उसका दावा है कि आदेश सुनाए जाने के वक्त वह मां के साथ कोर्ट में मौजूद थी और उसने विरोध भी किया, लेकिन उसकी आवाज अदालत की कार्रवाई में कहीं दबकर रह गई “हमारी बात किसी ने नहीं सुनी।

UP News : उत्तर प्रदेश के चर्चित उन्नाव दुष्कर्म मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता की पीड़ा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। फैसले के साथ ही परिवार के भीतर डर लौट आया है जैसे न्याय की इमारत के दरवाज़े पर ही सुरक्षा की दीवार ढह गई हो। पीड़िता ने फोन पर रोते हुए कहा, “आज जमानत मिली है… कल घर छिन जाएगा… फिर मार दिया जाएगा।” उसका दावा है कि आदेश सुनाए जाने के वक्त वह मां के साथ कोर्ट में मौजूद थी और उसने विरोध भी किया, लेकिन उसकी आवाज अदालत की कार्रवाई में कहीं दबकर रह गई “हमारी बात किसी ने नहीं सुनी।
पीड़िता की आवाज बार-बार भर्रा रही थी। उसने कहा कि वह कई बार आत्महत्या के बारे में सोच चुकी है, लेकिन दो छोटे बच्चों की वजह से हिम्मत नहीं जुटा पाती। “मैं चली गई तो बच्चों का क्या होगा?” पीड़िता का कहना है कि जमानत का आदेश उनके लिए किसी सजा से कम नहीं, क्योंकि अब डर और दबाव बढ़ गया है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पहले उनके परिवार, पैरोकार और गवाहों की सुरक्षा में ढील हुई, अब जमानत ने संकट और गहरा कर दिया है। “सेंगर बाहर आए तो जीना हराम हो जाएगा… खुले में नहीं रह पाएंगे,” पीड़िता ने कहा। पीड़िता ने बताया कि उसने साल 2023 में सेंगर और उसके परिवार से छिपकर आजमगढ़ के एक युवक से शादी की थी। अब वह दिल्ली में पति के साथ रहती है। उसके दो बच्चे हैं एक बेटी और एक बेटा। घर में दिव्यांग सास भी साथ रहती हैं। लेकिन पीड़िता का कहना है कि उत्तर प्रदेश में उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं है। वह जहां भी जाती है, सुरक्षा कर्मी साथ रहते हैं, लेकिन परिजनों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पीड़िता के मुताबिक, हालात यह हैं कि जरूरत पड़ी तो “जेल में शरण” लेनी पड़ेगी ताकि जान बच सके।
उन्नाव मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता, उसके परिजन, गवाह और वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा मिली थी। बाद में केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा हटाने की मांग उठी—यह दलील देकर कि मुकदमे का फैसला हो चुका है और आरोपी दोषसिद्ध है। इसी प्रक्रिया के बाद इस साल मार्च में सीआरपीएफ सुरक्षा हटाने से जुड़ा फैसला सामने आया। पीड़िता पक्ष का कहना है कि उत्तर प्रदेश में जमीन पर हालात अब भी संवेदनशील हैं और खतरा खत्म नहीं हुआ है।
जमानत के फैसले के बाद दिल्ली में विरोध की कोशिश भी हुई। महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना इंडिया गेट के पास धरने पर बैठीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें और साथ मौजूद महिलाओं को मौके से हटाकर थाने ले जाकर बाद में छोड़ दिया। यह घटनाक्रम भी बताता है कि मामला सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा और प्रतिक्रिया का मुद्दा बन गया है।
पीड़िता के मुताबिक, यह लड़ाई सिर्फ न्याय पाने की नहीं रही—यह उसके पूरे परिवार के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। गांव की पुरानी रंजिश, प्रधानी चुनाव से जुड़े विवाद और बाद में बढ़ते टकराव ने एक “हंसते-खेलते परिवार” को तबाही के रास्ते पर धकेल दिया। पीड़िता का दावा है कि इस दुश्मनी की कीमत उसने अपने चार परिजनों की जान देकर चुकाई। पीड़िता ने 4 जून 2017 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उसी दिन उसने सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसके बाद उसके परिवार पर एक के बाद एक हमले और दबाव बढ़ते गए। पिता की मौत, हादसे, गवाहों का डर इन सबने उसके जीवन को लगातार असुरक्षा की तरफ धकेला। पीड़िता का साफ कहना है कि जमानत के बाद उत्तर प्रदेश में उसके परिवार और गवाहों पर खतरा बढ़ सकता है। वह चाहती है कि सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा हो और परिवार के लिए ठोस सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। UP News