Umesh Pal Murder Case : माफिया अतीक और उसके गुर्गों को कौन सी सजा ? उम्रकैद या फांसी ?
Umesh Pal Murder Case: What is the punishment for Mafia Atiq and his henchmen in Umesh Pal kidnapping case
भारत
चेतना मंच
28 Mar 2023 05:18 PM
Umesh Pal Murder Case : प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज की एमपी एमएलए कोर्ट में मंगलवार को उमेश पाल किडनैपिंग केस का फैसला सुनाया जायेगा। इस मामले को लेकर प्रयागराज ही नहीं बल्कि पूरे देश और प्रदेश में सरगर्मी बढ़ी हुई है। जानकारी के मुताबिक, 12 बजे के बाद माफ़िया अतीक़ अहमद और उसके भाई अशरफ को कोर्ट में हाजिर किया जाएगा। हालांकि, एक सवाल और उठ रहा है कि क्या सभी आरोपियों को हाजिर किया जाएगा। क्योंकि जो आरोपी पहले से जेल में हैं उन 3 आरोपियों अतीक अहमद,असरफ व फरहान को तो पुलिस कोर्ट में हाजिर कर देगी। लेकिन बाकी के 7 आरोपियों को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है।
Umesh Pal Murder Case :
फरार हैं अन्य आरोपी
बता दें कि किडनैपिंग का मुकदमा उमेश पाल ने प्रयागराज के धूमनगंज थाने में 5 जुलाई 2007 को लिखवाया था। उस एफआईआर में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद, भाई अशरफ, दिनेश पासी, अंसार अहमद उर्फ अंसार बाबा, खान सौलत हनीफ, जावेद, फरहान, इसरार, आबिद प्रधान, आशिक उर्फ मल्ली और एजाज अख्तर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं इस मामले में एक आरोपी अंसार अहमद उर्फ अंसार बाबा की मौत हो चुकी है।
अतीक अहमद का वकील भी हैं आरोपी
उमेश पाल किडनैपिंग केस में अतीक अहमद के सबसे खास वकील खान सौलत हनीफ भी आरोपी हैं। अधिकांश मौकों पर कोर्ट कचहरी में उन्हें अतीक अहमद व उनके परिजनों के साथ देखा जाता रहा है। अबतक जिस कोर्ट में जज के सामने खान शौकत हनीफ बहस करते थे वो आज स्वयं आरोपियों के कटघरे में खड़े होंगे? वहीं मरियाडीह के पूर्व प्रधान आदिब को प्रयागराज पुलिस ने स्वयं अतीक अहमद गैंग चार्ट से हटा दिया है। हालाकिं उसके ऊपर दर्जनों मुकदमें दर्ज हैं। लेकिन पुलिस रिकार्ड के हिसाब से अब वह अपराधी नहीं है। क्या अब पुलिस आबिद प्रधान को हाजिर अदालत कर पायेगी।
28 फरवरी 2006 को हुई थी किडनैपिंग
प्रयागराज में 25 जनवरी 2005 को बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल का 28 फरवरी 2006 को अपहरण हुआ था। तहरीर के मुताबिक अतीक अहमद ने धूमनगंज थाना क्षेत्र के फांसी इमली के पास लैंड क्रूजर गाड़ी से उमेश पाल को किडनैप कराया था। बाद में उमेश पाल से अपने पक्ष में बयान दिलवाया कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और किसी तरह की गवाही नहीं देना चाहता है।
एक साल बाद दर्ज कराया मुकदमा
यूपी में सपा की सरकार और अतीक के सत्ताधारी पार्टी के सांसद होने की वजह से उस वक्त उमेश पाल की एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। जब सूबे में बसपा सरकार बनी तब उमेश पाल ने 5 जुलाई 2007 को धूमनगंज थाने में स्वयं के अपहरण का केस दर्ज कराया था।