खंड-11 यूपीसीडा बरेली के वरिष्ठ प्रबंधक राजीव कुमार और क्षेत्रीय प्रबंधक मंसूर कटियार ने मामले की जांच की। उन्होंने पाया कि तीनों अधिकारियों ने 2013 में किसानों को 30 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया, जबकि जमीन का बैनामा नहीं कराया गया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी।

UP News : उत्तर प्रदेश के उद्योग विभाग (यूपीसीडा) के तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों पर करीब 30 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ एक वर्ष पहले एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें कहा गया कि उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में जमीन का बैनामा कराए बिना ही किसानों को मुआवजा वितरण कर दिया।
खंड-11 यूपीसीडा बरेली के वरिष्ठ प्रबंधक राजीव कुमार और क्षेत्रीय प्रबंधक मंसूर कटियार ने मामले की जांच की। उन्होंने पाया कि तीनों अधिकारियों ने 2013 में किसानों को 30 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया, जबकि जमीन का बैनामा नहीं कराया गया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी।
तीनों अधिकारियों के नेतृत्व में यूपीसीडा ने नाईपुरा खादर और फाजलपुर गौसाईं गांव की 151 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। इस अधिग्रहण के बाद उन्होंने किसानों को मुआवजा दिया, लेकिन प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई और बैनामा नहीं कराया गया। पूर्व में गजरौला औद्योगिक क्षेत्र अलीगढ़ के निर्माण खंड-4 के अधीन था। नवंबर 2023 में यह क्षेत्र बरेली के निर्माण खंड-11 में शामिल किया गया। तब से बरेली के अधिकारी ही अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक कार्य देखते हैं।
जिन जमीनों का बैनामा नहीं हुआ, उनकी खरीद फरोख्त रोकने के लिए यूपीसीडा ने डीएम से आवेदन किया। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने एडीएम वित्त एवं राजस्व को निर्देश दिए, जिसके बाद तहसील के सब रजिस्ट्रार को 152 एकड़ जमीन के बैनामा पर रोक लगाने का आदेश दिया गया। पूर्व में गजरौला औद्योगिक क्षेत्र अलीगढ़ के निर्माण खंड-4 के अधीन था।