
UP News : उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में धार्मिक प्रवचन करने आए कथावाचकों पर जातीय पहचान छिपाने और महिला से छेड़खानी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला अब तूल पकड़ चुका है, क्योंकि इन कथावाचकों को हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में सम्मानित भी किया था। गांव की महिलाओं ने अब खुलकर इन कथावाचकों पर आरोप लगाए हैं और पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
गांव की रेनू तिवारी और उनके पति जयप्रकाश तिवारी ने मंगलवार देर शाम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव से मिलकर कथावाचकों के खिलाफ छेड़खानी की लिखित शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कथावाचक ने न सिर्फ अभद्रता की, बल्कि फर्जी आधार कार्ड के ज़रिए खुद को ब्राह्मण बताकर ग्रामीणों को भ्रमित किया।
ब्राह्मण समाज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण दुबे ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह एक सुनियोजित प्रयास है, जिसमें कथावाचक जाति बदलकर समाज को धोखा दे रहे हैं। ये लोग पहले खुद को ब्राह्मण बताकर धार्मिक मंचों पर पहुंचे, फिर मंच से मर्यादा को तार-तार किया।
रेनू तिवारी ने बताया, “ये लोग हमारे गांव में कथा कहने आए थे। पहले दिन की कथा के बाद जब भोजन चल रहा था, उस समय एक कथावाचक ने मेरी अंगुली पकड़कर अशोभनीय हरकत की। मैंने तुरंत पति को सूचना दी। गांव के लड़के भड़क उठे और माहौल तनावपूर्ण हो गया।” पीड़िता के पति जयप्रकाश तिवारी, जो हरिद्वार में प्राइवेट नौकरी करते हैं, ने दावा किया कि कथावाचकों ने खुद को यादव बताया और धमकी दी कि "हमारे संबंध अखिलेश यादव से हैं, हम तुम्हें घर से उठवा लेंगे।” उनका कहना है कि तब जाकर असली पहचान का अंदाज़ा हुआ।
जयप्रकाश तिवारी ने यह भी कहा कि कथावाचकों के पास जो आधार कार्ड सामने आए हैं, उनमें एक ही फोटो है, पर नाम अलग-अलग हैं—यह सीधा फर्जीवाड़े का मामला है। SSP बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पीड़िता ने जो बातें कही हैं, उन पर जांच चल रही है। आधार कार्ड की वैधता, जातीय पहचान और अभद्रता के आरोपों की विवेचना की जा रही है। सच्चाई के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। UP News