‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा को भारत और खास तौर पर उत्तर प्रदेश की पहचान बताते हुए सीएम योगी ने जोर दिया कि अगर हम सच में पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं, तो सबसे पहले बच्चों पर पढ़ाई और प्रतिस्पर्धा का अनावश्यक बोझ कम करना होगा, ताकि वे स्वस्थ मन के साथ बेहतर इंसान और जागरूक वैश्विक नागरिक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर दुनिया भर के केंद्र में है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इन दिनों दुनियाभर के न्यायिक व्यवस्था से जुड़े बुद्धिजीवी मौजूद है। लखनऊ में हो रहे है इस आयोजन में दुनियाभर के चीफ जस्टिस पहुंचे है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (ICCJW) की शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश की रजधानी लखनऊ में आयोजित 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (ICCJW) के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुनिया के नाम एक साफ संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा, संवाद और न्याय ही वे तीन मूल हथियार हैं, जिनसे वैश्विक चुनौतियों का मोर्चा मजबूती से लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, वैश्विक आतंकवाद और बार–बार सामने आने वाले स्वास्थ्य संकट जैसी समस्याएँ सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संवेदनशील न्याय व्यवस्था और सतत संवाद की संस्कृति से हल होंगी। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा को भारत और खास तौर पर उत्तर प्रदेश की पहचान बताते हुए सीएम योगी ने जोर दिया कि अगर हम सच में पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं, तो सबसे पहले बच्चों पर पढ़ाई और प्रतिस्पर्धा का अनावश्यक बोझ कम करना होगा, ताकि वे स्वस्थ मन के साथ बेहतर इंसान और जागरूक वैश्विक नागरिक बन सकें।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा को भारत की ही नहीं, बल्कि आज के नए वैश्विक विमर्श की भी पहचान बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन जीवन-दृष्टि आज उत्तर प्रदेश की नीतियों और प्राथमिकताओं में भी दिखती है, जहां समावेशी विकास, सामाजिक सौहार्द और न्याय को शासन की मूल सोच में रखा गया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा - जब दुनिया के कई हिस्से संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता से घिरे हों, तो सतत विकास की बातें कागज़ पर अच्छी लग सकती हैं, लेकिन ज़मीन पर परिणाम के लिए हमें शिक्षा और संवाद की शरण में ही जाना होगा। शिक्षा ही वह साधन है जो मनुष्य को जोड़ती है, समझ पैदा करती है और न्याय के प्रति संवेदनशील बनाती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक स्तर पर शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया भर में करीब 250 करोड़ से अधिक बच्चे अभी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्रतीक्षा में हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर भविष्य की पीढ़ी पर हम बस्ते और मानसिक दबाव का अत्यधिक बोझ डालते रहेंगे, तो वे रचनात्मक नागरिक नहीं बन पाएंगे। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नई शिक्षा नीति और स्कूली सुधारों के जरिए बच्चों पर अनावश्यक बोझ कम करने और कौशल–आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उद्घाटन सत्र में सीएम योगी ने नई तकनीकों के दोहरे स्वरूप पर भी बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल टूल्स ने जहां आम जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी खड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा - ऐसे समय में सिर्फ ताकत या तकनीक नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून ही दुनिया को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। उत्तर प्रदेश ने भी कानून-व्यवस्था और तकनीक आधारित पुलिसिंग के ज़रिए यह संदेश दिया है कि विकास और सुरक्षा साथ–साथ चल सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए आगाह किया कि किसी भी संकट को सिर्फ एक देश या एक प्रदेश तक सीमित मानना भारी भूल है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया समस्याओं को नज़रअंदाज़ करती रही, तो वे किसी न किसी रूप में हर समाज को प्रभावित करेंगी। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश ने ‘टीका, टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रस्ट’ के मॉडल के जरिए न सिर्फ अपने नागरिकों की रक्षा की, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, लखनऊ द्वारा आयोजित इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कई देशों के मुख्य न्यायाधीश, वरिष्ठ न्यायविद, राजनयिक और छात्र प्रतिनिधि शामिल हुए। मंच पर बच्चों ने मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) के ज़रिए वैश्विक संकटों पर अपने सुझाव रखे और शांति, जलवायु न्याय तथा मानवाधिकारों पर युवा दृष्टिकोण पेश किया। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीएमएस के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बैठकर विश्व–शांति और वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना को साकार करने का जो सपना डॉ. गांधी ने देखा था, आज उत्तर प्रदेश उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।