गांव किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित है और इसे अक्सर कब्रों वाला गांव कहा जाता है। गांव का बाहरी रूप आम भारतीय गांवों जैसा ही दिखता है। कच्चे-पक्के मकान, आंगन, खेलते हुए बच्चे और चूल्हों पर रोटियाँ सेंकते हुए घर के लोग।

UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का छह पोखर गांव अपने अद्वितीय और दुखद कारण के लिए जाना जाता है। यह गांव किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित है और इसे अक्सर कब्रों वाला गांव कहा जाता है। गांव का बाहरी रूप आम भारतीय गांवों जैसा ही दिखता है। कच्चे-पक्के मकान, आंगन, खेलते हुए बच्चे और चूल्हों पर रोटियाँ सेंकते हुए घर के लोग। लेकिन जैसे ही घर के अंदर झाँकते हैं, वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला होता है। इस गांव में कुछ मुस्लिम परिवार अपने मृतक सदस्यों को दफन करने के लिए मजबूरी में अपने ही घर के आंगन या कमरों का इस्तेमाल करते हैं।
इसका मुख्य कारण यह है कि गांव में इनके समुदाय के लिए कोई आधिकारिक कब्रिस्तान नहीं है। जमीन की कमी के चलते, जब किसी की मृत्यु होती है, तो परिवार के पास विकल्प नहीं बचता और वे अपने ही घर के भीतर कब्र बनाते हैं। परिणामस्वरूप, आंगन में रोजमर्रा की जिंदगी और मौत दोनों साथ-साथ मौजूद हैं। वहीं बच्चे उसी आंगन में खेलते हैं, जहां उनके माता-पिता या अन्य रिश्तेदार हमेशा के लिए सो गए हैं।
यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़ा करती है। आखिरकार, क्या इन परिवारों को अपने मृतक सदस्यों को दफनाने के लिए न्यूनतम जमीन तक नहीं मिल पाई? छह पोखर गांव में जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों सीमित जगह के भीतर सिमट गए हैं, जो इस गांव की अलग पहचान बनाती है।