प्रयागराज में रेलकर्मियों की सतर्कता और मानवीय संवेदना ने तीन बिछड़े बच्चों को उनकी मां से मिलाने में अहम भूमिका निभाई। डीडीयू स्टेशन पर माता-पिता से बिछड़ने के बाद तीनों बच्चे गलती से भुवनेश्वर–आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हो गए थे।

नॉन-स्टॉप ट्रेन को रुकवाकर तीन बिछड़े बच्चों को मां से मिलाया, रेलकर्मियों की सतर्कता ने परिवार को लौटाई खुशियां
UP News : रेलवे स्टेशन की भीड़ में अपनों से बिछड़ जाना किसी भी परिवार के लिए भयावह स्थिति हो सकती है। लेकिन प्रयागराज मंडल के रेलकर्मियों की सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने ऐसी ही एक मुश्किल घड़ी में तीन मासूम बच्चों को उनकी मां से सुरक्षित मिलाकर इंसानियत की मिसाल पेश की। खास बात यह रही कि बच्चों को उनके परिवार से मिलाने के लिए ऐसी ट्रेन को प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर रुकवाया गया, जिसका वहां नियमित ठहराव ही नहीं है। घटना 13 सितंबर 2026 की है। एक परिवार अपने तीन बच्चों के साथ डीडीयू से मुंबई जाने के लिए गाड़ी संख्या 12321 मुंबई मेल पकड़ने स्टेशन पहुंचा था। परिवार के लोग काशी दर्शन के लिए आए थे। इसी दौरान डीडीयू स्टेशन पर तीनों बच्चे किसी तरह अपने माता-पिता से बिछड़ गए और गलती से गाड़ी संख्या 22805 भुवनेश्वर–आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हो गए।
गाड़ी संख्या 22805 के एस-6 कोच में ड्यूटी कर रहे मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा की नजर रोते-बिलखते बच्चों पर पड़ी। उन्होंने तत्काल बच्चों को संभाला और उनसे बातचीत कर उनके परिवार तथा यात्रा से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास किया। बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल प्रयागराज मंडल के कमर्शियल कंट्रोल में तैनात मिथिलेश कुमार को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही मिथिलेश कुमार ने बिना समय गंवाए संबंधित अधिकारियों और प्रयागराज छिवकी स्टेशन के कर्मचारियों को मामले की जानकारी दी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित किया गया, ताकि बच्चों को उनके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जिस ट्रेन में तीनों बच्चे सवार थे, गाड़ी संख्या 22805 का प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर नियमित ठहराव नहीं है। इसके बावजूद रेलकर्मियों ने मानवीय संवेदना को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक व्यवस्था कराई और ट्रेन को प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर रुकवाने की कार्रवाई की गई।
उधर बच्चों के परिवार को भी समन्वय के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी गई। प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर आवश्यक व्यवस्था के बाद जब मुंबई मेल वहां पहुंची और उसका ठहराव हुआ, तब तीनों बच्चों को सुरक्षित उनकी मां के सुपुर्द कर दिया गया। बच्चों को सुरक्षित पाकर मां और परिवार की चिंता खुशी में बदल गई। परिवार ने प्रयागराज मंडल के रेलकर्मियों की संवेदनशीलता, सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा रेलवे प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा और कमर्शियल कंट्रोल में तैनात मिथिलेश कुमार की तत्परता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। एक ओर देव प्रकाश वर्मा ने बच्चों की परेशानी को समय रहते पहचाना, वहीं मिथिलेश कुमार ने सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों और स्टेशन कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चों को उनके परिवार से मिलाने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की। यह घटना बताती है कि रेलवे में ड्यूटी केवल टिकट जांच या परिचालन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर रेलकर्मी यात्रियों के लिए संवेदनशील सहयोगी और संरक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। प्रयागराज मंडल रेल प्रशासन ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा, सहायता और सुविधा के लिए रेलकर्मी सदैव प्रतिबद्ध हैं। तीन मासूम बच्चों को उनकी मां से मिलाने की यह घटना रेलकर्मियों की सजगता, मानवीय संवेदनशीलता और टीमवर्क का सराहनीय उदाहरण है।
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