उत्तर प्रदेश की तरफ देख रहा है यह युवा वैज्ञानिक, बनाई है मिसाइल
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 03:00 AM
UP News : उत्तर प्रदेश पर हर किसी की नजर है। मध्य प्रदेश का होनहार युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा भी उत्तर प्रदेश की तरफ देख रहा है। मध्य प्रदेश के रहने वाले इस युवा वैज्ञानिक ने एक मिसाइल बना कर उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी को एक प्रस्ताव भेजा है। युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा का मानना है कि यदि उसके प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटी ने स्वीकृति प्रदान कर दी तो भारत की रक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव आ जाएगा।
युवावैज्ञानिकनेउत्तरप्रदेशकीयूनिवर्सिटीकोदियाबड़ाप्रस्ताव
मध्य प्रदेश के रहने वाले युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित IIT-BHU को एक बड़ा प्रस्ताव भेजा है। युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा ने एक ऐसी मिसाइल टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में नया अध्याय लिख सकती है। “रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल” – यानी प्रोजेक्ट RAM एक रियूजेबल मिसाइल प्रणाली है, जो लक्ष्य पर हमला करने के बाद अपने लॉन्चपैड पर खुद-ब-खुद वापस लौटने में सक्षम है। यह डबल इंजन और डबल स्टेज तकनीक से युक्त अत्याधुनिक मिसाइल है, जिसे जेट और मिसाइल के संयोजन से डिज़ाइन किया गया है।
इसकी खास बात यह है कि यह ऑटोपायलट कंट्रोल सिस्टम पर आधारित है, जो युद्ध के समय मानव हस्तक्षेप के बिना ही उच्च स्तरीय ऑपरेशन करने की क्षमता रखती है।प्रखर का कहना है कि उनकी यह मिसाइल तकनीक कम लागत में बार बार प्रयोग की जा सकती है, जिससे भारत को रणनीतिक बढ़त मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा। प्रखर अपने इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (IIT-BHU) के इनोवेशन हब के साथ मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट के स्तर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं। वह मानते हैं कि IIT-BHU के पास DRDO और ISRO के साथ काम करने का अनुभव है, जिससे उनके प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक मजबूती मिल सकती है।
कमउम्रमेंबड़ाकामकियाहैयुवावैज्ञानिकप्रखरविश्वकर्माने
मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे पलेरा के रहने वाले प्रखर विश्वकर्मा के वैज्ञानिक सफर की शुरुआत किशोरावस्था में ही हो गई थी। उन्हें 2020 में नासा का “साइंटिस्ट फॉर ए डे” अवॉर्ड मिला, ISRO द्वारा आयोजित आदित्य-एल1 क्विज के लिए सर्टिफिकेट मिला और 2023 में चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग में हिस्सा लेने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्हें जर्मनी से अंतरराष्ट्रीय स्पेस एक्सपो में भाग लेने का आमंत्रण भी मिल चुका है।
उन्होंने नेहरू विज्ञान केंद्र मुंबई, बिरला म्यूजियम कोलकाता और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में अपने इनोवेशन प्रस्तुत किए हैं।प्रखर का सपना है कि भारत सरकार, DRDO और ISRO जैसे संस्थान उनके प्रोजेक्ट को समर्थन दें ताकि यह तकनीक प्रयोगात्मक स्तर से आगे बढ़कर भारत की सुरक्षा प्रणाली का मजबूत आधार बन सके। एक छोटे से गांव से निकलकर मिसाइल तकनीक में क्रांति लाने की दिशा में कदम बढ़ाने वाले प्रखर विश्वकर्मा आज युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और आने वाले समय में भारत के रक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब प्रखर को उत्तर प्रदेश से मिलने वाले सकारात्मक सहयोग की प्रतीक्षा है। UP News