, लेकिन ट्रांसमिशन व्यवस्था उसी पुराने ढर्रे पर चल रही है। ऊर्जा मंत्री ने खुद विधान परिषद में माना था कि बिजली चोरी के चलते राज्य को सालाना करीब 47,000 करोड़ की सब्सिडी देनी पड़ती है। 2022 में रामपुर ज़िले के 59 मंदिरों और 115 मस्जिदों पर बिजली चोरी के केस भी दर्ज हुए थे। UP News
विपक्ष विशेषकर समाजवादी पार्टी यह आरोप लगाती रही है कि योगी सरकार ने बीते 8 वर्षों में कोई नया पावर प्लांट स्थापित नहीं किया। अखिलेश यादव का दावा है कि मौजूदा बिजली आपूर्ति उन्हीं परियोजनाओं से संभव हो रही है जो उनकी सरकार के समय शुरू हुई थीं—जैसे ओबरा-सी, घाटमपुर, जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स।
हालांकि एक निष्पक्ष आकलन यह दिखाता है कि योगी सरकार ने इन परियोजनाओं को ठप नहीं किया, बल्कि इन्हें आगे बढ़ाकर पूर्णता तक पहुँचाया—जो भारतीय राजनीति में दुर्लभ परंपरा है। इसके अतिरिक्त, सौर ऊर्जा को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई दी है। UP News
अगर आंकड़ों के आधार पर तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन देने के मामले में योगी सरकार का ग्राफ कहीं ऊपर है। 2012-17 के बीच जहाँ सालाना औसतन 9.5 लाख घरों को बिजली कनेक्शन मिले, वहीं 2017-2024 के दौरान यह संख्या बढ़कर 35 लाख सालाना पहुंच गई। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी औसतन 12.25 घंटे से बढ़कर 17.43 घंटे तक हो गई है। बिजली चोरी की दर भी 40% से घटकर 24% पर आ चुकी है। 24x7 कमांड और कंट्रोल सेंटर, टोल-फ्री नंबर 1912 और शिकायतों के डिजिटल समाधान जैसे प्रयास किए गए हैं। लेकिन सवाल अब भी बरकरार है—क्या ज़मीनी स्तर पर इन प्रयासों का असर दिख रहा है ? UP News