जानें, उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बेहद काम की सरकारी मोबाइल ऐप्स

राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए कई ऐसे आधिकारिक मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से लोग घर बैठे ही शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं और जरूरी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं यूपी सरकार की उन प्रमुख ऐप्स के बारे में, जो हर नागरिक के फोन में होनी चाहिए।

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मोबाइल ऐप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Feb 2026 06:59 PM
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UP News : अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और अब तक सरकारी मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते, तो आप कई जरूरी सुविधाएं मिस कर रहे हैं। राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए कई ऐसे आधिकारिक मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से लोग घर बैठे ही शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं और जरूरी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं यूपी सरकार की उन प्रमुख ऐप्स के बारे में, जो हर नागरिक के फोन में होनी चाहिए।

जनसुनवाई समाधान ऐप

यह ऐप प्रदेशवासियों की समस्याओं और शिकायतों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। बिजली, पानी, सड़क, राशन या किसी भी सरकारी सेवा से जुड़ी परेशानी को इस ऐप के जरिए दर्ज किया जा सकता है। खास बात यह है कि शिकायत के साथ फोटो या वीडियो भी अपलोड किया जा सकता है और तय समय सीमा में कार्रवाई की जाती है। यूजर अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकता है और समाधान मिलने के बाद फीडबैक भी दे सकता है।

UPCOP ऐप

उत्तर प्रदेश पुलिस की डिजिटल सेवाओं के लिए यह ऐप काफी उपयोगी है। इसके जरिए लोग बिना थाने जाए आॅनलाइन एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। मोबाइल, पर्स या वाहन चोरी, साइबर अपराध, गुमशुदा बच्चों की जानकारी और अन्य आपराधिक मामलों की शिकायत भी इसी ऐप से की जा सकती है।

उद्यम सारथी ऐप

राज्य के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से यह ऐप लॉन्च किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार नौकरी के अवसर तलाश सकते हैं। साथ ही स्वरोजगार से जुड़ी जानकारियां भी मिलती हैं।

युवा साथी ऐप

यह ऐप शिक्षा, नौकरी और कौशल विकास से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके जरिए युवा अलग-अलग योजनाओं के बारे में जान सकते हैं और उनके लिए आवेदन भी कर सकते हैं।

संदेस ऐप

संदेस एक सुरक्षित मैसेजिंग ऐप है, जिसे सरकारी विभागों में आधिकारिक संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह ऐप डेटा सुरक्षा के लिहाज से काफी भरोसेमंद माना जाता है।

निवेश मित्र ऐप

उत्तर प्रदेश में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेश मित्र ऐप शुरू किया गया है। इसके जरिए कारोबारियों और निवेशकों को विभिन्न विभागों से जुड़ी मंजूरी और ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल जाती हैं।

ई-डिस्ट्रिक्ट यूपी ऐप

अब जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। इस ऐप के जरिए कई नागरिक सेवाओं के लिए आनलाइन आवेदन किया जा सकता है और प्रमाण पत्र डिजिटल रूप में प्राप्त किए जा सकते हैं।

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जिसका परिवार पद्मश्री से नवाजा गया, उसका डेढ़ साल से नहीं बन सका दिव्यांगता प्रमाणपत्र

वेदमती जन्म से ही दिव्यांग हैं और बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में आती हैं। इसके चलते वे कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता श्रीभास सुपकार ही नहीं, बल्कि उनके दादा जदुनाथ सुपकार भी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित रह चुके हैं, इसके बावजूद मामला लटका हुआ है।

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दिव्यांगता प्रमाणपत्र
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Feb 2026 06:36 PM
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UP News : जिस परिवार को देश ने पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा हो, उसकी बेटी को भी अगर बुनियादी अधिकार के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बनारसी हथकरघा और वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्रीभास चंद्र सुपकार की 25 वर्षीय बेटी वेदमती सुपकार पिछले डेढ़ साल से दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।

पिता और दादा को मिल चुका है पद्मश्री पुरस्कार

वेदमती जन्म से ही दिव्यांग हैं और बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में आती हैं। इसके चलते वे कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता श्रीभास सुपकार ही नहीं, बल्कि उनके दादा जदुनाथ सुपकार भी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित रह चुके हैं, इसके बावजूद मामला लगातार लटका हुआ है।

