बीजेपी की निगाह मुस्लिम महिलाओं पर, योगी सरकार ने फिर दिया एक तोहफा
उत्तर प्रदेश में ईद से पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में ईद से पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इस प्रस्तावित ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाएं बिना कहीं गए यानी घर बैठे महिलाएं घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य मामलों की शिकायत दर्ज कर सकेंगी। घर बैठे शिकायत की स्थिति (स्टेटस ट्रैकिंग) देख सकेंगी, निस्तारण रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगी साथ ही अपनी फीडबैक भी दे सकेंगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान के अनुसार कई मुस्लिम महिलाएं सामाजिक पाबंदियों के कारण थाने या सरकारी दफ्तर नहीं जा पातीं। कई मामलों में महिलाएं एक बार बाहर आने के बाद दोबारा नहीं निकल पातीं इसलिए यह ऐप उन्हें घर बैठे न्याय पाने का माध्यम देगा। जिला स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को इस ऐप के बारे में जागरूक किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।
जनसुनवाई में क्या सामने आया?
हाल ही में हुई जनसुनवाई में कुल 44 मामलों की सुनवाई हुई, इनमें घरेलू हिंसा, दहेज और गुजारा भत्ता से जुड़े मामले शामिल थे। कई विभागों को समय पर कार्रवाई न करने पर चेतावनी भी दी गई। आयोग ने पुलिस से साफ कहा है कि पीड़ित महिलाओं की तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, उन्हें अनावश्यक चक्कर न लगवाए जाएं साथ ही मामलों का एक हफ्ते के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह ऐप मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम साबित हो सकता है, जो उन्हें सामाजिक सीमाओं के बावजूद न्याय तक आसान पहुंच देगा। ईद के मौके पर यह पहल वास्तव में एक सशक्तिकरण का तोहफा मानी जा रही है।
UP News : उत्तर प्रदेश में ईद से पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इस प्रस्तावित ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाएं बिना कहीं गए यानी घर बैठे महिलाएं घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य मामलों की शिकायत दर्ज कर सकेंगी। घर बैठे शिकायत की स्थिति (स्टेटस ट्रैकिंग) देख सकेंगी, निस्तारण रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगी साथ ही अपनी फीडबैक भी दे सकेंगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान के अनुसार कई मुस्लिम महिलाएं सामाजिक पाबंदियों के कारण थाने या सरकारी दफ्तर नहीं जा पातीं। कई मामलों में महिलाएं एक बार बाहर आने के बाद दोबारा नहीं निकल पातीं इसलिए यह ऐप उन्हें घर बैठे न्याय पाने का माध्यम देगा। जिला स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को इस ऐप के बारे में जागरूक किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।
जनसुनवाई में क्या सामने आया?
हाल ही में हुई जनसुनवाई में कुल 44 मामलों की सुनवाई हुई, इनमें घरेलू हिंसा, दहेज और गुजारा भत्ता से जुड़े मामले शामिल थे। कई विभागों को समय पर कार्रवाई न करने पर चेतावनी भी दी गई। आयोग ने पुलिस से साफ कहा है कि पीड़ित महिलाओं की तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, उन्हें अनावश्यक चक्कर न लगवाए जाएं साथ ही मामलों का एक हफ्ते के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह ऐप मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम साबित हो सकता है, जो उन्हें सामाजिक सीमाओं के बावजूद न्याय तक आसान पहुंच देगा। ईद के मौके पर यह पहल वास्तव में एक सशक्तिकरण का तोहफा मानी जा रही है।












