प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को यूजीसी के नए नियमों को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई। सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ता इन नियमों के विरोध में सीधे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पहुंच गए और जोरदार विरोध दर्ज कराया।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को यूजीसी के नए नियमों को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई। सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ता इन नियमों के विरोध में सीधे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पहुंच गए और जोरदार विरोध दर्ज कराया। हालांकि, स्थिति तब बदली जब डिप्टी सीएम ने खुद सामने आकर प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित किया।
सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ता यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए नारेबाजी कर रहे थे। माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन जैसे ही ब्रजेश पाठक आवास से बाहर आए, उन्होंने हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया। उनके इस कदम ने माहौल को तुरंत शांत कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अंदर बुलाया और बैठाकर विस्तार से बातचीत की। यह संवाद काफी देर तक चला, जिसमें मोर्चा के पदाधिकारियों ने अपनी चिंताएं खुलकर रखीं।
मोर्चा के नेताओं का कहना है कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में सवर्ण छात्रों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि ये नियम पहले से मौजूद कानूनी प्रावधानों के बावजूद एकतरफा दबाव बना सकते हैं। नेताओं ने आशंका जताई कि अगर इन नियमों का दुरुपयोग हुआ, तो निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए साफ कहा कि इस तरह के नियम किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
बैठक के दौरान ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को केंद्र स्तर तक उठाएंगे और सवर्ण समाज की चिंताओं को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।
बैठक के बाद मोर्चा के नेताओं पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी, संदीप सिंह और बसंत सिंह बघेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब तक ये नियम पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि ऐसे नियमों को लाने की जरूरत क्यों पड़ी। फिलहाल लखनऊ में तत्काल तनाव कम हो गया है, लेकिन पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर असंतोष बना हुआ है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और यूजीसी के अगले कदम पर टिकी है।
डिप्टी सीएम के नरम और संवादात्मक रवैये ने हालात को संभाल लिया, लेकिन यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।