
Unique Library : विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षा के केंद्र दारुल उलूम देवबंद ने हिंदुस्तान को ऐतिहासिक इमारतें, विश्वस्तरीय उलेमा, उच्चकोटि के मुफ्ती व बेजोड़ वक्ताओं के साथ-साथ देश को सर्वश्रेष्ठ पुस्तकालय भी दिया है। दारुल उलूम में स्थित यह देश का पहला ऐसा पुस्तकालय है जिसको न तो सरकारी सहायता प्राप्त है और न ही संस्था की ओर से इसके लिए कोई बजट निर्धारित है।
दारुल उलूम देवबंद के इस ऐतिहासिक पुस्तकालय में करीब डेढ़ लाख पुस्तकें मौजूद है, जिनमें अधिक संख्या उन पुस्तकों की है जिनको विभिन्न समुदाय के लोगों ने संस्था को दान स्वरूप भेंट किया है। इस पुस्तकालय में 17 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध है। इनमें अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, पंजाबी, तेलगू, तमिल, फ्रांसीसी, बंगला, तुर्की, मलयालम, मराठी, सिंधी और बरमी भाषाएं शामिल है। इस पुस्तकालय में हस्तलिखित पुस्तकों की भी बड़ी संख्या मौजूद है। जो फन्नेखताती (हस्तलिखित कला) का सर्वोच्च उदाहरण है। 800-900 वर्षों पुराने राजा-महाराजाओं, नवाबों और बादशाहों के शासन काल में लिखी गई हस्तलिखित ऐतिहासिक पुस्तकें इस पुस्तकालय की गरिमा बढ़ा रही है। प्रमुख मुगल सम्राट औरंगजेब व आलमगीर द्वारा लिखित कुरान शरीफ, कुंदन लाल सिकंदराबादी द्वारा लिखित अमीरनामा और सुल्तान सिंह द्वारा लिखित गुलिस्तां शेख सादी यहां मौजूद है। वर्तमान में करीब हजारों छात्र यहां नि:शुल्क पुस्तक वाचन सुविधा प्राप्त कर रहे है। इसी पुस्तकालय से प्रत्येक छात्र को सत्र के आरंभ में पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है जो कि सत्र की समाप्ति पर वापिस ले ली जाती है। दारुल उलूम के इस ऐतिहासिक पुस्तकालय के महत्व का अंदाजा आप यूं भी लगा सकते है कि अरब देशों, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित विश्वभर के शोधकर्ता इस्लाम धर्म के विषयों पर शोध करने के लिए समय-समय पर पुस्तकालय से संपर्क करते रहते है। देश के कोने-कोने से भी शोध करने वालों का तांता यहां लगा रहता है। वर्तमान में यहां केवल कुरान शरीफ के विभिन्न 17 पहलुओं पर हजारों किताबें उपलब्ध है।
तीन बडे हाल व 12 कमरों का है पुस्तकालय पुस्तकालय तीन बड़े हॉल और 12 छोटे-बड़े कमरों में स्थापित है। एक हॉल में केवल अरबी और एक हॉल में उर्दू की पुस्तकें सजाई गई है। एक अन्य कमरे में अनमोल व नायाब पुस्तकों को संजोया गया है। इसके अतिरिक्त एक कमरे में दारुल उलूम के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों द्वारा विभिन्न विषयों पर लिखी गई पुस्तकों को खूबसूरत अलमारियों में नाम सहित रखा गया है। इन विद्वानों में हजरत मौलाना कासिम नानौतवी, अल्लामा अनवर शाह कश्मीरी, मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी, मौलाना अशरफ अली थानवी, अल्लामा शब्बीर अहमद उस्मानी और मौलाना फखरुल हसन गंगोही प्रमुख है।
पुस्तकालय का नया भवन भी तैयार पुस्तकों और अवलोकन के लिए आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दारुल उलूम की सर्वोच्च खंडपीठ मजलिस-ए-शूरा ने कुछ वर्ष पूर्व पुस्तकालय के नये भवन का प्रस्ताव पारित किया था। जिसके बाद लाईब्रेरी के नए भवन का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है तथा बाब-ए-जाहिर गेट के सामने बनने वाली सात मंजिला आलीशान पुस्तकाल की इमारत के करीब छह मंजिलें तैयार भी हो चुकी है।