टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में उत्तर प्रदेश की राधा और बबीता की कथित भूमिका सामने आई है। जानिए अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने, गिरफ्तारियों और पुलिस जांच से जुड़े बड़े अपडेट।

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले ने अब उत्तर प्रदेश तक जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस सनसनीखेज मामले में उत्तर प्रदेश की दो हसीनाओं (युवतियों)—राधा और बबीता—की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस हथियारों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश की दोनों हसीनाओं पर आरोप है कि उन्होंने ट्रेन के जरिए पिस्टल और कारतूस मुंबई पहुंचाए थे। इस मामले में अब तक सामने आई गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा बढ़कर 10 आरोपियों तक पहुंचने की खबर है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश की इन दोनों हसीनाओं को हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी कैसे मिली, हथियार कहां से आए और मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें किसके हवाले किया गया? पुलिस इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।
जानकारी के मुताबिक, राधा उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की रहने वाली हैं, जबकि बबीता का संबंध उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से है। दोनों की पहचान उस नेटवर्क की कड़ी के रूप में हुई है, जिसकी जांच अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के बाद की जा रही है। पुलिस के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत निवासी कुणाल की राधा से जान-पहचान थी। आरोप है कि कुणाल ने राधा को हथियार मुंबई पहुंचाने के काम में शामिल किया और राधा अपने साथ बबीता को भी ले गईं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों को इस काम के लिए किसने तैयार किया और उन्हें नेटवर्क के अन्य सदस्यों से किस तरह जोड़ा गया। यह भी बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की इन दोनों हसीनाओं को मुंबई तक हथियार पहुंचाने के बदले नगद धनराशि भी दी गई थी।
जांच में सामने आए पुलिस के दावों के अनुसार, इस मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी अमृतसर से जुड़ी है। आरोप है कि कुणाल और सुमित वहां से एक पिस्टल और 20 कारतूस लेकर आए थे। हथियार किस स्थान से उठाना है, इसके लिए पहले से तय जगह और संपर्क माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस की जांच के अनुसार, 15 अक्टूबर को राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए रवाना किया गया। आरोप है कि पिस्टल राधा के बैग में रखी गई थी। इस दौरान कुणाल एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क में था और निर्देश आगे पहुंचा रहा था। 17 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की ये दोनों हसीनाएं मुंबई के दादर इलाके में पहुंचीं और एक होटल में ठहरीं। पुलिस के अनुसार, उसी दिन होटल के पास एक नाबालिग लड़का आया और राधा से बैग लेकर चला गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बैग लेने वाला लड़का कौन था और हथियार आगे किसके पास पहुंचा।
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई थी। मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने कार पर गोलियां चलाईं थी। इस घटना में अभिनेता को चोट नहीं आई, जबकि उनके चालक और एक राहगीर के घायल होने की खबर सामने आई। फायरिंग के बाद पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान राजस्थान के कोटा से तीन कथित शूटरों को पकड़े जाने की खबर आई। इसके बाद जांच हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों, कथित मददगारों और हमलावरों के संपर्कों तक पहुंची। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों के भागने की योजना क्या थी और इसमें किस-किस ने मदद की।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अक्टूबर को राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा। इसी कार्रवाई में सोनीपत के कुणाल और सुमित को भी गिरफ्तार किया गया। बाद में मुंबई पुलिस की टीम ने मामले में पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आरोपियों को अपने कब्जे में लिया। राधा और बबीता मुंबई से दिल्ली लौट रही थीं। पुलिस अब उनके यात्रा विवरण, संपर्कों, कथित लेनदेन और हथियार सौंपने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पुलिस को केवल फायरिंग करने वालों की पहचान तक सीमित नहीं रहना है। जांच का उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना भी है, जिन्होंने कथित तौर पर हथियारों की व्यवस्था की, उन्हें एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया और हमलावरों को मदद उपलब्ध कराई।
21 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, मामले में आरोपियों की संख्या बढ़कर 10 तक पहुंचने की जानकारी दी गई। जांच में अलग-अलग लोगों की कथित भूमिकाएं सामने आई हैं।
पुलिस इन सभी कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग की साजिश किस स्तर पर तैयार हुई और इसमें शामिल लोगों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा कैसे किया गया।
इस मामले में कुछ गैंग कनेक्शन भी जांच का अहम हिस्सा है। अनिल पंडित नाम के व्यक्ति और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क का उल्लेख भी सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की व्यवस्था किसके निर्देश पर हुई और फायरिंग की घटना के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
राधा और बबीता के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने के कारण इस मामले की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू उनके स्थानीय संपर्कों और पृष्ठभूमि से भी जुड़ता है। पुलिस यह पता लगा सकती है कि दोनों का कथित नेटवर्क से संपर्क कब और कैसे बना, उन्हें हथियार पहुंचाने के लिए किसने तैयार किया और क्या इस काम में दूसरे लोग भी शामिल थे। साथ ही, यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि हथियारों की आवाजाही के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल क्यों किया गया और मुंबई में बैग लेने वाले व्यक्ति की पहचान क्या है। इन सवालों के जवाब सामने आने से कथित सप्लाई नेटवर्क की संरचना और उसके काम करने के तरीके को समझने में मदद मिल सकती है।
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग का मामला अब केवल तीन कथित हमलावरों तक सीमित नहीं रह गया है। हथियारों की कथित सप्लाई, रेकी, संपर्कों और घटना के बाद भागने में मदद से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। उत्तर प्रदेश की राधा और बबीता इस मामले में इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि पुलिस के आरोपों के अनुसार दोनों ने हथियार मुंबई पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन जांच में सामने आए आरोप और अदालत में साबित होने वाले अपराध के बीच अंतर है। दोनों महिलाओं की वास्तविक भूमिका, उनके इरादे और अन्य आरोपियों से उनके संबंधों की अंतिम तस्वीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमृतसर से निकली पिस्टल मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग तक कैसे पहुंची और इस पूरी कड़ी के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे? मुंबई पुलिस की जांच से आने वाले अगले खुलासे इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।
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