जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने के कई दिन बाद भी पार्टी के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ रही है। ताजा मामला सपा के जिला कार्यालय से जुड़ा है, जहां बाहर लगा साइन बोर्ड संदिग्ध हालात में फटा हुआ मिला। यह बोर्ड पटेल चौक के पास डिवाइडर पर लगाया गया था, जिस पर निवर्तमान जिलाध्यक्ष का नाम और पद दर्ज था।

UP News : बरेली में समाजवादी पार्टी की संगठनात्मक उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने के कई दिन बाद भी पार्टी के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ रही है। ताजा मामला सपा के जिला कार्यालय से जुड़ा है, जहां बाहर लगा साइन बोर्ड संदिग्ध हालात में फटा हुआ मिला। यह बोर्ड पटेल चौक के पास डिवाइडर पर लगाया गया था, जिस पर निवर्तमान जिलाध्यक्ष का नाम और पद दर्ज था। जैसे ही फटे हुए बोर्ड की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, पार्टी के स्थानीय नेताओं में हलचल मच गई। विवाद बढ़ता देख कुछ ही घंटों के भीतर उसी स्थान पर नया फ्लैक्स बोर्ड लगवा दिया गया।
हालांकि, नए बोर्ड में इस बार किसी भी नेता का नाम या पद नहीं लिखा गया है। केवल पार्टी कार्यालय का पता, मिशन कंपाउंड स्थित लोहिया भवन और समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न साइकिल अंकित किया गया है। इसी बदलाव ने अंदरूनी राजनीति को और हवा दे दी है। गौरतलब है कि 19 जनवरी को सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने बरेली की जिला कार्यकारिणी को भंग करने का आदेश दिया था। इसके बाद से महानगर संगठन की अगुवाई में कार्यालय में बैठकों का सिलसिला तो जारी रहा, लेकिन पुराने बोर्ड को नहीं हटाया गया था। यही बात कई नेताओं को अखर रही थी।
अब पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि निवर्तमान जिलाध्यक्ष का नाम हटाने के उद्देश्य से जानबूझकर बोर्ड को नुकसान पहुंचाया गया और बाद में परिस्थितियों को संभालने के लिए नया बोर्ड लगवा दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद हालात ऐसे बन गए हैं कि कई नेता खुद को अनौपचारिक रूप से जिलाध्यक्ष की भूमिका में पेश करने लगे हैं। कुछ पदाधिकारी संगठन में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए लखनऊ तक सक्रिय हो गए हैं और राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नई जिला कार्यकारिणी का गठन राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुशंसा पर ही किया जाएगा।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप ने कहा कि वह उत्तराखंड में एक धार्मिक स्थल पर दर्शन के लिए गए हुए हैं और उन्हें बोर्ड से जुड़ी किसी घटना की जानकारी नहीं है। वहीं, महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी का कहना है कि किसी शरारती तत्व ने बोर्ड को नुकसान पहुंचाया होगा। सूचना मिलते ही शाम तक नया बोर्ड लगवा दिया गया। कुल मिलाकर, एक साधारण से साइन बोर्ड का विवाद सपा की स्थानीय राजनीति में गहराते मतभेदों और नेतृत्व संकट को उजागर कर रहा है। जब तक नई कार्यकारिणी की घोषणा नहीं होती, तब तक इस तरह की राजनीतिक खींचतान जारी रहने के आसार बने हुए हैं।