न प्रमाणपत्र बना ना ही कोई जवाब दिया गया

श्रीभास सुपकार के अनुसार, उन्होंने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में अपनी बेटी का पंजीकरण पहले ही करा दिया था। वहां से उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को आवेदन देने की सलाह दी गई। इसके बाद 11 जून 2024 को सीएमओ को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि बेटी की गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल जांच के लिए डॉक्टरों की टीम घर भेजी जाए। बावजूद इसके, न तो कोई टीम पहुंची और न ही विभाग की ओर से कोई ठोस जवाब मिला। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार यही आश्वासन मिला कि मामला सीएमओ तक पहुंचा दिया गया है और जल्द फोन आएगा। डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी न कोई कॉल आया और न ही प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

व्यवस्था का भी पालन नहीं किया गया

दस्तावेजों के अनुसार, वेदमती सुपकार का जन्म 17 मई 2000 को हुआ था। वे सामान्य वर्ग से हैं और उन्हें कॉर्पस कैलोसम से जुड़ी चिकित्सकीय समस्या है। नियमों के तहत गंभीर दिव्यांगता के मामलों में मेडिकल टीम घर जाकर या वीडियो कॉल के माध्यम से सत्यापन कर सकती है, लेकिन इस प्रकरण में उस व्यवस्था का भी पालन नहीं किया गया। श्रीभास सुपकार का कहना है कि यह सिर्फ उनकी बेटी की समस्या नहीं है, बल्कि उस तंत्र की हकीकत है, जहां सम्मान तो दिया जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आम नागरिक की तरह न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस मामले पर एडिशनल सीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद ने कहा कि प्रकरण की जानकारी ली जाएगी और यह देखा जाएगा कि फाइल क्यों रुकी हुई है। यदि सभी दस्तावेज सही पाए गए, तो जांच कराकर दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

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उत्तर प्रदेश में पर्यटन के नए युग का हुआ आरंभ

राज्य सरकार ने इसे केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन का एक मुख्य साधन भी बनाया है। इस दूरदर्शी दृष्टिकोण और आधारभूत संरचनाओं के सुधार के कारण, उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।

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उत्तर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Feb 2026 05:43 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद पर्यटन क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास देखने को मिला है। राज्य सरकार ने इसे केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन का एक मुख्य साधन भी बनाया है। इस दूरदर्शी दृष्टिकोण और आधारभूत संरचनाओं के सुधार के कारण, उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।

आध्यात्मिक सर्किट और धार्मिक स्थलों का विकास

अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण और दीपोत्सव जैसे भव्य आयोजन ने इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया है। 2017 में जहां पर्यटकों की संख्या लाखों में थी, अब यह करोड़ों में पहुँच चुकी है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने न केवल मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ाई बल्कि पर्यटकों के लिए सुविधाओं को भी बेहतर बनाया। गंगा आरती और क्रूज पर्यटन जैसे आकर्षण पर्यटकों को बांधने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ब्रज क्षेत्र में मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ है, जिससे इन क्षेत्रों का सांस्कृतिक वैभव पुनर्जीवित हुआ है।

पर्यटन को औद्योगिक दृष्टि से बढ़ावा

राज्य सरकार ने पर्यटन को औद्योगिक दर्जा दिया, जिससे निवेशकों को कई लाभ प्राप्त हुए। 2022 की नई पर्यटन नीति के तहत होटलों और रिसॉर्ट्स को औद्योगिक दरों पर बिजली और पानी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। कुशीनगर और जेवर (नोएडा) जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के निर्माण के साथ अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास हुआ है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हुए यात्रा समय और दूरी में महत्वपूर्ण कमी की है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

विविध पर्यटन और स्थानीय रोजगार

धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया गया है। दुधवा, पीलीभीत और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में पर्यटक सुविधाओं में सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। दीपोत्सव (अयोध्या), रंगोत्सव (बरसाना) और देव दीपावली (वाराणसी) जैसे उत्सव राज्य के पर्यटन आकर्षण बन चुके हैं। महाकुंभ 2025, सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में, विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में शामिल हुआ। पर्यटन क्षेत्र में यह विकास न केवल राज्य की जीडीपी में योगदान दे रहा है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए होटल, गाइड, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। उत्तर प्रदेश अब केवल ताजमहल का राज्य नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है।

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