उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को अपनी संपत्ति संबंधी जानकारी जमा करने की तिथि बढ़ाई

सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को अपनी संपत्ति संबंधी जानकारी जमा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी है। कर्मचारियों को यह विवरण 10 मार्च 2026 तक प्रस्तुत करना होगा। इस तिथि तक जानकारी देने वालों का वेतन समय पर जारी किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 04:11 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को अपनी संपत्ति संबंधी जानकारी जमा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी है। कर्मचारियों को यह विवरण 10 मार्च 2026 तक प्रस्तुत करना होगा। इस तिथि तक जानकारी देने वालों का वेतन समय पर जारी किया जाएगा।

प्रक्रिया का पालन करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं

हालांकि, इस बार इस प्रक्रिया का पालन करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति और एसीपी (अग्रिम सेवा संवर्धन) का लाभ नहीं मिलेगा। यह निर्देश मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से जारी शासनादेश के माध्यम से सामने आया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम कर्मचारियों के वित्तीय विवरण को अपडेट करने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

कर्मचारियों को दी गई निश्चित समय सीमा

उत्तर प्रदेश में संपत्ति का विवरण जमा करने के लिए कर्मचारियों को दी गई निश्चित समय सीमा। यह समय सीमा अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि संपत्ति का विवरण जमा करने के बाद ही वेतन जारी किया जाएगा। कर्मचारियों में विवरण जमा करने को लेकर चर्चा का दौर जारी है।

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होली पर यूपी के 47 हजार कर्मचारियों को बड़ा झटका, नहीं मिलेगी सैलरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने संपत्ति विवरण अपडेट नहीं किया है, उन्हें अब 10 मार्च तक का समय दिया गया है। डिटेल अपलोड होने के बाद ही इनका जनवरी और फरवरी का वेतन जारी किया जाएगा।

योगी सरकार का बड़ा फैसला
योगी सरकार का बड़ा फैसला
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 04:10 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में होली से ठीक पहले करीब 47 हजार राज्य कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। शासन के सख्त रुख के चलते इन कर्मचारियों का जनवरी और फरवरी का वेतन फिलहाल रोक दिया गया है, क्योंकि तय समयसीमा में इन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपडेट नहीं किया। इस संबंध में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने संपत्ति विवरण अपडेट नहीं किया है, उन्हें अब 10 मार्च तक का समय दिया गया है। डिटेल अपलोड होने के बाद ही इनका जनवरी और फरवरी का वेतन जारी किया जाएगा। हालांकि, आदेश के मुताबिक पदोन्नति और एसीपी (ACP) जैसे लाभ इस प्रक्रिया पूरी होने तक नहीं मिलेंगे।

जीरो टॉलरेंस के तहत उत्तर प्रदेश सरकार का कड़ा कदम

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रशासनिक अनुशासन को और मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी नीति के तहत प्रदेश के सभी राज्य कर्मचारियों के लिए संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य किया गया था। लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने विवरण अपलोड नहीं किया, जिसके बाद शासन ने वेतन रोकने का सख्त फैसला लिया। उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, वेतन, अवकाश, पदस्थापन और संपत्ति विवरण समेत कई महत्वपूर्ण जानकारी का प्रबंधन मानव संपदा पोर्टल के जरिए करती है। सरकार का कहना है कि संपत्ति विवरण ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और सिस्टम में जवाबदेही मजबूत होगी। प्रभावित कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे तुरंत पोर्टल लॉगिन कर संपत्ति विवरण अपडेट करें, ताकि वेतन जल्द जारी हो सके।

बाकी कर्मचारियों-पेंशनरों को होली से पहले मिलेगा भुगतान

उत्तर प्रदेश में इन 47 हजार कर्मचारियों को छोड़कर बाकी सभी राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत की खबर है। होली को देखते हुए वित्त विभाग ने 28 फरवरी को ही वेतन और पेंशन जारी करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में बताया गया है कि 1 मार्च सामान्य अवकाश और 2 मार्च होलिका दहन का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण भुगतान समय से पहले किया जा रहा है। इसमें सहायता प्राप्त शिक्षण/प्राविधिक संस्थान, शहरी स्थानीय निकाय और कार्यप्रभारित कर्मचारी भी शामिल हैं, वहीं कोषागार से पेंशन पाने वाले पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर भी 28 फरवरी को भुगतान के दायरे में रहेंगे। UP News

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 27 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में होगी। यह सुनवाई अदालत में जितेंद्र कुमार सिन्हा के समक्ष होगी।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 02:21 PM
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UP News : प्रयागराज के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 27 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में होगी। यह सुनवाई अदालत में जितेंद्र कुमार सिन्हा के समक्ष होगी। दोनों के खिलाफ बालकों के यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया है, जो पाश्को अधिनियम के तहत स्पेशल कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था।

पाश्को अधिनियम के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला

इस मामले में आरोप है कि शंकराचार्य और उनके शिष्य ने नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर स्पेशल पाश्को कोर्ट के निर्देशानुसार दर्ज की गई। पीड़ितों की संख्या लगभग 20 बताई जा रही है, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।

पीड़ित बटुकों के बयान और मेडिकल जांच

मामले में अब तक दो नाबालिगों का न्यायालय में बयान दर्ज किया जा चुका है। पुलिस ने एक बच्चे का मेडिकल जांच पूरा कर लिया है, जबकि दूसरे का मेडिकल दो दिन बाद कराना शेष है। मेडिकल पैनल ने सभी प्रक्रिया पूरी की है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बच्चों ने कोर्ट में बताया कि उन्हें धार्मिक गतिविधियों और गुरु दीक्षा के नाम पर मठ में लाया गया और वहां उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

आरोप और कथित वीआईपी/नेताओं की भूमिका

एफआईआर में दावा किया गया है कि कुछ बड़े नेता और वीआईपी भी इस मामले से जुड़े हो सकते हैं। पीड़ितों के अनुसार, बच्चों को मठ और अन्य स्थानों पर लाया गया, और उनसे जुड़े वीडियो और फोटो भी लैपटॉप में मौजूद थे। आरोप है कि मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर, प्रतापगढ़ और अन्य जगहों पर भी बच्चों के शोषण की घटनाएं हुईं। मठ में मौजूद आलीशान भवन और स्विमिंग पूल के सबूत मिटाने का भी आरोप लगाया गया है।

आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया

पुलिस ने अब तक दो बच्चों का मेडिकल और न्यायालय में बयान दर्ज कर लिया है। एसीपी झूंसी विमल कुमार मिश्र की टीम जल्द ही शंकराचार्य के मठ में जाकर पूछताछ करेगी। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद ही आरोपी की हिरासत और जांच की आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्थान और उच्च पदस्थ लोगों के खिलाफ गंभीर यौन शोषण के आरोप हैं। मेडिकल रिपोर्ट और न्यायालय में दर्ज बयान जांच में निर्णायक साबित हो सकते हैं। UP News


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