“इश्क़ पर ज़ोर नहीं…ग़ालिब के वो 5 शेर जो सीधे दिल में उतरते हैं

ग़ालिब की पहचान सिर्फ़ ग़ज़लों तक सीमित नहीं; उनके ख़त (पत्र) उर्दू गद्य की नई भाषा, नया लहजा और नई सोच गढ़ते हैं इसलिए उन्हें उर्दू लेखन की अहम दस्तावेज़ी विरासत माना जाता है। भारत और पाकिस्तान दोनों में ग़ालिब का मुक़ाम बराबर ऊँचा है।

ग़ालिब की शायरी

ग़ालिब की शायरी

locationउत्तर प्रदेश
userAbhijeet Yadav
calendar27 Dec 2025 09:22 AM
bookmark

विज्ञापन

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें
चेतना दृष्टि
चेतना दृष्टि