520 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने का काम करेगी। कम मोड़ों और हाई-स्पीड ट्रैक की वजह से यह मार्ग क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और यात्री परिवहन के लिए बड़ी सुविधा प्रदान करेगा।

UP News : गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। छह लेन के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक की दूरी 600 किलोमीटर से कम रह जाएगी। सीधी और बाधारहित सड़क होने के कारण यात्रा का समय घटेगा और वाहन 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे। 520 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने का काम करेगी। कम मोड़ों और हाई-स्पीड ट्रैक की वजह से यह मार्ग क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और यात्री परिवहन के लिए बड़ी सुविधा प्रदान औद्योगिक कॉरिडोर के विकास को बढ़ावाएक्सप्रेस-वे के बनने से आसपास के इलाकों में औद्योगिक गलियारों का विकास तेज होगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय व्यापार व आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी। नए प्रस्तावित एलाइनमेंट के मुताबिक यह मार्ग गोरखपुर से कुशीनगर होकर सीधे सिलीगुड़ी जाएगा। इस बदलाव के बाद देवरिया जिला रूट से बाहर हो गया है। नया रूट यात्रा को और तेज, सुरक्षित और आसान बनाएगा।
यह एक्सप्रेस-वे बिहार के जिन जिलों से होकर निकलेगा उनमें हैं पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज। पूरे मार्ग में 39 प्रखंड और 313 गांव शामिल हैं। केवल पूर्वी चंपारण में ही हाईवे 56 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना के तहत 491.12 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। पांच सदस्यीय समिति निरीक्षण और बैठक के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। यह कदम परियोजना की समयसीमा और निर्माण प्रगति को सुनिश्चित करेगा। गंडक नदी पर पुल निर्माण भी इसी हिस्से में शामिल है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत 37,500 करोड़ रुपये रखी गई है। एनएचएआई ने इसका लक्ष्य साल 2028 तक पूरा करने का तय किया है। जमीन अधिग्रहण सहित प्रारंभिक कार्य तेजी से चल रहे हैं। रास्ते में गंडक नदी पर पुल का बनना बाकी है, जिसके बनते ही इस काम में तेजी दिखाई देने लगेगी। इस एक्सप्रेसवे के बनते ही यूपी, बिहार और बंगाल में उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
करेगा।