राष्ट्रपति कार्यक्रम से पहले राम मंदिर पहुंचे सीएम योगी, परखी तैयारियां

रामनगरी पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया, फिर अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सुबह करीब 10 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर राम कथा पार्क स्थित हेलीपैड पर उतरा।

रामलला के दरबार में सीएम योगी
रामलला के दरबार में सीएम योगी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 12:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अयोध्या पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित दौरे और आगामी धार्मिक आयोजनों की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। रामनगरी पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया, फिर अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सुबह करीब 10 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर राम कथा पार्क स्थित हेलीपैड पर उतरा। वहां से वे सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे और बजरंगबली के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रभु श्रीराम की आरती उतारी और उत्तर प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

19 मार्च को प्रस्तावित है राष्ट्रपति मुर्मु का अयोध्या दौरा

अयोध्या में यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब 19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जानकारी के अनुसार, हिंदी नववर्ष के अवसर पर राष्ट्रपति राम मंदिर के द्वितीय तल पर रामनाम यंत्र की स्थापना से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हो सकती हैं। इसी दौरान मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों के सम्मान का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित पीएफसी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर से सीधे अयोध्या पहुंचे थे। यहां निरीक्षण और समीक्षा के बाद वे दोपहर करीब 12 बजे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या में होने वाले हर बड़े धार्मिक और राष्ट्रीय महत्व के आयोजन को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

रामनवमी और नवसंवत्सर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय

राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के साथ-साथ रामनवमी मेले और हिंदू नवसंवत्सर के अवसर पर भी अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में बुधवार को एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार भी अयोध्या पहुंचे और उन्होंने सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। उन्होंने पहले हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि में दर्शन किया, उसके बाद जिले के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर भीड़ नियंत्रण, रूट डायवर्जन, संवेदनशील बिंदुओं और वीआईपी सुरक्षा पर विस्तार से मंथन किया। उन्होंने कहा कि रामनवमी अयोध्या के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है और इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी सजगता के साथ व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुटा है।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर

अधिकारियों के मुताबिक, अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए बहुस्तरीय तैयारी की जा रही है। सुरक्षा निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का सहारा लिया जाएगा। इसके अलावा चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती, भीड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता और स्थानीय नेटवर्क की मदद से निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। प्रशासन का फोकस केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि दर्शन व्यवस्था, आवागमन, बैरिकेडिंग, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं पर भी समान रूप से दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार का प्रयास है कि अयोध्या में होने वाले सभी आयोजन शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और गरिमामय माहौल में सम्पन्न हों। UP News

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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बढ़ेगी सहूलियत

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब यदि किसी उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर रिचार्ज करा दिया, लेकिन इसके बावजूद दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा।

यूपी में स्मार्ट मीटर पर राहत
यूपी में स्मार्ट मीटर पर राहत
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 11:54 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब यदि किसी उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर रिचार्ज करा दिया, लेकिन इसके बावजूद दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से जुड़ी इस व्यवस्था के तहत ऐसी स्थिति में 50 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि यह नियम उन उपभोक्ताओं पर लागू होगा, जिनकी बिजली स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होने के कारण कटी हो और रिचार्ज के बाद भी तय समय में आपूर्ति शुरू न की जाए। माना जा रहा है कि 13 मार्च से यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू हो सकती है, जिससे उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।

70 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था तेजी से लागू की जा रही है और इसका प्रभाव अब बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के करीब 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ता इस नियम के दायरे में आएंगे। यही नहीं, इन उपभोक्ताओं के खातों में बड़ी मात्रा में निगेटिव बैलेंस भी दर्ज बताया जा रहा है, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा अहम हो गया है। बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर रिचार्ज, बैलेंस कटने और बिजली बहाल होने में देरी जैसी समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष रहा है। ऐसे में मुआवजा व्यवस्था उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैलेंस खत्म होते ही अपने आप कट सकती है बिजली

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर प्रणाली को अब और अधिक सख्ती के साथ लागू करने की तैयारी है। बिजली विभाग के अनुसार, यदि 13 मार्च के बाद किसी उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर का बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो उसकी बिजली सप्लाई स्वतः बंद हो सकती है। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए संचालित होगी और इसके लिए बिजली कर्मचारियों को मौके पर जाकर कनेक्शन काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विभाग का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में इस नई व्यवस्था से बिजली बिलिंग से जुड़ी पुरानी दिक्कतों में कमी आएगी। गलत बिल जारी होने, औसत बिलिंग की शिकायतों और बकाया भुगतान से जुड़े विवादों को कम करने में स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम मददगार साबित हो सकता है।

अतिरिक्त वसूली पर भी उपभोक्ताओं को राहत

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को राहत देते हुए एक अहम आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए। आदेश के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया गया है, वह रकम उनके बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाई जाएगी।

बताया गया है कि यह अतिरिक्त वसूली करीब 127 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरी राहत मिलने की संभावना है UP News

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उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में फिर गूंजा इस IAS अफसर का नाम

सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 10:52 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश का नाम चर्चा में है। लंबे समय से निलंबित चल रहे 2006 बैच के इस अधिकारी की बहाली को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन वर्ष 2025 में उन पर सोलर परियोजना की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा और सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब, जब अदालत से उन्हें राहत मिली है, तो उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में क्यों फिर चर्चा में आए अभिषेक प्रकाश

अभिषेक प्रकाश की बहाली की चर्चा यूं ही नहीं उठी है। दरअसल, फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया था। अदालत की इस राहत के बाद यह माना जाने लगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अब उनके निलंबन पर पुनर्विचार कर सकती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अभिषेक प्रकाश एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आएंगे। अभी आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन संकेतों ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

क्या था रिश्वत मांगने का आरोप

पूरा मामला 20 मार्च 2025 का है। उसी दिन लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई थी, जो एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए परियोजना लागत का 5 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। मामला गंभीर था, इसलिए सरकार ने तत्काळ कार्रवाई करते हुए अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने उस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और निवेश संबंधी व्यवस्थाओं पर भी कई सवाल खड़े किए थे।

बचाव पक्ष ने क्या कहा

मामले में अभिषेक प्रकाश की ओर से पेश पक्ष ने आरोपों को पूरी तरह कमजोर और अस्पष्ट बताया। उनकी तरफ से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं थे। यह भी दलील दी गई कि न तो किसी तरह की रकम वास्तव में दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई और न ही किसी प्रकार की धमकी या दबाव का प्रमाण सामने आया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस एक करोड़ रुपये नकद की चर्चा की गई, उसकी कोई बरामदगी नहीं हुई। उनकी ओर से इस पूरे विवाद को प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक भ्रम और अपुष्ट आरोपों का परिणाम बताया गया।

हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद बदला माहौल

फरवरी 2026 में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चार्जशीट को साक्ष्य के अभाव में रद्द किया, तब इस मामले का पूरा परिदृश्य बदल गया। अदालत की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। यही कारण है कि अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप सकती है।

कौन हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश

अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 को हुआ था। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों में जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जैसे जिलों में डीएम और कलेक्टर रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने प्रशासनिक और निवेश संबंधी भूमिकाओं में महत्वपूर्ण काम किया। UP News

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