उत्तर प्रदेश के घोसी लोकसभा में GNNM का अनोखे अंदाज में चुनाव प्रचार
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:12 AM
2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारीयां चान्दनी चौक की गलियों से लेकर देशभर में, राजनीतिक पार्टियां उत्साह से कर् रही हैं, गठबंधनों की रचना से लेकर सोशल इंजीनियरिंग तक के विचारों पर काम कर रही हैं। इसी समय, उत्तर प्रदेश के घोसी लोकसभा क्षेत्र में 'घोसी नव निर्माण मंच (GNNM) नामक संगठन ने दीवारों पर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पोस्टर वॉर की शुरुआत की है।
बदहाली के लिए बाहरी नेता जिम्मेदार
इस मंच के पोस्टरों पर नीले, हरे, और भगवा रंगों के बैकग्राउंड में दिखाई जा रही हैं और इनमें से एक पोस्टर पर सांसद कल्पनाथ राय की फोटो है। इसमें लिखा है, "मां लक्ष्मी से प्रार्थना है कि 2024 में घोसी की बदहाली के लिए जिम्मेदार बाहरी और निरंकुश तत्वों से मुक्ति दिलाएं। क्षेत्रीय नेतृत्व और इलाके के वैभव का आशीर्वाद दें।" ये पोस्टर और बैनर उत्तर प्रदेश के लोगों से जाति, धर्म, और दलीय भावनाओं को पार करके, स्थानीय सांसद के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील कर रहे हैं।
GNNM का स्थानीय मुद्दों पर बल
घोसी नव निर्माण मंच को घोसी लोकसभा के सजग लोगों ने बनाया है, जो 2024 के चुनाव से पहले अपने क्षेत्र के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
संगठन के संस्थापक बद्री नाथ बता रहे हैं कि हर जाति-धर्म के लोग संगठन के साथ जुड़े हैं और टीम हर गाँव में जा रही है, जहां वे लोगों से जाति-धर्म के परे, विकास के मुद्दों पर एकता की बातचीत कर रहे हैं।
इस संगठन की मुख्य मांग है कि चुनावों में कोई भी स्थानीय नेता नहीं मिला है और बाहरी नेताओं को इस इलाके में दबदबा रहा हैं जिससे स्थानीय मुद्दे नजर अंदाज़ रहे हैं। बद्री नाथ प्रशांत किशोर के साथ काम कर चुके हैं। बद्री नाथ यह दावा कर रहे हैं कि घोसी का पीछे होने का मुख्य कारण यह है कि बाहरी नेता जीत के बाद इस इलाके में सकारात्मक रूप से ध्यान नहीं देते हैं, जबकि स्थानीय नेता लोगों के बीच अधिक सकारात्मक क्रियाओं में लगे रहते हैं।
मिस्ड कॉल से जुड़ रहे हैं लोग
घोसी नव निर्माण मंच के अनुसार, अब तक 62,000 से अधिक लोगों ने मिस्ड कॉल अलर्ट के माध्यम से अपना समर्थन दिखाया है। मिस्ड कॉल साथ ही, फेसबुक पर भी 22,000 से अधिक लोगों ने इस संगठन से जुड़े हैं।
स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ना मुख्य लक्ष्य
बैनर उत्तर प्रदेश के लोगों से जाति, धर्म, और दलीय भावनाओं को पार करके, स्थानीय सांसद के मुद्दों पर चुनाव लड़ने पर जोर दिया गया है।