जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग नारायण सिंह की अदालत ने नगर पालिका परिषद गोंडा के पूर्व अध्यक्ष निर्मल श्रीवास्तव उर्फ रुपेश कुमार और उनके सह अभियुक्त त्रियुगी नारायण गुप्ता को दोषी मानते हुए 15-15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में वर्ष 2012 में हुए हत्या के प्रयास के एक चर्चित मामले में अदालत ने 13 साल बाद अपना निर्णय सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग नारायण सिंह की अदालत ने नगर पालिका परिषद गोंडा के पूर्व अध्यक्ष निर्मल श्रीवास्तव उर्फ रुपेश कुमार और उनके सह अभियुक्त त्रियुगी नारायण गुप्ता को दोषी मानते हुए 15-15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माने की कुल राशि का आधा हिस्सा पीड़ित को मुआवजे के रूप में प्रदान किया जाएगा।
अभियोजन के अनुसार, मोतीगंज थाना क्षेत्र के काजीदेवर गांव निवासी और वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य सुशील कुमार शुक्ला ने 11 सितंबर 2012 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि एक दिन पहले रात के समय उनके छोटे भाई गौरव शुक्ला पर बाइक सवार दो हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से हमला किया। इस हमले में गौरव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान गोंडा के राजा मोहल्ला निवासी निर्मल श्रीवास्तव और रानी बाजार की सुनार गली निवासी त्रियुगी नारायण गुप्ता को आरोपी बनाया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और शनिवार को सजा का ऐलान किया। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला पंचायत सदस्य सुशील कुमार शुक्ला ने कहा कि अदालत का यह निर्णय न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को मजबूत करता है और पीड़ित परिवार को आखिरकार इंसाफ मिला है।