मुर्गे ने दिखाई इंसानियत, बकरी के बच्चे की जान बचाने के लिए खुद को किया कुर्बान
भारत
चेतना मंच
21 Jul 2022 10:34 PM
Pratapgarh :प्रतापगढ़। किसी मासूम की जान बचाना इंसानियत है। लेकिन, यह इंसानियत एक मुर्गे ने दिखाई। उसने बकरी के बच्चे की जान बचाने के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी। कुत्ते और मुर्गे के बीच काफी देर तक लड़ाई चली। आखिर, कुत्ते को पीछे हटना पड़ा और बकरी के बच्चे की जान बच गई। मगर, इस संघर्ष में मुर्गे को अपनी जान गंवानी पड़ी। मुर्गे की मौत से आहत मालिक ने उसका शव दफन कर दिया। उसने मुर्गे की तेरहवीं की। उसमें शामिल होने के लिए इलाके की भीड़ उमड़ पड़ी। लगभग 500 लोगों के लिए खाने में पूड़ी, पनीर की सब्जी और चावल का इंतजाम किया गया था।
फतनपुर थाना क्षेत्र के बेहदौल कला गांव निवासी डॉ. शालिकराम सरोज अपना क्लीनिक चलाते हैं। घर पर उन्होंने बकरी और एक मुर्गा पाल रखा था। मुर्गे को वे 5 साल पहले लेकर आए थे। मुर्गे से पूरा परिवार इतना प्यार करने लगा कि उसका नाम लाली रख दिया। 8 जुलाई को एक कुत्ते ने डॉ. शालिक राम की बकरी के बच्चे पर हमला कर दिया। यह देख लाली कुत्ते से भिड़ गया। बकरी का बच्चा तो बच गया, लेकिन लाली खुद कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। 9 जुलाई की शाम लाली ने दम तोड़ दिया। घर के पास उसका शव दफना दिया गया। सब कुछ सामान्य चल रह था। इसके बाद डॉ शालिक राम ने रीति-रिवाज के मुताबिक मुर्गे की तेरहवीं की घोषणा कर दी। यह सुनकर लोगों में चर्चा होने लगी। इसके बाद अंतिम संस्कार के कर्मकांड होने लगे। सिर मुंडाने से लेकर अन्य कर्मकांड पूरे किए गए। मंगलवार सुबह से ही हलवाई तेरहवीं का भोजन तैयार करने में जुट गए। शाम से लेकर रात दस बजे तक 500 से अधिक लोगों ने तेरहवीं में पहुंचकर भोज किया।
शालिक राम की बेटी अनुजा सरोज ने बताया कि लाली मुर्गा मेरे भाइयों जैसा था। उसकी मौत होने के बाद दो दिनों तक घर में खाना नहीं बना। मातम जैसा माहौल था। हम उसको रक्षाबंधन पर राखी भी बांधते थे। बेहदौल कला गांव के बीडीसी वीरेंद्र प्रताप पाल ने बताया कि जब डॉ शालिकराम ने तेरहवीं के लिए निमंत्रण दिया तो विश्वास नहीं हुआ। लेकिन, 40 हजार रुपये खर्च कर शालिकराम ने कार्यक्रम किया। इसके बाद लोग मुर्गे के प्रति मालिक का प्रेम देखकर उनकी सराहना कर रहे हैं। शालिकराम ने बताया मुर्गा हमारे परिवार के सदस्य जैसा था। घर की रखवाली करता था। उससे सभी को अटूट प्रेम था। इसकी मौत के बाद आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं का कार्यक्रम किया गया।