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दिल्ली को आगरा से जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे में गिना जाता है। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को वर्ष 2012 में लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था।

UP News : दिल्ली को आगरा से जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे में गिना जाता है। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को वर्ष 2012 में लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। लेकिन 13 साल बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब टोल लगातार बढ़ता गया और हजारों करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी, तो फिर सड़क सुरक्षा और सुविधाओं की हालत क्यों नहीं सुधरी? रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा टोल वसूला जा चुका है। इस दौरान कार और जीप के लिए टोल दरों में लगभग 41 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। बावजूद इसके, हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यात्रियों का आरोप है कि टोल बढ़ाने के पीछे बेहतर रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। UP News
यमुना एक्सप्रेसवे को हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन यही तेज रफ्तार अब हादसों की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार यहां औसतन हर तीसरे दिन एक व्यक्ति की मौत हो रही है। सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं ओवरस्पीड, ड्राइवर को झपकी आने और घने कोहरे की वजह से होती हैं। रात के समय जब तेज रफ्तार वाहन नियंत्रण खो देते हैं, तब हादसे बेहद भयावह हो जाते हैं। UP News
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े एक्सप्रेसवे की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
* 2017 में 1426 हादसे और 146 मौतें
* 2018 में 1388 हादसे और 111 मौतें
* 2019 में 1302 हादसे और 195 मौतें
* 2020 में 509 हादसे और 122 मौतें
* 2021 में 958 हादसे और 136 मौतें
* 2022 में 668 हादसे और 106 मौतें
* 2023 में 729 हादसे और 95 मौतें
* 2025 में 955 हादसे और 112 मौतें दर्ज की गईं।
वहीं 2026 के शुरुआती आंकड़े भी डराने वाले हैं। अब तक 1398 हादसे और 128 मौतें सामने आ चुकी हैं। UP News
यात्रियों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर भारी टोल वसूली के बावजूद हादसे रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। शुरुआती दौर में कारों के लिए टोल करीब 2.10 रुपये प्रति किलोमीटर था, जो अब लगभग 2.95 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है। इसके बावजूद कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर नजर आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेतावनी बोर्ड या मॉनिटरिंग से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए हाई-स्पीड कंट्रोल सिस्टम, बेहतर पेट्रोलिंग, ड्राइवर अलर्ट टेक्नोलॉजी और सख्त निगरानी की जरूरत है। एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए कई सुविधा केंद्र भी सवालों के घेरे में हैं। खासकर जेवर के पास स्थित सुविधा केंद्र को लेकर यात्रियों ने कई शिकायतें की हैं। लोगों का कहना है कि यहां साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है। शौचालयों में गंदगी, टूटी टाइल्स और रखरखाव की कमी साफ दिखाई देती है। कई यात्रियों ने पीने के पानी और बैठने की उचित व्यवस्था न होने की शिकायत भी की है। UP News
यमुना एक्सप्रेसवे पर सबसे बड़ी समस्याओं में से एक अवैध प्रवेश भी है। कई जगहों पर लोग रेलिंग के नीचे से बाइक और छोटे वाहन एक्सप्रेसवे पर चढ़ा लेते हैं। इतना ही नहीं, कई बार ट्रैक्टर-ट्रॉली और धीमी गति वाले वाहन भी हाई-स्पीड लेन में दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार से आने वाले वाहनों के लिए यह बेहद खतरनाक स्थिति पैदा करता है। यात्रियों का कहना है कि अवैध एंट्री रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और लगातार पेट्रोलिंग बेहद जरूरी है। साथ ही कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट की कमी भी रात के समय जोखिम बढ़ाती है।
मामले में यमुना एक्सप्रेसवे के सहायक प्रबंधक जेपी सिंह का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे पर एंबुलेंस, फायर सेफ्टी वाहन और क्रेन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि ड्राइवरों को झपकी से बचाने के लिए कई स्थानों पर रबर स्ट्रिप्स लगाई गई हैं और रात में यात्रियों के लिए चाय व विश्राम की भी व्यवस्था की जाती है। UP News
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